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नेपाली शांति प्रक्रिया को भारत का समर्थन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि भारत नेपाल में दस साल से चल रही माओवादी समस्या के हल के लिए शुरू हुई शांति प्रक्रिया का समर्थन करेगा. भारतीय विदेश मंत्री का ये बयान नेपाली सरकार और माओवादी विद्रोहियों के बीच एक अंतरिम संविधान पर हस्ताक्षर होने के दो दिन बाद आया है. हस्ताक्षर होने के बाद माओवादी भी सरकार का हिस्सा बन सकेंगे. नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला को अगले वर्ष भारत में होने वाले सार्क सम्मेलन में आने का निमंत्रण देने के लिए प्रणव मुखर्जी काठमांडू गए थे. मेजबान देश के विदेश मंत्री व्यक्तिगत रूप से आमंत्रण देने के लिए सदस्य देशों की यात्रा करते हैं. सहयोग भारतीय विदेश मंत्री ने पत्रकारों को बताया कि भारत नेपाल में लोकतंत्र, विकास और शांति स्थापना के लिए प्रतिबद्ध है. नेपाल में चल रही मौजूदा शांति प्रक्रिया की तरफ इशारा करते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि नेपाल का भविष्य बहुत ही बेहतर है. प्रणव मुखर्जी ने कहा कि भारत विद्रोहियों को सरकार में शामिल करने के नेपाल सरकार के क़दम का स्वागत करता है जिससे क्षेत्र के अन्य अतिवादी समूहों को मुख्यधारा की राजनीति में शामिल होने की प्रेरणा मिलेगी. हर दो वर्षों पर आयोजित होने वाले दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) शिखर सम्मेलन की मेजबानी इस बार भारत कर रहा है. यह सम्मेलन अगले साल अप्रैल में भारत की राजधानी दिल्ली में होना है. भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी काठमांडू यात्रा के दौरान नेपाल के विदेश मंत्री केपी ओली सहित सत्तारूढ़ सात पार्टियों के गठबंधन के शीर्ष नेताओं से भी मिले. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में 118 पार्टियाँ चुनाव लड़ेंगी18 सितंबर, 2002 | पहला पन्ना नेपाल में नई सरकार बनेगी05 अक्तूबर, 2002 | पहला पन्ना नेपाल के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा23 नवंबर, 2003 | पहला पन्ना नेपाल में छात्र हड़ताल09 दिसंबरजनवरी, 2002 | पहला पन्ना नेपाली प्रधानमंत्री का इस्तीफ़ा30 मई, 2003 | पहला पन्ना नेपाली प्रधानमंत्री भारत के दौरे पर 06 जून, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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