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पूर्व मंत्रियों को रिहा करने का निर्देश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में सुप्रीम कोर्ट ने वहाँ की सरकार को निर्देश दिए हैं कि वो पूर्व शाही सरकार के उन तीन मंत्रियों को रिहा करे जिन्हें हिरासत में ले लिया गया था. मुख्य न्यायाधिश दिलीप कुमार की अध्यक्षता में पाँच जजों की एक पीठ ने तीन पूर्व मंत्रियों- रमेश नाथ पांडे, श्रीस शमशेर राना और निक्षय शमशेर राना की याचिका पर सुनवाई की. अदालत ने रविवार को कहा है कि इन पूर्व मंत्रियों को बिना किसी ठोस वजह के हिरासत में रखा गया है. हिरासत में लिए गए पाँच में से तीन पूर्व मंत्रियों ने नेपाल सरकार के फ़ैसले को अदालत में चुनौती दी थी. जिन दो पूर्व मंत्रियों ने नेपाल सरकार के आदेश को चुनौती नहीं दी है, वे हिरासत में ही हैं. आलोचना नेपाल में सरकार ने पिछले महीने पूर्व शाही सरकार के पाँच मंत्रियों को सार्वजनिक सुरक्षा एक्ट के तहत हिरासत में ले लिया था. इन पाँच पू्र्व मंत्रियों पर अप्रैल में नेपाल में जनआंदोलन को दबाने का आरोप लगाया गया था. नेपाल में अप्रैल में राजशाही के ख़िलाफ़ बड़े स्तर पर आंदोलन हुआ था. पूर्व पाँच मंत्रियों को जिस एक्ट के तहत गिरफ़्तार लिया गया है, उसमें बिना मुकदमे के 90 दिन तक हिरासत में रखा जा सकता है. नेपाल नरेश के शासन के दौरान विरोधियों के ख़िलाफ़ इस एक्ट का अकसर इस्तेमाल किया जाता था. और छोड़े जाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विरोधियों को फिर गिरफ़्तार कर लिया जाता था. नेपाल में कई मानवाधिकार संगठनों ने सार्वजनिक सुरक्षा एक्ट के इस्तेमाल के लिए नेपाल सरकार की निंदा की है. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में माओवादियों की बड़ी रैली02 जून, 2006 | भारत और पड़ोस संघर्षविराम की निगरानी पर सहमति26 मई, 2006 | भारत और पड़ोस ऐसा है माओवादी नेता प्रचंड का जीवन24 मई, 2006 | भारत और पड़ोस राजा के अधिकारों में कटौती का प्रस्ताव18 मई, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में कई पूर्व मंत्री गिरफ़्तार12 मई, 2006 | भारत और पड़ोस शांति वार्ता में मदद को तैयार: संयुक्त राष्ट्र08 मई, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में घटनाचक्र: एक नज़र23 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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