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शुक्रवार, 13 जनवरी, 2006 को 00:16 GMT तक के समाचार
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'महिलाएँ शराब पेश कर सकती हैं'
भारतीय महिलाएँ
भारत में महिलाएँ विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं और उन्होंने ख़ास पहचान बना है
भारत की राजधानी दिल्ली के उच्च न्यायालय ने उस क़ानून पर रोक लगा दी है जिसमें किसी सार्वजनिक स्थान पर महिलाओं के शराब बेचने पर रोक लगाने का प्रावधान है.

दिल्ली हाई कोर्ट के दो जजों के खंडपीठ ने गुरूवार को कहा कि यह क़ानून संविधान के ख़िलाफ़ है क्योंकि इससे महिलाओं के समानता के अधिकार और अपनी पसंद का कामकाज करने के अधिकार का उल्लंघन होता है.

न्यायालय ने यह फ़ैसला होटल एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया और दो महिला होटल कर्मचारियों की तरफ़ से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह फ़ैसला दिया.

जज मुकुल मुदगल और एचआर मल्होत्रा ने कहा कि 1914 से चले आ रहे इस क़ानून में महिलाओं के शराब पेश करने पर रोक लगाई गई है जो आवभगत वाले कारोबार में महिलाओं की प्रगति को बाधित करती है.

न्यायालय ने कहा कि यह क़ानून महिलाओं के साथ भेदभाव को रोकने वाले सिद्धांत का खुला उल्लंघन है और महिलाओं के समानता के अधिकारों का भी उल्लंघन करता है.

आधुनिक समाज

जजों ने कहा, "आधुनिक भारतीय समाज में महिला और पुरुष के बीच समानता का दावा किया जाता है, देश के आर्थिक विकास में महिलाओं को महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ दी जा रही हैं और महिलाओं को अपनी पसंद का कामकाज या प्रोफ़ेशन चुनने की आज़ादी है तो ऐसे में उनकी महत्वाकांक्षाओं पर रोक नहीं लगाई जा सकती."

महिलाओं का ख़ास अंदाज़
 इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि महिलाओं ने सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में आवभगत के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छुई हैं और महिलाओं के मधुर व्यवहार से आवभगत वाले कारोबारों में नए अंदाज़ पैदा होते हैं.
दो जजों का खंडपीठ

न्यायालय में दाख़िल याचिका में कहा गया था कि उस क़ानून से आवभगत के कारोबार में महिलाओं के आगे बढ़ने पर रोक लगती है.

जजों ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि चूँकि शराब सिर्फ़ बार में ही नहीं बल्कि रेस्तराँ, शादी-ब्याह के समारोह और होटलों के कमरों में तक में पेश की जाती है इसलिए उस क़ानून में लगाई गई पाबंदी से महिलाओं के इस कारोबार में आगे बढ़ने की संभावनाएँ कम होती हैं.

न्यायालय ने कहा, "इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि महिलाओं ने सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में आवभगत के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छुई हैं और महिलाओं के मधुर व्यवहार से आवभगत वाले कारोबारों में नए अंदाज़ पैदा होते हैं."

भारत सरकार और दिल्ली सरकार की तरफ़ से इस मामले में पेश होने वाले वकीलों ने अभी यह नहीं बताया कि क्या वे सुप्रीम कोर्ट में इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेंगे या नहीं.

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