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अमरीका को आश्वस्त करने की कोशिश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के विदेश सचिव श्याम सरन भारत और अमरीका के बीच हुई परमाणु समझौते पर चर्चा के लिए वाशिंगटन में हैं. माना जा रहा है कि वो अमरीकी सांसदों को इस समझौते के प्रति आश्वस्त करने की कोशिश करेंगे. उल्लेखनीय है कि भारत-अमरीका के बीच हुई परमाणु समझौते को अमरीकी संसद की मंज़ूरी मिलना बाक़ी है. अमरीकी संसद में इस समझौते के पक्ष और विरोध में ज़बरदस्त बहस चल रही है. बुश प्रशासन के अधिकारी इस समझौते को पारित कराने की कोशिश में जुटे हुए हैं. उनकी मदद करने के लिए भारत के उच्च अधिकारी और कुछेक मंत्री भी अमरीका पहुंच रहे हैं. भारत सरकार की कोशिश है कि भारत का पक्ष भी अमरीकी सांसदों के सामने पूरे ज़ोर शोर से रखा जाए. साथ ही अमरीकी व्यापार और उद्योग जगत को इस समझौते से होने वाले फ़ायदों के बारे में बताया जाए. बुधवार को अमरीका के विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स ने अमरीकी संसद की विदेश मामलों की समिति के समक्ष परमाणु समझौते के विभिन्न पहलुओं को रखा. उल्लेखनीय है कि अमरीकी राष्ट्रपति बुश की भारत यात्रा के दौरान भारत और अमरीका के बीच असैनिक परमाणु सहयोग को लेकर सहमति हुई थी. पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अमरीका दौरे के समय इस पर आरंभिक सहमति बनी थी लेकिन इसे लेकर कुछ असहमतियाँ थीं. लेकिन राष्ट्रपति बुश की भारत यात्रा के दौरान सहमति हुई कि अमरीका भारत को असैनिक परमाणु कार्यक्रम में मदद करेगा. इसके बदले में भारत असैनिक परमाणु कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय जाँच के लिए सहमत हो गया था. |
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