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'एलटीटीई से मतभेद सुलझाना चाहते हैं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका के विदेश मंत्री मंगल समरवीरा ने दोहराया है कि राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की सरकार तमिल विद्रोहियों के साथ चल रहे मतभेद को बातचीत के ज़रिए सुलझाने के लिए कटिबद्ध है. भारत के दौरे पर आए समरवीरा ने नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में देश में जारी हिंसा के लिए एलटीटीई को ज़िम्मेदार ठहराया. हाल में श्रीलंका के सेना प्रमुख पर हुए आत्मघाती हमले के बाद सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच हिंसा में आयी तेज़ी के बाद शांति प्रक्रिया के पटरी से उतरने की आशंका व्यक्त की जा रही है. इसी सिलसिले में जापान के विशेष दूत यासुशी आकाशी एलटीटीई नेता प्रभाकरन से मिलने वाले थे लेकिन प्रभाकरन ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया. प्रभाकरन ने कहा कि जब तक श्रीलंका सरकार आम तमिलों की हत्याएँ बंद नहीं करती इस मुलाक़ात का कोई अर्थ नहीं है. लेकिन श्रीलंका के विदेश मंत्री मंगल समरवीरा ने कहा कि तमिल विद्रोही नेता प्रभाकरन के जापान के दूत से मुलाक़ात करने से इनकार करने से उन्हें कोई हैरत नहीं हुई. उन्होंने कहा, "पिछले लगभग 30 वर्षों में कोई भी तमिलों के साथ बातचीत में ख़ास आगे नहीं बढ़ पाया तो ऐसे में तमिल विद्रोहियों के फ़ैसले से मुझे कोई हैरत नहीं हुई है." विचार-विमर्श अपनी भारत यात्रा के दौरान श्रीलंका के विदेशमंत्री समरवीरा ने सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की थी. उन्होंने मंगलवार को रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी, वाणिज्य मंत्री कमलनाथ, नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल और उप विदेश मंत्री आनंद शर्मा के साथ मुलाक़ात की.
उन्होंने बताया कि भारतीय नेताओं के साथ व्यापार और सांस्कृतिक क्षेत्र में कई मुद्दों पर चर्चा हुई और श्रीलंका का जातीय संघर्ष भी बातचीत का एक अहम मुद्दा था. समरवीरा ने कहा कि भारत सरकार ने श्रीलंका की अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है. उन्होंने कहा, " प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कई बार दक्षिण एशिया में स्थिरता और संपन्नता लाने के प्रति अपनी कटिबद्धता व्यक्त कर चुके हैं और उनसे मेरी मुलाक़ात के दौरान उन्होंने श्रीलंका की अखंडता के प्रति भारत सरकार कटिबद्धता फिर व्यक्त की है." मगर उनके बयान से यही लगता है कि श्रीलंका में कोई भूमिका निभाने के मामले में भारत फूंक फूंक कर क़दम रखना चाहता है. जहाँ तक दो देशों के बीच रक्षा समझौते की बात है, विदेश मंत्री समरवीरा ने कहा कि भारत उसके पहलुओं पर अभी सोच रहा है. श्रीलंका के विदेश मंत्री ने कहा की भारत सरकार के मंत्रियों के साथ बातचीत में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मज़बूत करने के समझौतों पर चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि तेल खोजने में भारत की महारथ को ध्यान में रखते हुए श्रीलंका ने भारतीय कंपनी ओएनजीसी को श्रीलंका में एक क्षेत्र देने का प्रस्ताव रखा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि दक्षिण श्रीलंका में सूनामी से क्षतिग्रस्त हुई रेल प्रणाली की मरम्मत और निर्माण के लिए भारत सरकार के साथ हुए समझौते पर जल्द ही अमल शुरू हो जाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें जापानी दूत की विद्रोहियों से मुलाक़ात09 मई, 2006 | भारत और पड़ोस प्रभाकरन से नहीं मिल पाएँगे अकाशि07 मई, 2006 | भारत और पड़ोस एलटीटीई की नौका को डुबोने का दावा05 मई, 2006 | भारत और पड़ोस 'नेपाल मुद्दे पर भारत बड़ी भूमिका निभाए'05 मई, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में बारुदी सुरंग विस्फोट, पांच मरे01 मई, 2006 | भारत और पड़ोस 'एलटीटीई विद्रोहियों ने विरोधियों को मारा'30 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस दोनों पक्षों से शांतिवार्ता की अपील28 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका संकट पर नोर्वे में चर्चा28 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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