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मनमोहन रवाना, होंगी अहम मुलाक़ातें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के 15वें शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह श्रीलंका रवाना हो गए हैं. कोलंबो में शनिवार से शुरू हो रहे दो दिनों के इस सम्मेलन से अलग मनमोहन सिंह की सार्क देशों के नेताओं से अहम मुलाक़ातें होनी हैं. संभावना है कि भारतीय प्रधानमंत्री वहाँ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी, नेपाली प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला और श्रीलंका के राष्ट्रपति महेंद्रा राजपक्षे से द्विपक्षीय मसलों पर बात करेंगे. कोलंबो जाने से पहले प्रधानमंत्री ने बयान जारी कर उम्मीद जताई है कि इस सार्क सम्मेलन से सार्थक कामों में तेज़ी आएगी. पिछला सार्क सम्मलेन नई दिल्ली में हुआ था जिसमें 23 साल पुराने इस मंच ने परस्पर सहयोग बढ़ाने के लिए कई तरह के फ़ैसले लिए थे. गिलानी से मुलाक़ात
मनमोहन कोलंबो में तीन दिनों तक रहेंगे. सम्मेलन से इतर जिस बातचीत पर सबकी नज़र होगी वो है पाकिस्तान के प्रधानंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी से उनकी संभावित मुलाक़ात. माना जाता है कि इस मुलाक़ात में मनमोहन सिंह सीमा पार से चरमपंथी गतिविधियों में वृद्धि और नियंत्रण रेखा पर युद्धविराम उल्लंघन के मामले गिलानी के सामने उठाएँगे. सार्क सम्मेलन में चरमपंथ से निबटने के लिए सदस्य देश क्षेत्रीय ढाँचा पर विचार करेंगे. भारत चाहता है कि इस ढाँचे को क़ानूनी स्वरूप दिया जाए. भारत का कहना है कि चरमपंथ से सार्क के सभी देश परेशान हैं और ज़रूरत है कि इसका सामना भी सारे देश मिलकर करें. गिलानी के अलावा मनमोहन सिंह नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला से भी मिलेंगे. हालांकि नेपाल में नई सरकार का गठन हो रहा है और कोइराला कार्यवाहक प्रधानमंत्री हैं. भारतीय प्रधानमंत्री कोलंबो में श्रीलंका के राष्ट्रपति महेंद्रा राजपक्षे से दोनों देशों के बीच संबंधों पर चर्चा करेंगे. 'साझा चुनौती से मुक़ाबला'
कोलंबो रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय ने मनमोहन सिंह का एक बयान जारी किया है. इस बयान में प्रधानमंत्री ने कहा है, "आज सार्क देशों को यह महसूस हो रहा है कि आपसी सहयोग से ही हम एक देश और एक क्षेत्र के रूप में मज़बूत हो सकेंगे और उन साझी चुनौतियों का सामना कर सकेंगे जो हमारे सामने खड़ी हैं." मनमोहन ने कहा कि पिछले साल नई दिल्ली में हुए 14वें सार्क सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के बीच सहमति बनी था कि घोषणाओं के दौर से निकलकर अब अमल की और बढ़ा जाए. सिंह ने कहा कि इसी सोच के साथ सार्क विकास कोष और सार्क खाद्यान कोष के गठन का क़दम उठाया गया है. प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया है कि कोलंबो सम्मेलन से अब तक की उपलब्धियों को मज़बूती मिलेगी और लिए गए फ़ैसलों पर अमल में तेज़ी आएगी. |
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