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नेपाल में 25 अधिकारी गिरफ़्तार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में राजा ज्ञानेंद के विरोध में लगातार 13वें दिन भी प्रदर्शन जारी हैं और पुलिस ने गृह मंत्रालय में प्रदर्शन कर रहे 25 सरकारी अधिकारियों को गिरफ़्तार किया है. गृह मंत्रालय के जिन अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया है उनमें से चार वरिष्ठ अधिकारी हैं. पर्यटन मंत्रालय के नौ कर्मचारियों को भी गिरफ़्तार किया गया है. इस हड़ताल का आहवान सात राजनीतिक दलों के गठबंधन ने किया है जो चाहते हैं कि नरेश ज्ञानेंद्र फ़रवरी 2005 में सत्ता सीधे अपने हाथ में लेने का फ़ैसला वापस लें और लोकतांत्रिक सरकार फिर स्थापित करें. राजधानी काठमांडू के बाहर कई शहरों में भी बड़े प्रदर्शन हुए हैं और कुछ जगह हिंसा भी होने की ख़बर है. चार पत्रकारों को भी हिरासत में लिया गया है. स्थानीय पत्रकार भगीरथ योगी ने बीबीसी को बताया कि देश के कई सरकारी कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए हैं.
लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए गिरफ़्तार किया गया है. महत्वपूर्ण है कि पूरे पुलिस संगठन पर प्रशासनिक नियंत्रण रखने वाले गृह मंत्रालय में अधिकारियों ने प्रदर्शन ऐसे समय किया है जब प्रदर्शनों के दौरान पाँच लोग सुरक्षा बलों की गोलियों का निशाना बन चुके हैं. उधर राजधानी काठमांडू में खाद्य पदार्थों की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए सेना को तैनात किया गया है. ग़ौरतलब है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हुए. इससे पहले वे वर्ष 1990 में ऐसी किसी हड़ताल में शामिल हुए थे. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में खाद्य पदार्थों की कमी17 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस काठमांडू में कर्फ़्यू, मोबाइल फ़ोन बंद08 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में विरोध प्रदर्शनों के दौरान झड़पें07 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में हिंसा, दस की मौत06 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस सरकार ने 'संघर्षविराम' को ख़ारिज किया04 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस 'माओवादियों का सशस्त्र अभियान बंद'03 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस माधव के घर पर छापे की आलोचना23 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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