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शुक्रवार, 18 मार्च, 2005 को 20:08 GMT तक के समाचार
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मुस्लिम महिला ने पढ़ाई नमाज़

अमीना वदूद
क़रीब बराबर संख्या में महिलाओं और पुरूषों ने नमाज़ पढ़ी
अमरीका में एक मुस्लिम महिला प्रोफ़ेसर ने शुक्रवार को इतिहास रच दिया जब उन्होंने लगभग 100 लोगों को नमाज़ पढ़ाई.

अमीना वदूद ऐसा करने वाली पहली मुसलमान महिला हैं. उनसे पहले केवल पुरूष ही इमाम हुआ करते थे.

अमीना का कहना है कि उन्होंने ये क़दम इसलिए उठाया है क्योंकि उनका मानना है कि इस्लामी दुनिया में महिलाओं को भी हर मामले में पुरूषों के बराबर के अधिकार होने चाहिए.

अमीना ने कहा,"इस्लाम में औरतों और मर्दों के बीच समानता का मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है और मुसलमानों ने दुर्भाग्य से इतिहास का बहुत ही संकीर्ण दृष्टिकोण से अर्थ निकाला है".

वे अमरीका के वर्जीनिया राज्य में इस्लामी अध्ययन विभाग की प्रोफ़ेसर हैं.

मगर उनके इस प्रयास की राह में कई अड़चनें भी आईं और कई लोगों ने इसका विरोध भी किया है.

गिरिजाघर में नमाज़

 मुसलमानों ने दुर्भाग्य से इतिहास का बहुत ही संकीर्ण दृष्टिकोण से अर्थ निकाला है
अमीना वदूद

इस विशेष नमाज़ को एक गिरिजाघर में आयोजित करवाना पड़ा क्योंकि कई मस्जिदों ने इसके लिए जगह देने से मना कर दिया.

हारकर आयोजकों ने इसके लिए जब एक भारतीय कला प्रदर्शनी केंद्र को चुना तो उस जगह को भी बम से उड़ा देने की धमकी दी गई.

आख़िर में न्यूयॉर्क में मैनहटन के सेंट जॉन द डिवाइन चर्च में नमाज़ पढ़ी गई.

नमाज़ के लिए लगभग 100 लोग इकट्ठा हुए जिनमें लगभग 40 पुरूष और कुछ बच्चे भी थे.

विरोध-समर्थन

 अगर कोई महिला विद्वान हो या कोई पुरूष विद्वान हो, वे अगर नमाज़ पढ़ाना चाहते हैं तो पढ़ाएँ,ये तो बस इबादत के बारे में है
युसूफ़ अहमद

प्रोफ़ेसर वदूद के नमाज़ पढ़ाने का समर्थन तो हुआ है मगर अधिकतर मुसलमानों ने इसका विरोध किया है.

समर्थकों का कहना है कि इस्लाम में ऐसा कुछ नहीं है जिसमें किसी महिला पर महिलाओं और पुरुषों को नमाज़ पढ़ाने पर पाबंदी हो.

नमाज़ पढ़ने के बाद बाहर निकले पाकिस्तानी मूल के युवक युसूफ़ अहमद ने कहा,"मुझे तो कोई फ़र्क़ नहीं लगा, अगर कोई महिला विद्वान हो या कोई पुरूष विद्वान हो, वे अगर नमाज़ पढ़ाना चाहते हैं तो पढ़ाएँ,ये तो बस इबादत के बारे में है".

 जैसे ईसाईयों में महिला पादरी नहीं बन सकतीं, वैसे ही कोई मुस्लिम महिला भी इमाम नहीं बन सकती
नुसरत
वहीं विरोध करनेवालों में से कई तो गिरिजाघर के बाहर भी जमा हुए और प्रदर्शन किया.

एक युवती नुसरत ने इसे इस्लाम के ख़िलाफ़ बताया.

उन्होंने कहा,"इस्लाम में किसी महिला को पेश इमाम बनाने की इजाज़त नहीं है. 1400 साल से इस्लाम में पुरूष ही नमाज़ पढ़ा रहे हैं तो इसमें बदलाव क्यों हो. जैसे ईसाईयों में महिला पादरी नहीं बन सकतीं, वैसे ही कोई मुस्लिम महिला भी इमाम नहीं बन सकती".

वैसे इस पूरे आयोजन में दो घंटे लगे जिसके बीच पूरे गिरिजाघर को पुलिस ने घेरे में ले रखा था और ज़बरदस्त चौकसी बरती जा रही थी.

यहाँ तक कि अमीना वदूद स्वयँ नमाज़ पढ़ने के बाद गुप-चुप तरीक़े से बाहर चली गईं.

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