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परमाणु समझौते के मसौदे पर सहमति | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी संसद के वार्ताकार उस विधेयक के मसौदे पर अंतिम सहमति बनाने में सफल हो गए हैं जिसके तहत भारत के साथ परमाणु समझौते को मान्यता मिलेगी. इस क़ानून के तहत ही अमरीका से भारत को असैनिक परमाणु ईंधन की आपूर्ति संभव हो सकेगी. हालांकि इस मसौदे को अब भी अमरीकी संसद के दोनों सदनों की मंज़ूरी मिलनी बाक़ी है. संभावना है कि संसद के निचले सदन में इसे शुक्रवार को विचारार्थ रखा जाएगा. इस मसौदे के विवरण अभी तक नहीं मिल सके हैं. उम्मीद लेकिन दिल्ली के प्रवास पर आए अमरीकी विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स ने उम्मीद जताई है कि कांग्रेस के सामने जो विधेयक पेश होगा वो राष्ट्रपति बुश और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच हुए समझौते के सिद्धातों के अनुरूप ही होगा. गुरुवार को दिल्ली में भारतीय विदेश सचिव शिव शंकर मेनन के साथ एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए बर्न्स ने कहा था कि आने वाले 36 घंटों के भीतर परमाणु समझौते को क़ानूनी शक्ल देने वाला विधेयक अमरीकी संसद के सामने पेश कर दिया जाएगा. इससे पहले इस क़ानून का एक-एक विधेयक अमरीकी सीनेट और हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव में पारित हो चुका है. अब उन दोनों विधेयकों के प्रावधानों को मिला कर एक नए विधेयक का मसौदा तैयार किया गया है. इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों को बिना किसी संशोधन के मंज़ूर करना होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें 'समझौता तय शर्तों पर होने की उम्मीद'07 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस भारत-अमरीका परमाणु सहमति पर बहस16 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बाउचर को परमाणु समझौते की उम्मीद10 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'परमाणु समझौते में अड़चनें आ सकती हैं'08 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते के लिए विशेष दूत नियुक्त31 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु सहमति पर वैज्ञानिक 'संतुष्ट'26 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु सहमति भारत के हित में?22 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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