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शनिवार, 02 अगस्त, 2008 को 02:32 GMT तक के समाचार
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मनमोहन-गिलानी की मुलाक़ात आज संभव
मनमोहन सिंह और युसूफ़ रज़ा गिलानी
दोनों देशों की ओर से पिछले कुछ समय से बयानबाज़ी चल रही है
सार्क सम्मेलन में भाग लेने पहुँचे भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी की मुलाक़ात आज होने की संभावना है.

यह मुलाक़ात सम्मेलन से अलग होगी.

इस मुलाक़ात से पहले दोनों देशों के बीच रिश्ते उतने मधुर नहीं दिख रहे हैं जितने कि पिछले चार सालों से दिख रहे थे.

दोनों देशों के बीच तनाव के संकेत दोनों ही ओर से अधिकारी दे रहे हैं और ऐसे में यह कहना थोड़ा कठिन दिखता है कि इस मुलाक़ात का नतीजा क्या निकलेगा.

कोलंबो में मौजूद बीबीसी हिंदी के संवाददाता अविनाश दत्त का कहना है कि मुलाक़ात से पहले भारत का अपने पड़ोसी देश के प्रति रुख सख्त होता जा रहा है.

भारत के विदेश मंत्री शिव शंकर मेनन ने यहाँ शुक्रवार शाम को पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "भारत-पाकिस्तान के रिश्ते ऐसे हो गए हैं जैसे पिछले चार साल से नहीं थे. ऐसा इसलिए है क्योंकि हाल के दिनों में कई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ हुई हैं."

मेनन ने कहा, "हाल की घटनाओं का प्रभाव भारत और पकिस्तान के बीच जारी बातचीत के भविष्य पर पड़ा है इसीलिए हम पकिस्तान से बात कर रहे हैं."

गुरुवार को पकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने बताया था कि भारत और पकिस्तान के प्रधानमंत्री द्विपक्षीय बातचीत के बाद एक विस्तृत बयान जारी करेंगे. इस बारे में जब मेनन से पूछा गया तो उन्होंने साझा बयान की बात को एक तरह से टालते हुए कहा कि "विस्तार से वो भी बात करेगें और हम भी, आख़िर ये हमारी खुली और मित्रतापूर्ण बातचीत है".

कोलंबो में भारतीय अखबार द हिंदू के वरिष्ठ संवाददाता बी मुरलीधर रेड्डी पाकिस्तान में दस साल काम कर चुके हैं और वहां के हालत को बखूबी समझते हैं.

आख़िर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की बैठक से पहले विदेश सचिव ने ऐसा बयान क्यों दिया, इस पर रेड्डी बोले, "परेशानी भारत सरकार के सामने ये है कि पकिस्तान में चुनी हुई सरकार के बावजूद वहाँ फ़ौज और आईएसआई का ही दबदबा है. अब भारत सरकार ये नहीं जानती कि ये चुनी हुई सरकार का कितना दबाव फ़ौज और आईएसआई पर डाल पाएगी. वो चाहते हैं कि वहाँ की सरकार कुछ करके दिखाए."

रेड्डी ये भी मानते हैं कि आईएईए से भारत को औपचारिक हरी झंडी मिलने के बाद भारत का मनोबल इस समय बहुत बढ़ा हुआ है और ठीक इसी कारण से पकिस्तान की चुनी हुई सरकार के लिए परेशानी बढ़ गई है.

इससे पहले शुक्रवार को मनमोहन सिंह ने श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से मुलाकात की और व्यापार सहित दूसरे द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की.

संभावना है कि उनकी नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला से भी मुलाक़ात हो.

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