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श्रीलंका समय चक्र - 1 | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में प्रमुख घटनाओं का विवरण - पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व - भारत से कुछ लोग इस द्वीप में जाकर बसे जिनमें ज़्यादातर सिंहली थे. तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व - भारत से तमिलों ने निकलना शुरू किया. 1505 - कोलंबो में पुर्तगाली पहुँचे और तभी से इस द्वीप में यूरोपीय दिलचस्पी शुरू हुई. 1815 - ब्रिटेन ने पूरे द्वीप पर सत्ता स्थापित की और ऐसा करने वाले पहले यूरोपीय शासक बने. तब तक उस द्वीप को सीलोन के नाम से जाना जाता था. उन्होंने दक्षिणी भारत से तमिल मज़दूरों को लाना शुरू किया. वे चाय, कॉफ़ी और नारियल के खेतों में काम करते थे. 1833 - अंग्रेज़ी को आधिकारिक भाषा बनाया गया. 1931 - ब्रितानियों ने सीलोन के लोगों को मताधिकार दिया और सत्ता का बँटवारा भी शुरू किया. 1948 - सीलोन को ब्रिटेन से पूर्ण स्वतंत्रता मिली. सिंहली राष्ट्रवाद 1949 - सिंहल राष्ट्रवादी लहर की वजह से सोलोमन भंडारनायके की जीत हुई. सिंहला को एक मात्र आधिकारिक भाषा बना दिया गया. इसके अलावा कुछ और भी ऐसे उपाय किए गए जिनसे सिंहलियों और बौद्ध अनुयाइयों की भावनाएँ प्रबल होती थीं. 1959 - सोलोमन भंडारनायके की एक बौद्ध भिक्षु ने हत्या कर दी. उनके बाद उनकी विधवा सिरमावो भंडारनायके ने सत्ता की बागडोर संभाली. उन्होंने भी सिंहल राष्ट्रवादी योजनाएँ और कार्यक्रम जारी रखे. 1965 - विपक्षी यूनाइटेड नेशनल पार्टी ने चुनाव जीता और उसने राष्ट्रवादी योजनाओं और कार्यक्रम में परिवर्तन शुरू किया. 1970 - सिरमावो भंडारनायके फिर से सत्ता में लौटीं और राष्ट्रवादी कार्यक्रमों का विस्तार किया. जातीय तनाव 1971 - सिंहली मार्क्सवादी विद्रोह हुआ जिसमें छात्रों और वामपंथी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.
1972 - सीलोन ने अपना नाम बदलकर श्रीलंका किया और बुद्ध धर्म को देश में प्रमुख स्थान मिला. इससे तमिल संप्रदाय की नाराज़ी और बढ़ गई. 1976 - श्रीलंका के उत्तर और पूर्व में तमिलों की बहुलता है और वहाँ तनाव बढ़ता गया. उसी समय तमिलों के विद्रोही संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (एलटीटीई) का गठन हुआ. 1977 - पृथकतावादी तमिल यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट (टीयूएलएफ़) ने तमिल बहुल क्षेत्रों में सभी सीटें जीतीं. 1983 - लिट्टे के घात लगाकर किए गए हमले में 13 सैनिक मारे गए. इसके बाद तमिल विरोधी दंगे भड़क उठे जिनमें कई सौ लोगों की मौत हो गई. श्रीलंका के उत्तरी क्षेत्र में तमिलों और सरकारी सेना के बीच लड़ाई तेज़ हो गई. गृहयुद्ध की गंभीरता 1985 - सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच शांति वार्ता की पहली कोशिश नाकाम हो गई. 1987 - सरकारी सेनाओं ने उत्तरी शहर जाफ़ना में तमिल विद्रोहियों को और पीछे हटा दिया. सरकार ने एक ऐसे समझौते पर दस्तख़त किए जिनके तहत तमिल बहुल इलाक़ों में नई परिषदों का गठन किया जाना था. भारत के साथ भी समझौता हुआ जिसके तहत भारत शांति सेना की तैनाती हुई. 1988 - वामपंथी धड़े और सिंहल राष्ट्रवादी पार्टी जनता विमुक्ति पैरामुना (जेवीपी) ने भारत-श्रीलंका समझौते के ख़िलाफ़ अभियान शुरू किया. 1990 - उत्तरी क्षेत्र में काफ़ी लड़ाई को देखते हुए भारतीय सेना ने देश छोड़ दिया. श्रीलंका की सेना और पृथकतावादी तमिल विद्रोहियों के बीच हिंसा और बढ़ गई. 1991 - भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की तमिलनाडु राज्य में एक आत्मघाती हमले में मौत हो जाती है जिसके लिए तमिल विद्रोहियों को ज़िम्मेदार ठहराया गया. युद्ध और कूटनीति 1993 - राष्ट्रपति प्रेमदासा एक बम हमले में मारे गए जिसके बारे में कहा गया था कि तमिल विद्रोहियों ने किया.
1994 - राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा युद्ध समाप्त करने के वादे के साथ सत्ता में आती हैं. तमिल विद्रोहियों के साथ शांति वार्ता शुरू होती है. 1995 - शांति वार्ता नाकाम हो गई और तमिल विद्रोहियों ने बम हमले शुरू कर दिए. सराकरी सेनाओं ने तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ एक बड़ा अभियान चलाते हुए उन्हें जाफ़ना से बाहर निकाल दिया. 1996 - आपातकाल पूरे देश तक बढ़ा दिया और तमिल विद्रोहियों ने राजधानी कोलंबो में भी बम हमले किए. 1997 - सरकार ने तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ एक और बड़ा अभियान शुरू किया. 1998 - तमिल विद्रोहियों ने श्रीलंका के सबसे पवित्र बौद्ध स्थल को निशाना बनाया. भीषण लड़ाई के बाद तमिल विद्रोहियों ने उत्तरी क्षेत्र में कुछ प्रमुख शहरों पर क़ब्ज़ा कर लिया. 1999 - राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा एक चुनाव रैली में हुए बम धमाके में घायल हो गईं. वे फिर से राष्ट्रपति चुनी गईं. आगे की घटनाओं के बारे में जानने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें. | इससे जुड़ी ख़बरें जापानी दूत की विद्रोहियों से मुलाक़ात09 मई, 2006 | भारत और पड़ोस 'एलटीटीई से मतभेद सुलझाना चाहते हैं'09 मई, 2006 | भारत और पड़ोस प्रभाकरन से नहीं मिल पाएँगे अकाशि07 मई, 2006 | भारत और पड़ोस एलटीटीई की नौका को डुबोने का दावा05 मई, 2006 | भारत और पड़ोस 'नेपाल मुद्दे पर भारत बड़ी भूमिका निभाए'05 मई, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में बारुदी सुरंग विस्फोट, पांच मरे01 मई, 2006 | भारत और पड़ोस 'एलटीटीई विद्रोहियों ने विरोधियों को मारा'30 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस दोनों पक्षों से शांतिवार्ता की अपील28 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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