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गिलानी का पहला दिन कामयाब रहा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रपति बुश की तरफ़ से पाकिस्तान की संप्रभुता की हिमायत, पाकिस्तान के लिए अनाज खरीदने के लिए अगले दो सालों में साढ़े ग्यारह करोड़ डॉलर की मदद, और पाकिस्तान की बेहतरी के लिए कांग्रेस में चल रही कोशिशों पर साथ देने का वादा... देखा जाए तो प्रधानमंत्री युसूफ़ रज़ा गिलानी के अमरीकी दौरे का पहला दिन कामयाब माना जा सकता है. युसूफ़ रज़ा गिलानी प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद पहली बार अमरीका की यात्रा पर पहुँचे हैं और वहाँ उन्होंने राष्ट्रपति बुश और डेमोक्रेट पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बराक़ ओबामा से मुलाक़ात की है. अमरीका और पाकिस्तान के रिश्ते में जिस तरह का तनाव इस समय दिखाई पड़ रहा है उसके चलते गिलानी की इस यात्रा को अहम माना जा रहा है. संप्रभुता की बात राष्ट्रपति बुश ने पाकिस्तान की संप्रभुता की बात उसी दिन की है जिस सुबह वहाँ के क़बायली इलाक़े में एक मिसाइल हमले में एक अलकायदा चरमपंथी समेत छह लोग मारे गए और पहले की तरह ही अमरीका पर उँगली उठी. सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान की तरफ़ से ये मामला उठाया गया था राष्ट्रपति बुश के साथ हुई मुलाक़ात में? प्रधानमंत्री गिलानी ने एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि उन्होंने बुश से इसकी बात की थी कि अमरीका एकतरफ़ा हमले न करे और अगर ये साबित होता है कि सोमवार को हुए हमले में अमरीका का हाथ है तो ये पाकिस्तान की संप्रभुता पर चोट होगी. लेकिन दोनों ही नेताओं की बातचीत के दौरान आतंकवाद सबसे अहम मुद्दा रहा इसमें शायद ही किसी को शक हो. राष्ट्रपति बुश ने जहाँ पाकिस्तान के साथ मिलकर आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई को जारी रखने की बात की, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भी उन्हें यक़ीन दिलाया, "पाकिस्तान इस मसले के बारे में पूरी तरह से गंभीर है और ये पाकिस्तान की अपनी जंग है." उनका कहना था कि पाकिस्तान की जनता और क़बायली इलाकों के लोग शांतिप्रिय हैं लेकिन कुछ मुठ्ठी भर लोग हैं जो माहौल खराब कर रहे हैं. बयान कुछ और दोनों ही देशों की तरफ़ से जारी एक साझा बयान में पाकिस्तान से अमरीका के लिए सीधी उड़ान की बात है, व्यापार बढ़ाने की बात है, आतंकवाद के के ख़िलाफ़ पाकिस्तान को और हथियार और प्रशिक्षण देने की बात है लेकिन इस बयान में क़बायली इलाक़ों में चल रही समझौते की कोशिशों या अमरीका की तरफ़ से होनेवाले हमलों पर कोई बात नहीं की गई है. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता डाना पेरिनो ने बेहद नपे तुले शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ये ज़रूर कहा कि राष्ट्रपति बुश की सोच है कि दोनों ही देशों को यानी अमरीका और पाकिस्तान को इस लड़ाई में साथ मिलकर और कोशिश करने की ज़रूरत है. गिलानी के दौरे से पहले यहाँ की मीडिया और थिंक टैंक इशारा कर रहे थे कि उन्हें बेहद कड़े शब्द सुनने पड़ सकते हैं. राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बराक ओबामा ने भी वहाँ के आतंकवादी शिविरों पर हमले करने की बात की थी. लेकिन कैमरों के सामने राष्ट्रपति बुश ने जो तस्वीर पेश की उसमें तारीफ़ें थीं, साथ मिलकर काम करने की बात थी, पाकिस्तानी लोकतंत्र पर भरोसे की बात थी, संप्रभुता की बात थी. फिर भी, दोनों देशों के उपर नीचे होते ताल्लुकात को सालों से देख रहे विश्लेषकों का मानना है कि इन तस्वीरों के रंगों पर अभी के माहौल में यक़ीन करना शायद जल्दबाज़ी होगी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'पाकिस्तान हमारा सहयोगी है'28 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'तालेबान के ख़िलाफ़ क़दम उठाए पाक'25 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस बेहतर होंगे पाकिस्तान के लड़ाकू विमान24 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में सैनिकों पर बढ़ते हमले01 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस इस वर्ष तालेबान के हमलों में तेज़ी संभव28 जून, 2008 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ते हमलों पर चिंता27 जून, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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