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शनिवार, 18 मार्च, 2006 को 02:39 GMT तक के समाचार
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परमाणु सहमति की आलोचना
भारतीय परमाणु संयंत्र
पाकिस्तान ने अमरीका की भारत के साथ परमाणु सहमति पर आपत्ति प्रकट की
बुश प्रशासन के भारत के साथ असैनिक परमाणु सहयोग के लिए अमरीकी कांग्रेस से समर्थन माँगने पर पाकिस्तान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में इसे भेदभावपूर्ण बताया है और कहा है कि इससे दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा.

उसका कहना है कि इससे भारत को बेरोकटोक परमाणु हथियार कार्यक्रम जारी रखने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा.

साथ ही इससे दक्षिण एशिया और विश्व में परमाणु अप्रसार की कोशिशों पर गंभीर असर पड़ेगा.

पाकिस्तान अब तक अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के भारत के साथ असैनिक परमाणु सहयोग समझौते पर प्रतिक्रिया देने से बचता रहा है.

लेकिन बुश प्रशासन के भारत को विशेष छूट देनेवाले इस समझौते को कांग्रेस से पारित करवाने की कोशिशों से उसे आपत्ति प्रकट करने का मौक़ा मिल गया.

पाकिस्तान का कहना है कि भारत कई परमाणु सुविधाओं को निगरानी से बाहर रख रहा है. इससे भारत को अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को जारी रखने में मदद मिलेगी.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का कहना था कि दक्षिण एशिया में परमाणु अप्रसार का लक्ष्य बेहतर तरीके से हासिल किया जाता यदि अमरीकी भारत और पाकिस्तान दोनों से समझौता करता.

उसका कहना है कि दोनों ही देशों ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं इसलिए इससे इस क्षेत्र में परमाणु हथियारों की होड़ समाप्त की जा सकती थी.

भारत-अमरीका की सहमति

हाल में अमरीकी राष्ट्रपति बुश की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच असैनिक परमाणु सहयोग को लेकर सहमति हो गई थी.

 भारत कई परमाणु सुविधाओं को निगरानी से बाहर रख रहा है. इससे भारत को अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को जारी रखने में मदद मिलेगी
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय

राष्ट्रपति बुश इसे अमरीकी संसद के सामने रखा है ताकि अमरीकी क़ानूनों में बदलाव किया जा सके.

इसे न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (परमाणु आपूर्तिकर्ता 45 देशों का समूह) के सामने भी रखा जाएगा ताकि दिशा निर्देशों में परिवर्तन किया जा सके.

पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अमरीका दौरे के समय इस पर आरंभिक सहमति बनी थी लेकिन इसे लेकर कुछ असहमतियाँ थीं.

राष्ट्रपति बुश को भरोसा है कि वे इस समझौते पर अमरीकी संसद को राज़ी कर पाएँगे.

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