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पाकिस्तान ने व्यापार को कश्मीर से जोड़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान ने भारत के साथ मुक्त व्यापार को 'कश्मीर के मुख्य मुद्दे' से जोड़ते हुए इसके समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की ज़रूरत बताई है. दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के शिखर सम्मेलन को संबोधित करने के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शौकत अजीज़ ने कहा कि मुक्त व्यापार का कश्मीर के मामले पर प्रगति से संबंध है. पाकिस्तान ने दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार समझौता (साफ़्टा) के तहत भारत के साथ मुक्त व्यापार को मंजूरी नहीं दी है और दोनों पक्षों के बीच पिछले साल से ही इस मुद्दे पर बात हो रही है. प्रेस कॉंफ्रेंस में अज़ीज़ ने कश्मीर को 'मुख्य मुद्दा' बताते हुए कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच स्थायी और बेहतर संबंध बनाने के लिए इसका समाधान ज़रूरी है. उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के नज़रिए से कश्मीर मुख्य मुद्दा है." अज़ीज़ ने भारत और पाकिस्तान के बीच जारी शांति प्रक्रिया पर कहा, "हम सभी स्तरों पर बात कर रहे हैं. कुछ सार्वजनिक हैं, कुछ नहीं हैं. हालाँकि हमें प्रक्रिया पर ध्यान के बदले परिणामों पर ध्यान देना चाहिए." पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने संकेत दिया सरक्रीक और सियाचिन के मुद्दे पर भारत के साथ बातचीत में प्रगति हुई है और छह अप्रैल को दोनों देशों के रक्षा सचिवों की बैठक में कुछ महत्वपूर्ण प्रगति होने की संभावना है. अपेक्षित प्रगति नहीं इससे पहले शिख़र सम्मेलन को संबोधित करते हुए शौकत अज़ीज़ ने कहा कि सार्क सदस्य देशों के बीच 'अविश्वास और विवाद' के कारण संगठन ने अपेक्षित प्रगति नहीं की है. बाद में प्रेस कॉंफ्रेंस के दौरान इस विषय पर उनका कहना था, "अविश्वास का स्तर घट रहा है. हमें इसे शून्य पर लाने की ज़रूरत है." अज़ीज़ ने सार्क देशों के बीच अर्थपूर्ण सहयोग बढ़ाने के लिए विश्वास बढ़ाने का सुझाव दिया और इसके लिए राजनीतिक सहयोग को ज़रूरी बताया. उन्होंने कहा कि के सदस्य देशों को बातचीत से आगे कुछ ठोस क़दम उठाना चाहिए है. उन्होंने कहा, "सार्क तभी सफल होगा जब हम सभी परिणामों पर ध्यान केंद्रित करेंगे. दक्षिण एशियाई देशों के लोग यह जानना चाहेंगे कि उन्हें सार्क से कोई फ़ायदा हुआ है या नहीं." अज़ीज़ ने माना कि दक्षिण एशिया में भारी क्षमता है और यह बातचीत सार्क देशों के लिए स्वागत योग्य है. उन्होंने कहा कि क्षेत्र की बड़ी आबादी मानव संसाधन के रुप में बड़ी पूँजी है. उन्होंने सार्क देशों के लोगों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया. प्रतिक्रिया भारत के पूर्व विदेश सचिव शशांक शेखर ने माना कि सार्क देशों के बीच सभी मुद्दों पर सहमति नहीं है लेकिन बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने बीबीसी से कहा, "हमें सकारात्मक पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए. आप देखिए नए देशों में इससे जुड़ने की कितनी ललक है. उन्हें लगता है कि यहाँ कोई बड़ा बदलाव आ गया है." कश्मीर के मामले पर उनका कहना था, "भारत-पाकिस्तान ताल्लुकात बढ़ा रहे हैं. साफ़्टा से जुड़े मसले भी धीरे-धीरे हल हो जाएंगे." | इससे जुड़ी ख़बरें सार्क शिखर सम्मेलन आज से, सुरक्षा कड़ी03 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस भारत ने की एकतरफ़ा रियायतों की घोषणा03 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस प्रत्यर्पण पर भारत-पाकिस्तान में मतभेद02 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस सार्क सम्मेलन में संपर्क बढ़ाने पर ज़ोर01 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस सार्क में आपसी सहयोग पर रहेगा ज़ोर31 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में बढ़ रही लड़ाई से भारत चिंतित28 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाली शांति प्रक्रिया को भारत का समर्थन17 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस व्यापार विवाद टालने पर सहमति02 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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