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नेपाली संसद की ऐतिहासिक बैठक हुई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शुक्रवार को हुई बैठक के साथ ही नेपाली संसद चार साल बाद बहाल हो गई है. नेपाल के नवनियुक्त प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला बीमार हैं और इसके कारण वे शपथ नहीं ले सके. बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी का कहना है कि तीन सप्ताह लंबे आंदोलन के बाद संसद की बहाली को लेकर काठमांडू में उत्सव जैसा माहौल था. उधर माओवादियों ने काठमांडू में एक रैली की जिसमें करीब दो हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया. रैली के लिए सैनिक या पुलिसकर्मी तैनात नहीं किए गए थे. संसद की बहाली संसद की बैठक की शुरूआत उप सभापति चित्रलेखा यादव ने की.
संसद की बैठक कुल आधे घंटे चली जिसमें आंदोलन के दौरान मारे गए 14 लोगों को मौन रखकर श्रद्धांजलि भी दी गई. निचले सदन की बैठक तो हो गई लेकिन संसद के उच्च सदन की बैठक अभी नहीं हो सकी है. संसद की बहाली तीन हफ्तों तक चले आंदोलन के बाद हुई है. इस आंदोलन का आहवान सात राजनीतिक दलों के गठबंधन ने किया था जिसका माओवादी विद्रोहियों ने खुलकर समर्थन किया. राजा ज्ञानेंद्र ने चार साल पहले संसद को भंग कर सत्ता अपने हाथों में ले ली थी और तभी से बहुदलीय लोकतंत्र की स्थापना की मांग हो रही थी. इस महीने की शुरुआत में इस माँग ने आंदोलन का रुप ले लिया था. गुरुवार को राजधानी काठमांडू में जिस विशाल रैली में राजा ज्ञानेंद्र ने संसद को बहाल करने की घोषणा की उसमें कोइराला ख़ुद मौजूद नहीं थे क्योंकि वे गंभीर रुप से बीमार हैं. वे अपनी बेटी के घर पर सांस की बीमारी का इलाज करवा रहे हैं और बिस्तर पर ही हैं. भारत ने स्वागत किया भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गिरिजा प्रसाद कोईराला से फ़ोन पर बात की है और उन्हें भारत की ओर से संसद की बहाली पर बधाई दी है. प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार संजय बारु ने बीबीसी को बताया कि मनमोहन सिंह ने कोईराला को प्रधानमंत्री बनने की शुभकामनाएँ देते हुए स्वास्थ्य लाभ की कामनाएँ भी की हैं. प्रधानमंत्री सिंह ने कहा है कि नेपाल को वापस रास्ते में लाने के लिए भारत नेपाल की हरसंभव मदद करेगा. उल्लेखनीय है कि नेपाल में लोकतंत्र बहाली के लिए चल रहे आंदोलन को लेकर चिंता जताई थी और नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र के पास कर्णसिंह के रुप में अपना दूत भी भेजा था. सैनिकों का अपहरण इस बीच नेपाली सेना ने कहा था कि माओवादी विद्रोहियों ने सेना के 22 जवानों का अपहरण कर लिया है. सेना के अनुसार दक्षिणपूर्वी ज़िले धानकुटा में अपहरण की घटना हुई थी और उस समय सैनिकों के पास हथियार नहीं था क्योंकि वे छुट्टी पर घर जा रहे थे. बाद में माओवादियों ने अपहरण का खंडन करते हुए कहा है कि सैनिकों को किसी भ्रम की वजह से रोक लिया गया था और अब उन्हें रिहा कर दिया गया है. |
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