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सार्क की शुरुआत 'आतंकवाद पर चिंता' से | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कड़े सुरक्षा इंतज़ामों के बीच श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में शनिवार को पंद्रहवाँ दक्षिण एशियाई सहयोग संगठन (सार्क) का सम्मेलन शुरु हो गया है. एक तरह से सम्मलेन की धारा तय करते हुए हुए सभी नेताओं ने दक्षिण एशिया में 'आतंकवाद की समस्या' पर चिंता जताई है. दो दिनों के इस सम्मेलन में आपसी संबंध बढ़ाने के उपायों पर चर्चा होनी है लेकिन सबसे अहम चर्चा 'आतंकवाद से निपटने के लिए साझा क़ानूनी प्रयासों' पर होने की संभावना है. माना जा रहा है कि इस सम्मेलन में भारत और अफ़ग़ानिस्तान के पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण हो गए रिश्तों की छाया भी दिखाई देगी. भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित आठ देशों के प्रमुख वहाँ पहुँचे हुए हैं. भारत के अलावा सार्क के सदस्य देशों में पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, मालदीव और अफ़ग़ानिस्तान हैं. चरमपंथ पर हमला अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने चरमपंथ के मुद्दे पर तीख़ा हमला बोला. करजई ने कहा "बेहिसाब और विचारहीन हिंसा आतकवादियों को मिल रहे संस्थागत सहयोग के कारण है. आतंकवादियों को मिल रही शरण के कारण पकिस्तान ने अपनी एक महान नेता बेनजीर भुट्टो को खो दिया." उन्होंने कहा, "आतंक की घटनाओं से न केवल अफ़ग़ानिस्तान और भारत प्रभावित हैं बल्कि पूरा दक्षिण एशिया इन घटनाओं के प्रभावों से ग्रसित है." करज़ई के बाद बोलते हुए श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त अभियान के ज़रूरत बताई. उन्होंने कहा "आतंकवाद कहीं भी आतंकवाद ही है और आतंकवादी अच्छे या बुरे नहीं होते." अहम मुद्दा माना जा रहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय दूतावास पर हुए चरमपंथी हमले और फिर बंगलौर और अहमदाबाद में हुए विस्फोटों की पृष्ठभूमि में चरमपंथ सार्क का सबसे गर्म और अहम मुद्दा रहेगा.
भारत इस सम्मेलन में चरमपंथ से निपटने के लिए साझा प्रयासों और एक क़ानूनी ढाँचा विकसित करने पर ज़ोर देगा. वैसे भारत के अलावा पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और श्रीलंका को भी चरमपंथ की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार संभावना है कि इस सम्मेलन में अपराध से निपटने के लिए आपस में क़ानूनी सहायता बढ़ाने की सधि पर विचार होगा. पिछली बार प्रत्यार्पण के मामले पर पाकिस्तान की आपत्तियों के बाद इस पर कोई सहमति नहीं बन सकी थी. इसके अलावा सार्क के सदस्य देश खाद्यान्न सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा पर साझा प्रयासों पर चर्चा करेंगे. माना जा रहा है कि सम्मेलन से अलग भी राष्ट्राध्यक्षों की अहम मुलाक़ातें होनी हैं. जिनमें सबसे महत्वपूर्ण भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों की संभावित मुलाक़ात को माना जा रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें मनमोहन-गिलानी की मुलाक़ात आज संभव02 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस 'चार साल में रिश्ते ऐसे कभी नहीं थे'01 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस मनमोहन रवाना, होंगी अहम मुलाक़ातें01 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस 'प्रेशर कुकर' में तनाव कम हुआ: कुरैशी31 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस सार्क सम्मेलन: कूटनीति चरम पर31 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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