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सार्क सम्मेलन में संपर्क बढ़ाने पर ज़ोर

प्रणव मुखर्जी
विदेश मंत्री बांग्लादेश से भी संबंधों को बेहतर करने के पक्ष में हैं
भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी का कहना है कि इस बार सार्क सम्मेलन में आपसी संपर्क बनाने पर ज़ोर दिया जाएगा.

सम्मेलन से पहले विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बीबीसी से बातचीत की.पेश है बातचीत के मुख्य अंश..

सार्क, यूरोपीय यूनियन या आशियान की तरह बड़ी आर्थिक शक्ति क्यों नहीं बन पाई?

प्रणव मुखर्जी- सार्क स्थापित करने का जो लक्ष्य था वो था दक्षिणी एशियाई देशों के बीच वाणिज्य बढ़े, एक दूसरे के साथ संपर्क बढ़े और इसके साथ ही एक-दूसरे की आर्थिक नीति में समानताएँ हों. निश्चित तौर पर यूरोपीय यूनियन या आसियान की तुलना में वाणिज्य क्षेत्र में सार्क ने बहुत प्रगति नहीं की है लेकिन सार्क ने एक रास्ता दिखाया है. पिछले एक दशक से भी ज़्यादा से सार्क ने लगभग हर देश की राष्ट्रीय आय में वृद्धि हुई और ये देश वृद्धि की इस दर को बनाए रखने में क़ामयाब हैं. लगभग हर देश की जीडीपी या सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर छह-साढ़े छह कहीं सात. भारत में आठ-साढ़े आठ तक है और वृद्धि की दर को अगर हम बड़े पटल पर आर्थिक समझौतों के क्षेत्र में ला पाएँ. जिस भी तरह से हो संपर्क बढ़ाकर, थल, जल या फिर आकाश मार्ग से संपर्क को बढ़ा कर, अगर हम आगे बढ़ पाएँ तो आने वाले समय में सार्क की संभावनाएँ बढ़ेंगी.

सवाल- संभावनाओं के बढ़ने से आपका आशय क्या है?

जवाब- इस दिशा में कई प्रस्ताव हैं और कई फ़ैसले लिए गए हैं. इन फ़ैसलों को लागू करना है. उदाहरण के लिए साफ्टा को लीजिए. एक जनवरी 2006 को हमने फ़ैसला लिया और इसको सभी सदस्य देशों ने मान लिया. जुलाई से ये औपचारिक तौर पर शुरू हुआ. कुछ समस्याएँ पाकिस्तान के साथ रह गई. हमारे और पाकिस्तान के बीच खुला व्यापार नहीं होता. ये व्यापार एक पोज़िटिव लिस्ट के आधार पर होता है. एक हज़ार ऐसी वस्तुएँ हैं जिनका लेन-देन भारत और पाकिस्तान के बीच हो सकता है. इसलिए ज़रूरत इस बात की है कि साफ्टा ठीक से काम करे और इस दिशा में बातचीत चल रही है. कोशिश हो रही है. हमें उम्मीद है कि इस मुद्दे पर भी हमारे और पाकिस्तान के बीच समझौता हो पाएगा.

सवाल- आपने आपसी संपर्क बढ़ाने की दिशा में कुछ प्रस्तावों की बात कही. क्या नया है इस प्रस्ताव में ?

जवाब- देखिए, अफ़गानिस्तान के रहने से हम मध्य एशिया और पश्चिम एशिया के साथ संपर्क बढ़ा सकते हैं. भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के रास्ते बांग्लादेश होकर हम म्यांमार के साथ संपर्क कर सकते हैं और म्यांमार के ज़रिए हम आशियान देशों के साथ संपर्क स्थापित कर सकते हैं. इस तरह के प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है. रेल मार्ग तैयार करने पर चर्चा हो रही है. हम पाकिस्तान से बात कर रहे हैं. पाकिस्तान अगर हमें रास्ता दे तो हमारा अफगानिस्तान जाने का रास्ता बन सकता है, भारत ऐसा देश है जो लगभग सभी देशों से बड़ा है, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका से थोड़ा दूर हैं पर हैं मालदीव के साथ भी हैं.

सवाल- तो क्या आप कह रहे हैं कि इस बार सार्क सम्मेलन का ज़ोर बेहतर संपर्क करने पर ही होगा?

जवाब-हमारा तो ज़ोर ही संपर्क बढ़ाने पर है, इसके अलावा भी कुछ और मुद्दों पर फ़ैसले लेने हैं जैसे सार्क विश्वविद्यालय, सार्क फूड बैंक, सार्क विकास फंड.

सवाल- सार्क विश्वविद्यालय की स्थापना कहाँ होगी?
जवाब- जगह अभी नहीं चुनी गई है पर ये फ़ैसला हो गया है की ये भारत में होगा.

सवाल-क्या आप ये कहने की स्थिति में हैं कि इस समय भारत और बांग्लादेश के संबंध अच्छे हैं?

जवाब- संबंध तो अच्छे ही हैं पर बीच-बीच में मुश्किलें आती है. बातचीत से उनका हल तलाशा जाता है, इसी नीति पर हम चलते हैं. भारत और बांग्लादेश के बीच रेल अभी शुरू नहीं हुई है पर कोशिश हो रही है. इसके अलावा अगर हम मिलकर पॉवर ग्रिड तैयार कर पाएँ. भूटान के साथ हमारा विद्युत के क्षेत्र में समझौता है और वहाँ के लोगों को इससे रोज़गार मिला है और भूटान को काफ़ी मदद मिली है. भारत और श्रीलंका के बीच मुक्त व्यापार से दोनों देशों को ही फ़ायदा हुआ है.

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