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बुधवार, 26 जनवरी, 2005 को 17:19 GMT तक के समाचार
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महिलाओं ने फ़तवों को नकारा

नमाज़ पढ़ती महिलाएँ
मस्जिद में नमाज़ पढ़ने की अनुमति नहीं मिलने पर तंबू में पढ़ी गई नमाज़
पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गाँव की 70 महिलाओं ने बक़रीद के मौक़े पर इमामों के फतवों और आपत्तियों की अनदेखी करते हुए नमाज़ पढ़ने के मामले में 'पुरुषों के एकाधिकार' को चुनौती दे दी है.

स्थानीय इमामों की ओर से मस्जिद में नमाज़ पढ़ने की अनुमति नहीं मिलने पर इन महिलाओं ने एक पंडाल में सामूहिक रूप से नमाज़ पढ़ी.

उन्होंने जल्दी ही मस्जिद में जाकर नमाज़ पढ़ने की भी घोषणा की है. इन महिलाओं के इस साहसिक क़दम से वीरभूम ज़िले के रामपुरहाट कस्बे का मुरारई इलाक़ा सुर्खियों में आ गया है.

इन महिलाओं ने बीते दिसंबर में ही मस्जिद में नमाज़ पढ़ने के इरादे से ‘महिला ईद समिति’ गठित की थी.

 मक्का में लाखों लोगों की भीड़ में भी महिलाओं के लिए अलग से नमाज़ पढ़ने की व्यवस्था की जाती है तो हम यहाँ क्यों नहीं पढ़ सकते?
फजलेतुन्नेसा बीबी

इन महिलाओं ने गनीडांगापाड़ा मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति माँगी थी लेकिन जब अनुमति नहीं मिली तो महिलाओं ने एक पंडाल में ही नमाज़ पढ़ने का फैसला किया.

समिति की सचिव और स्थानीय शिक्षिका हैदर मुमताज कहती हैं कि "हमने मुरारई की सभी मस्जिदों में नमाज पढ़ने की अनुमति माँगी थी लेकिन इमामों ने इसे शरीयत के खिलाफ बताते हुए ऐसा करने से इनकार कर दिया."

समिति की एक और सचिव तथा स्थानीय शिशु शिक्षा केंद्र की सुपरवाइज़र फजलेतुन्नेसा बीबी कहती हैं कि "मक्का में लाखों लोगों की भीड़ में भी महिलाओं के लिए अलग से नमाज़ पढ़ने की व्यवस्था की जाती है. तो हम यहाँ क्यों नहीं पढ़ सकते?"

आपत्ति

लेकिन एक स्थानीय मस्जिद के इमाम अब्दुल हई कहते हैं कि "हमारे पूर्वज महिलाओं के सरेआम नमाज पढ़ने को शरीयत विरोधी मानते थे. इसलिए हम इनका विरोध करते हैं."

 हमारे पूर्वज महिलाओं के सरेआम नमाज पढ़ने को शरीयत विरोधी मानते थे इसलिए हम इनका विरोध करते हैं
इमाम अब्दुल हई

मुरारई के पूर्व विधायक बी अहमद की पुत्री हैदर मुमताज सवाल करती हैं कि "जब पुरुष हज़ारों लोगों के साथ नमाज़ पढ़ सकते हैं तो हमें घरों में कैद होकर क्यों पढ़ना होगा? आखिर इसमें बुराई क्या है?" उसकी बहन हैदर नरीमन ने भी नमाज में शिरकत की थी.

इमामों की आपत्तियों के बावजूद इलाके के लोगों ने महिलाओं की इस पहल की सराहना की है. स्थानीय व्यापारी अबू ताहिर कहते हैं कि "पुरुषों की आपत्तियों के कारण ही महिलाएँ मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ सकतीं. यह गलत है."

राज्य महिला आयोग की सदस्य मीरातून नाहर का कहना है कि "महिलाओं का मस्जिद में नमाज़ पढ़ना शरीयत के खिलाफ नहीं है. दरअसल, पुरुषों ने अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए ही महिलाओं के मस्जिद में नमाज़ पढ़ने पर पाबंदी लगाई है."

इलाके के लोगों का कहना है कि जब महिलाएँ इस समय अंतरिक्ष में जा रही हैं तो धर्म का पालन करने के मामले में वे ऐसे किसी नियम को क्यों मानें? लेकिन महिलाओं की इस पहल ने इलाके में एक बार फिर इस मुद्दे पर गंभीर बहस छेड़ दी है.

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