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भारत के लिए वीटो अधिकार का समर्थन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारतीय मीडिया में छपे अपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि भारत को वीटो अधिकार के साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए. उन्होंने भारतीय मीडिया में छपी उन ख़बरों से इनकार किया कि उन्होंने कहा था कि उनका देश भारत को वीटो अधिकार के साथ सुरक्षा परिषद की सदस्यता दिए जाने के ख़िलाफ़ है. नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए शुक्रवार को पुतिन ने कहा था, "संयुक्त राष्ट्र में वीटो की भूमिका और दूसरे अधिकारों के बारे में हमें यह स्वीकार नहीं कि उसके साथ कोई छेड़छाड़ की जाए." पुतिन ने कहा था कि अगर ऐसा हुआ तो संयुक्त राष्ट्र अपनी भूमिका खो देगा और पुराने राष्ट्रसंघ के नए संस्करण की तरह सिर्फ़ विचार-विमर्श का एक क्लब बनकर रह जाएगा. अर्थ भारत के ज़्यादातर अख़बारों और टीवी चैनलों ने इस बयान का अर्थ ये निकाला कि रूस भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता मिलने की स्थिति में उसे वीटो अधिकार दिए जाने के पक्ष में नहीं है. लेकिन शनिवार को भारत के उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत और विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी के साथ मुलाक़ात के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने इससे इनकार किया कि उन्होंने ऐसा कुछ कहा था या उनके बयान का ऐसा कुछ मतलब था. पुतिन ने ज़ोर देकर कहा कि सुरक्षा परिषद को प्रभावी बनाए रखने के लिए वीटो के अधिकार को बनाए रखने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि रूस सुरक्षा परिषद के नए स्थायी सदस्य के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन करता है और वे मानते हैं कि भारत को वे सभी अधिकार मिलने चाहिए तो अन्य स्थायी सदस्य देशों को हैं और उनमें वीटो भी शामिल है. |
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