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नेपाल नरेश की शक्तियों पर लगेगा अंकुश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल की नवगठित सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री का कहना है कि सरकार जल्दी ही संसद में प्रस्ताव लाकर राजतंत्र की शक्तियों और विशेषाधिकारों को समाप्त करेगी. वित्त मंत्री राम शरण महत ने कहा कि प्रस्ताव के तहत नेपाल में पूर्ण रुप से संसदीय संप्रभुता कायम करने का विचार है. उन्होंने इस प्रस्ताव के बारे में और कोई जानकारी देने से इंकार कर दिया. उनका कहना था कि इस प्रस्ताव के प्रमुख बिंदुओं पर सरकार में शामिल सातों दलों के प्रतिनिधियों से विचार विमर्श चल रहा है इसलिए इस पर अभी इससे अधिक कुछ कहना सही नहीं होगा. नेपाल के अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव में एक बिंदु यह भी है कि राजपरिवार से अपनी संपत्ति पर कर देने को कहा जाए. नेपाल में पिछले महीने व्यापक जनांदोलन के बाद नेपाल नरेश ने चार साल पहले भंग की गई संसद की पुनर्बहाली की थी और सत्ता लोकतांत्रिक दलों को सौपी थी. गिरफ्तारियां नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद संसद ने कई महत्वपूर्ण फ़ैसले लिए हैं. इन्हीं फ़ैसलों के तहत शाही सरकार में मंत्री रहे कुछ लोगों को गिरफ़तार भी किया गया है. इनमें शामिल हैं पूर्व गृह मंत्री कमल थापा, पूर्व विदेश मंत्री रमेश नाथ पाँडे, पूर्व स्थानीय विकास मंत्री तनका ढकाल और पूर्व सूचना मंत्री श्रीश शमसेर राणा. राजा की सरकार के एक कनिष्ठ मंत्री निक्षय शमशेर राणा को भी गिरफ़्तार किया गया है. सरकार ने इन्हें तीन महीने के लिए पुलिस हिरासत में रखने का आदेश दिया है. इन गिरफ़्तारियों से तीन दिन पहले ही मौजूदा सरकार ने राजा के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान लोगों पर कथित ज़्यादतियों की जाँच के लिए एक उच्च स्तरीय जाँच बिठाई जिसने अपना काम शुरू कर दिया है. यह आयोग दो महीने के भीतर सरकार को अपनी रिपोर्ट देगा. |
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