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मंगलवार, 03 अप्रैल, 2007 को 10:42 GMT तक के समाचार
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एकतरफ़ा रियायतों की घोषणा
सार्क
सार्क शिख़र सम्मेलन में आतकंवाद, ऊर्जा, तकनीकी और व्यापार के मुद्दों पर ध्यान रहेगा

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि भारत एकतरफ़ा कदम उठाते हुए सार्क देशों के कुछ वर्गों के लिए वीज़ा प्रणाली को आसान बनाएगा और कम विकसित पड़ोसियों के उत्पाद भारत में बिना सीमा शुल्क आ पाएँगे.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ये घोषणाएँ दिल्ली में मंगलवार सुबह दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन(सार्क) के 14वें शिख़र सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में की हैं.

उनका कहना था कि दक्षिण एशियाई देशों में सदस्य देशों के नागरिकों की आवाजाही आसान होनी चाहिए और अगले पाँच सालों में पर्यटकों की संख्या दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित होना चाहिए.

मनमोहन सिंह ने कहा, "भारत इस मौक़े पर दक्षिण एशियाई देशों के छात्रों, शिक्षकों, पत्रकारों और मरीज़ों के भारत में आने के लिए वीज़ा प्रणाली को सरल बनाने की एकतरफ़ा घोषणा करता है."

उनका ये भी कहना था कि इस साल के अंत तक दक्षिण एशिया के कम विकसित देश बिना किसी सीमा शुल्क के भारत के बाज़ार में अपने उत्पाद ला सकेंगे और भारत इसके बदले उनसे इसी तरह की रियायत की उम्मीद नहीं रखेगा.

ऊर्जा, खाद्य पदार्थों का बैंक

 भारत इस मौक़े पर दक्षिण एशियाई देशों के छात्रों, शिक्षकों, पत्रकारों और मरीज़ों के भारत में आने के लिए वीज़ा प्रणाली को सरल बनाने की एकतरफ़ा घोषणा करता है
मनमोहन सिंह

ऊर्जा का ज़िक्र करते हुए उनका कहना था कि जल्द ही पूरा दक्षिण एशिया ऊर्जा की कमी महसूस करने लगेगा और इस क्षेत्र में सहयोग बढाने और उचित प्रणाली कायम करने की ज़रूरत है.

मनमोहन सिंह ने घोषणा की कि इस शिखर सम्मेलन में खाद्य पदार्थों का क्षेत्रीय बैंक कायम किया जाएगा.

उनका कहना था कि दक्षिण एशिया में ख़ुशहाली और सहयोग के लिए अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए शांति ज़रूरी है.

इससे पहले मंगलवार सुबह पहले सम्मेलन की शुरुआत में ही अफ़ग़ानिस्तान का सार्क संगठन के आठवें सदस्य के रूप में स्वागत किया गया.

इस शिखर सम्मेलन के मद्देनज़र राजधानी दिल्ली में सुरक्षा के ख़ास बंदोबस्त किए गए हैं.

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई और श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के दिल्ली में मौजूद होने के कारण कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं.

विश्व की आर्थिक शक्तियाँ इस दो दिवसीय सम्मेलन को काफ़ी महत्व दे रही हैं. इस सम्मेलन के दौरान अमरीका, यूरोपीय संघ, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया के प्रतिनिधि पर्यवेक्षकों को तौर पर मौजूद रहेंगे.

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