|
'सामरिक कार्यक्रम में दख़ल नहीं होगा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि भारत के रणनीतिक कार्यक्रम में न तो बाहरी निरीक्षण और न ही दख़ल की इजाज़त दी जाएगी. लोकसभा में भारत-अमरीका परमाणु सधि के पक्ष में बोलते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का रणनीतिक कार्यक्रम इस संधि के दायरे के बाहर है और ये भारत का अधिकार है. उन्होंने कहा कि सरकार ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर अमरीकी विधेयक में कुछ बाहरी और रुकावट पैदा करने वाले प्रावधानों को देखा है. अमरीकी संसद से पारित होने के बाद भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर अब राष्ट्रपति बुश के हस्ताक्षर होने हैं. भारत में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी और वामदलों ने इस समझौते पर आपत्ति जताई है. विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी का कहना था कि भारत सरकार मानती है कि उसकी विदेश नीति केवल उसके राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए ही चलाई जाएगी और ये भारत का अधिकार है. उनका कहना था कि इस समझौते की ज़रूरत भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं और उसकी तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण पड़ी. उनका कहना था कि इस समय भारत की ऊर्जा ज़रूरतों का केवल तीन प्रतिशत परमाणु ऊर्जा से आता है जबकि भारत को वर्ष 2022 तक तीस हज़ार मेगावॉट परमाणु ऊर्जा चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत-परमाणु समझौता अख़बारों में छाया09 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना समझौते को अमरीकी संसद की मंज़ूरी09 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना भारत-अमरीका परमाणु समझौता मंज़ूर09 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना परमाणु समझौते के मसौदे पर सहमति08 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||