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नेपाल में महिलाओं को मिली राहत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में महिला संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले का स्वागत किया है जिसमें कहा गया है कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता. नेपाल के कुछ हिस्सों में यह परंपरा रही है कि हर महीने कुछ दिनों के लिए महिलाओं को घर से बाहर गायों के साथ रहना पड़ता था. नेपाली सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह इसे कुप्रथा घोषित करे और एक महीने के अंदर इसे रोकने के लिए ठोस कार्रवाई करे. बुधवार को दिए गए अदालत के इस फ़ैसले का महिला और मानवाधिकार संगठनों ने व्यापक स्वागत किया है. महिलाओं का कहना है कि अदालत ने संसद की ओर से प्रदान किए गए बराबरी के अधिकार को बहाल किया है. नेपाल की एक प्रमुख महिला वकील पुष्पा भुसाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला ग़ैर बराबरी और अन्याय की परंपरा को समाप्त करने की दिशा में एक क़दम है. लेकिन ज़्यादातर महिला संगठनों का कहना है कि क़ानून बनाने भर से कुछ नहीं होगा, सरकार को इस दिशा में ईमानदारी से ठोस प्रयास करने होंगे. पश्चिमी नेपाल के दूर-दराज़ के इलाकों में यह प्रथा लंबे समय से जारी है और महिला संगठनों का कहना है कि इसमें सुधार तभी हो सकता है जब सरकार इसे रोकने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाए. जिन लोगों इलाक़ों में यह प्रथा जारी है वहाँ शिक्षा, विशेष रूप से नारी शिक्षा के प्रसार पर भी इन संगठनों ने ज़ोर दिया है. |
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