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अमरीकी उपराष्ट्रपति को मंज़ूरी की उम्मीद | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी उपराष्ट्रपति डिक चेनी ने उम्मीद जताई है कि आलोचनाओं के बावजूद अमरीका- भारत परमाणु समझौते को अमरीकी संसद की मंज़ूरी मिल जाएगी. वाशिंगटन में अमरीकी और भारतीय कारोबारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह समझौता राष्ट्रपति बुश के दूसरे कार्यकाल का सबसे अहम नीतिगत फ़ैसला है. अमरीकी उपराष्ट्रपति ने कहा,'' यह समझौता रणनीतिक रूप से अहम है और हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि इसमें संशोधन या फिर अन्य कारणों से देरी न हो, अन्यथा एक अहम अवसर हाथ से चला जाएगा.'' बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस समझौते को अमरीकी संसद से पारित करवाने के लिए बुश प्रशासन पूरे प्रयास कर रहा है. लेकिन इस पर अंतिम मतदान जुलाई के मध्य तक होने की उम्मीद है. इसके पहले अगले सप्ताह 27 और 28 जून को अमरीकी सीनेट की विदेश मामलों की समिति की इस पर विचार करेगी. अमरीकी विदेश मंत्री कोंडीलीजा राइस ने व्यक्तिगत रूप से अमरीकी सांसदों को इस समझौते के बारे में जानकारी दी है. अमरीकी विदेश मंत्री सीनेट और प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समितियों के सामने इस समझौते की अहमियत जता चुकी हैं. दूसरी ओर अमरीकी उप विदेश मंत्री निकोलस बर्न्स भी समझौते के लिए सांसदों को आश्वस्त करने में जुटे हैं. ग़ौरतलब है कि बुश प्रशासन और भारत सरकार दोनों स्पष्ट कर चुके हैं कि अगर अमरीकी संसद इस सहमति में कोई फेरबदल करने की कोशिश करती है तो यह सहमति ख़त्म मानी जाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें परमाणु सहमति के पक्ष में मुहिम तेज़14 जून, 2006 | पहला पन्ना भारत से समझौते पर अमरीका में बहस31 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'भारत को परमाणु तकनीक देना उचित'22 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस अमरीका को आश्वस्त करने की कोशिश30 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'समझौते पर अमल में एक साल लगेगा'07 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस श्याम सरन ने रुख़ कड़ा किया01 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस विदेश नीति पर मनमोहन की सफ़ाई14 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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