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नेपाल को 'धर्मनिरपेक्ष' बनाने का विरोध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल को 'धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र' घोषित करने के वर्तमान सरकार के निर्णय का वहाँ के कई हिंदू संगठनों ने पुरज़ोर विरोध किया है. ग़ौरतलब है कि नेपाल पिछले चार दशकों से भी ज़्यादा समय से आधिकारिक तौर पर 'हिंदू राष्ट्र' के रूप में जाना जाता रहा है. पिछले दिनों नेपाल में लोकतंत्र की बहाली के बाद वहाँ की संसद ने देश को 'धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र' घोषित किया है. इसके विरोध में दक्षिणी नेपाल के बीरगंज में प्रदर्शन हुए हैं और कुछ हिंदूवादी संगठनों ने आम हड़ताल का आह्वान किया है. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक लगभग छह हज़ार लोगों ने एक प्रदर्शन में हिस्सा लिया. प्रदर्शनकारी नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाये रखने की माँग कर रहे थे. स्थानियों पत्रकारों के मुताबिक देश के इस हिस्से में धार्मिक रैलियां समय-समय पर आयोजित होती रहती हैं. नेपाल की 80 फ़ीसदी आबादी हिंदू है और यहां धार्मिक सद्भाव की परंपरा रही है. इसके बावजूद जाति के आधार पर नेपाली समाज में भेदभाव देखा जाता रहा है. उधर देश के अल्पसंख्यक बौद्ध और इसाई संगठनों ने संसद के फ़ैसले का स्वागत किया है. कुछ लोगों की आपत्ति इस बात को लेकर भी है कि धार्मिक सद्भाव की परंपरा वाले इस देश में इस तरह के परिवर्तन की क्या ज़रुरत थी. | इससे जुड़ी ख़बरें शांति वार्ता में मदद को तैयार: संयुक्त राष्ट्र08 मई, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल नरेश की शक्तियों पर लगेगा अंकुश14 मई, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन16 मई, 2006 | भारत और पड़ोस राजा के अधिकारों में कटौती का प्रस्ताव18 मई, 2006 | भारत और पड़ोस माओवादियों से बातचीत की तैयारी25 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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