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गुरुवार, 16 नवंबर, 2006 को 15:37 GMT तक के समाचार
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भारत-अमरीका परमाणु सहमति पर बहस
सीनेट
सहमति बन गई है कि सीनेट में समझौते को किस तरह और किस स्वरूप में लाया जाए
भारत-अमरीका परमाणु सहमति को मंज़ूरी की प्रक्रिया अहम दौर में पहुँच गई है और इस दौर में अमरीकी संसद के उच्च सदन सीनेट में इस पर गुरूवार को बहस शुरू हुई है.

इस परमाणु सहमति की मंजूरी प्रक्रिया अहम दौर में पहुँच गई है और अब सब नज़रें सीनेट में इस पर होने वाली बहस और फिर मतदान पर केंद्रित हैं.

समाचार एजेंसियों के अनुसार इस बारे में सहमति बन गई है कि सीनेट में इस समझौते को किस तरह और किस स्वरूप में लाया जाए.

पहले इस विषय में ही चिंता जताई जा रही थी कि ये समझौते सीनेट के 'लेम डक' यानी आख़िरी सत्र में चर्चा के लिए रखा भी जाएगा या नहीं.

इस सहमति को जुलाई में प्रतिनिधि सभा और सीनेट के अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति की मंज़ूरी मिल चुकी है. लेकिन यदि इसे सीनेट से मंज़ूरी मिल भी जाती है तो अमरीकी कांग्रेस यानी पूरी संसद को इसे पारित करना होगा.

ताज़ा गतिविधियों में अमरीका में सीनेट में बहुमत के नेता बिल फ़्रिस्ट ने इस समझौते पर सीनेट में चर्चा करने के सर्वसम्मति से हुए फ़ैसले के बारे में घोषणा की. पहले ये बहस बुधवार को होनी थी.

समाचार एजेंसियों के अनुसार सीनेट के अल्पमत के नेता हैरी रीड का कहना था, "कई संशोधनों पर बहस होनी है...लगभग 18 संशोधन हैं. लेकिन हम सत्र समाप्ति से पहले इस विधेयक पर काम समाप्त करेंगे. यही बहुमत के नेता ने कहा है और मैं जिस भी तरह ज़रूरी हुआ, उनके साथ सहयोग करुँगा."

पुष्टि करने का अनुरोध

अमरीकी सीनेट के विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष रिचर्ड लुगर ने एक बयान जारी कर कहा, "मैं सभी सहयोगियों से अनुरोध करुँगा कि वे भारत-अमरीका समझौते की पुष्टि करें. इस विधेयक के पारित होने से अमरीका भारत के साथ शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग कर पाएगा और संसद की प्राथमिकताओं के अनुसार अमरीकी सुरक्षा और अप्रसार प्रयास भी सुनिश्चित हो पाएँगे."

उनका ये भी कहना था, "ये समझौता भारत को और परमाणु परीक्षण न करने और अमरीका के साथ परमाणु प्रसार रोकने में काम करने के लिए प्रोत्साहित करेगा."

 मैं सभी सहयोगियों से अनुरोध करुँगा कि वे भारत-अमरीका समझौते की पुष्टि करें. इस विधेयक के पारित होने से अमरीका भारत के साथ शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग कर पाएगा और संसद की प्राथमिकताओं के अनुसार अमरीकी सुरक्षा और अप्रसार प्रयास भी सुनिश्चित हो पाएँगे
सीनेट में विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच हुए परमाणु समझौते के तहत अमरीका और फिर परमाणु सामग्री आपूर्ति करने वाले कई देश भारत को असैनिक मकसदों के लिए परमाणु ईंधन और तकनीक दे सकेंगे.

दूसरी ओर भारत को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को अपने कुछ परमाणु संयंत्रों के निरीक्षण की इजाज़त देनी होगी.

अमरीकी संसद का निचला सदन यानी प्रतिनिधि सभा भारत के साथ इस परमाणु सहमति को भारी बहुमत से साथ मंज़ूरी दे चुका है. प्रतिनिधि सभा में 359 सांसदों ने इसके पक्ष में मतदान किया था जबकि 68 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया था.

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