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रविवार, 22 जनवरी, 2006 को 01:03 GMT तक के समाचार
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अफ़ग़ान महिलाओं के लिए नई पहल
अफ़ग़ान महिलाओं को अपनी बात खुलकर कहने का मौक़ा कम ही मिल पाता है
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में संयुक्त राष्ट्र की पहल पर रविवार से महिलाओं के लिए ‘फ़ैमिली रिस्पॉन्स यूनिट’ नाम का एक केंद्र खोला जा रहा है जहाँ उनकी समस्याओं से निबटने की कोशिश की जाएगी.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाएँ बढ़ रही हैं जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएँ पैदा हो रही हैं.

महिलाओं की ज़बरदस्ती शादी कराई जा रही है और वहाँ उनके पास ऐसा कोई ज़रिया नहीं है जिससे वे अपनी बात बिना किसी भय के कह सकें.

अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की एक प्रमुख वजह बाल विवाह बताई जाती है, मगर इसकी कुछ और वजहें भी हैं जिनमें महिलाओं को हिंसा, बलात्कार और विवाद के अलावा ऋणों के निपटारे के लिए महिलाओं और बच्चियों को बेच देना शामिल है.

पुलिस के मुताबिक़ पिछले साल एक जानी-मानी अफ़ग़ान कवयित्री की पति से पिटने पर लगी चोट की वजह से मौत हो गई थी.

एक अन्य घटना में जब एक व्यक्ति ने पत्नी को खिड़की से बाहर फेंक दिया तो उस महिला का पैर टूट गया था.

वैसे महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के मामले में अफ़ग़ानिस्तान अन्य देशों से कुछ अलग है. दरअसल मानवाधिकारों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि देश में 20 वर्ष से भी अधिक समय तक चले गृह युद्ध ने देश में हिंसा की एक संस्कृति विकसित कर दी है.

क़ानून

अफ़ग़ानिस्तान के संविधान के अनुसार तो पुरुष और महिला एक ही समान हैं मगर महिलाओं का आरोप है कि हक़ीक़त इससे कहीं अलग है.

घरेलू हिंसा के ज़िम्मेदार लोगों को कम ही सज़ा मिलती है. एक ख़बर तो ऐसी भी सामने आई थी कि एक महिला ने जब एक स्थानीय सैनिक कमांडर के विरुद्ध मामला दर्ज किया तो न्यायाधीश ने ही महिला की पिटाई की थी.

कुछ मामलों में तो महिलाओं ने जब पुलिस से मदद लेने की कोशिश की तो उनके साथ बलात्कार हुआ.

काबुल में एक स्वतंत्र टेलीविज़न चैनल महिलाओं की ज़बरदस्ती शादी जैसे कुछ संवेदनशील मुद्दे उठाता रहा है और उसके संवाददाताओं को कई बार धमकियाँ दी जा चुकी हैं.

महिला कार्यकर्ताओं का कहना है कि अफ़ग़ानिस्ता में घरेलू हिंसा का शिकार महिलाएँ शिकायत करने पर जेल तक पहुँच जाती हैं.

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