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नेपाली प्रधानमंत्री भारत के दौरे पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला चार दिवसीय यात्रा पर भारत पहुँच गए हैं. यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच रिश्ते मज़बूत करना और नेपाल के लिए आर्थिक मदद पर बात करना बताया जा रहा है. अप्रैल में सत्ता में लौटने के बाद से गिरिजा प्रसाद कोइराला की ये पहली विदेश यात्रा है. अप्रैल में नेपाल में व्यापक स्तर पर जनआंदोलन हुआ था जिसके बाद नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने सत्ता छोड़ने का फ़ैसला किया था. भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक अगर गिरिजा प्रसाद कोइराला भारत के प्रधानमंत्री से आर्थिक मदद की बात करते हैं, तो भारत इस पर सकारात्मक क़दम उठाना चाहेगा. बीबीसी संवाददाता संजीव श्रीवास्तव के अनुसार नेपाल की मदद करने के पीछे अतीत में दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध होना ही एकमात्र कारण नहीं है. संवाददाता के मुताबिक बदले हुए परिदृश्य के बाद भारत चाहता है कि उसे एक सहयाक पड़ोसी देश के तौर पर देखा जाए. नेपाल में माओवादी और सरकार संविधान सभा के लिए चुनाव करवाने पर सहमत हो चुके हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कोइराला की यात्रा के दौरान भारत बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा कर सकता है- खा़सकर शिक्षा, बिजली और यातायात के संबंध में. भारत नेपाल को आर्थिक और सैन्य सहायता देता रहा है. संवाददाता के मुताबिक नेपाल में माओवादी नेताओं ने गिरिजा प्रसाद कोइराला से ये भी कहा है कि वे भारतीय जेलों में बंद माओवादी कार्यकर्ताओं की रिहाई की माँग करे. लेकिन दोनों देशों के रिश्तों में ये एक संवेदनशील मामला माना जाता है. | इससे जुड़ी ख़बरें पूर्व मंत्रियों को रिहा करने का निर्देश04 जून, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में माओवादियों की बड़ी रैली02 जून, 2006 | भारत और पड़ोस संघर्षविराम की निगरानी पर सहमति26 मई, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल को 'धर्मनिरपेक्ष' बनाने का विरोध25 मई, 2006 | भारत और पड़ोस ऐसा है माओवादी नेता प्रचंड का जीवन24 मई, 2006 | भारत और पड़ोस अपूर्ण है संसद का प्रस्ताव: प्रचंड19 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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