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शनिवार, 01 मार्च, 2008 को 23:03 GMT तक के समाचार
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ग़ुलाम नबी आज़ाद के साथ एक मुलाक़ात

ग़ुलाम नबी आज़ाद
कई मर्तबा केंद्रीय मंत्री रहे ग़ुलाम नबी आज़ाद इस समय जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री हैं
बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाक़ात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत कराते हैं.

एक मुलाक़ात में हम इस हफ़्ते आपको मिलवाने जा रहे हैं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद से और जानेंगे उनके जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में.

इंटरव्यू के पहले मैं आपका बायोडाटा देख रहा था, इसमें बड़ी दिलचस्प बात ये देखने को मिली कि आपने ज़ुलॉजी (जीवशास्त्र) में मास्टर्स की है. ज़ुलॉजी में मास्टर्स के बाद सियासत की पीएचडी?

कुछ ज़्यादा फ़र्क नहीं है. मैं समझता हूँ कि पॉलिटिकल डिसेक्शन करो या मरे हुए जानवरों या कीड़ों का डिसेक्शन. डिसेक्शन तो डिसेक्शन है.

वाकई बहुत अच्छी तुलना है. इस मुलाक़ात का सफ़र आगे बढ़ाएँ आप हमारे श्रोताओं को अपनी पसंद का एक गाना बताएँ?

गाने वालों में मुझे मुकेश सबसे ज़्यादा पसंद हैं और शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि मुझे गाने सुनने का बहुत शौक है. ये दूसरी बात है कि फ़ुरसत कभी-कभार ही मिलती है.
मैं घूमता बहुत हूँ. शायद हिंदुस्तान में किसी भी राजनीतिक पार्टी के व्यक्ति ने मेरे दसवें हिस्से के बराबर भी सफ़र नहीं किया होगा. मैं गाड़ी में अपनी पसंद के गाने रखता हूँ. फ़िल्म कभी-कभी का गाना ‘कभी-कभी मेरे दिल में ख़्याल आता है..’ मुझे बहुत पसंद है.

थोड़ा आपके बचपन की तरफ़ लौटते हैं. आपकी पैदाइश डोडा की है. बचपन की कुछ ख़ास यादें?

हमारा घर व्यापार, कृषि, राजनीति और शिक्षा का संगम रहा है. मेरे दादाजी अच्छे शिकारी थे और बहुत अच्छे पहलवान भी. वो छह फ़ुट चार इंच लंबे थे और अच्छे किसान भी थे. मेरे पिता बिज़नेसमैन थे और जम्मू-कश्मीर के प्रमुख ठेकेदारों में से थे.मैं समझता हूँ कि बचपन में मैने जितना पैसा देखा है, उतना कांग्रेस पार्टी के जनरल सेक्रेटरी के रूप में मैने बाँटा ज़रूर होगा लेकिन मेरे पास नहीं रहा.

 अमिताभ बच्चन ऐसे कलाकार हैं कि जिन्होंने हर रूप में और हर उम्र में नाम कमाया है. इसमें कोई शक नहीं है
ग़ुलाम नबी आज़ाद

आपको सुनकर हैरानी होगी कि शायद मैं हिंदुस्तान का पहला आदमी होऊंगा जिसने तीन साल की उम्र में वोट डाला है. फ़र्जी नहीं, दरअसल मेरे पिता क़रीब 20-25 साल तक नेशनल कॉन्फ़्रेंस के तहसील अध्यक्ष भी रहे. एक बार जब मैं उनके साथ वोट डालने के लिए गया मैंने बक्से में वोट डालने की ज़िद की. जब उन्होंने नहीं दिया तो मैं रोने लगा. फिर वहाँ मौजूद एजेंटों ने कहा इनको ही डालने दीजिए.

तो मतलब तब से कहीं न कहीं मन था कि जाना सियासत में है

हां

बीबीसी एक मुलाक़ात का सफ़र आगे बढाएं ग़ुलाम नबी आज़ाद साहब अपनी पसंद का एक और गाना बताइए हमें?

‘मैं ज़िदगी का साथ निभाता चला गया..हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया..’

आपका सबसे पसंदीदा खेल कौन सा है. क्रिकेट या टेनिस?

बदकिस्मती से क्रिकेट से मैं कभी भी प्रभावित नहीं हुआ. एक नफ़रत तो ये है कि जब मैं छठी क्लास में था तो बैटिंग कर रहा था और बॉल सीधे मेरी नाक में आ लगी. फिर नाक से इतना ख़ून बहा कि 18 दिन के बाद बिस्तर से उठा. बचपन में खेलते हुए जब कभी धक्का लगता था तब भी खून निकलता था और कभी-कभी आज भी मुझे तकलीफ़ होती है.

और दूसरी नफ़रत ये है जब दुनियाभर काम कर रही होती है तो यहाँ लोग छुट्टी कर लेते हैं. क्रिकेट ने पूरी दुनिया को पागल बना दिया है. हज़ारों करोड़ो रुपयों का काम इसकी वजह से रुक जाता है.

आज़ाद साहब कोई और गाना ध्यान आ रहा है अपनी पसंद का या कोई फ़िल्म जो आपको बहुत अच्छी लगी हो?

मुझे ‘उपकार’ बहुत अच्छी लगी. आज के वक़्त में तो ‘उपकार’ लड़कों को बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगेगी क्योंकि आज-कल वही फ़िल्म अच्छी लगती है जिसमें हीरोइन के कपड़े कम से कम हों और हीरो जैसे भांग पीकर नाच रहा हो.

ऐसा कोई हीरो आपको ध्यान में आ रहा है जिसे देख कर आपको लगा हो कि ये भांग पी कर नाच रहा है?

ग़ुलाम नबी आज़ाद
ग़ुलाम नबी आज़ाद को नेहरू गांधी परिवार का काफ़ी क़रीबी माना जाता है

मेले ख़्याल से जो पहले सीरियस थे वो भी आज उसी तरह के हो गए हैं. मैं नाम नहीं लेना चाहूँगा लेकिन 60 साल की उम्र के हीरो भी जो अपने समय में कभी बहुत सीरियस माने गए हैं और बहुत मक़बूल कलाकार हैं वो भी ऐसे ही नाच रहे हैं.

कहीं आप अमिताभ बच्चन की बात तो नहीं कर रहे हैं?

मैं किसी का नाम नहीं ले रहा हूँ लेकिन लगता है ये एक फ़ैशन बन गया है और हर कोई उसी रंग में रंगा जा रहा है.

चूँकि बात चल रही है तो अमिताभ बच्चन ने तो बाक़ायदा अपनी एक फ़िल्म में ‘रंग बरसे’ जो भांग पिया हुआ सा गाना किया है अपने पिता का लिखा हुआ फ़िल्म सिलसिला में?

मैं समझता हूँ कि अमिताभ बच्चन ऐसे कलाकार हैं कि जिन्होंने हर रूप में और हर उम्र में नाम कमाया है. इसमें कोई शक नहीं है.

और उनके बच्चों के बारे में आपकी क्या राय है. अभिषेक बच्चन और उनकी बहू द वन एंड ओनली ऐश्वर्या राय?

मेरे ख्याल में मैं अमिताभ बच्चन तक ही कहना चाहूँगा बाकी तीसरे सुल्तान तो बहुत हैं. यानी बादशाह बनने के लिए बहुत कुछ काम करना पड़ता हैं. मतलब मेरा बाप बादशाह था तो उसी की रोटी खाना. सुल्तान तो अमिताभ बच्चन ही हैं.

बात तो आपकी सही है लेकिन एक स्तर पर ये बात हर क्षेत्र में लागू होती है. कोई बहुत ऊंचे क़द का व्यक्ति होगा तो क्या आपको लगता है कि ये उसका एक नुकसान होता है?

ऐसा राजनीति में भी है ख़ास कर आज की राजनीति में भी बदकिस्मती से है. लेकिन जो सुल्तान का काम होता है वो तीसरे सुल्तान का नहीं होता. तो सुल्तान का बेटा होना उसमें कोई मज़ा नहीं है सुल्तान ख़ुद होना चाहिए और सुल्तान होने के लिए ख़ुद मेहनत करनी होती है.

हाल के सालों में आप कोई पिक्चर देख पाए हैं. अपनी इतनी व्यस्त दिनचर्या में सिनेमा हॉल जाते हैं?

सिनेमा हॉल तीन साल पहले अपने परिवार के साथ गया था. कई दोस्तों ने वो कार्यक्रम रखा था पर फ़िल्म का नाम मुझे याद नहीं है. मुझे याद है जब मैं साइंस कॉलेज जम्मू में था तो वहाँ हमारे प्रैक्टिकल्स होते थे. वो प्रैक्टिकल चार घंटे का होता था उसमें से हम स्टूडेंट्स दो-दो घंटे निकाल कर फ़िल्म देखने के लिए जाते थे.

और कोई हाल में कोई पिक्चर देखी?

‘ लगे रहो मुन्ना भाई’ बहुत अच्छी लगी. मैं खुद गांधीजी से बहुत प्रभावित हूँ.

अच्छा. फ़िल्मों, गानों की बात कर रहे हैं. सबसे खूबसूरत गाने वाली आपकी ज़िंदगी में हैं वो तो आपकी बेगम शमीम. उन्हें जम्मू-कश्मीर की लता मंगेशकर कहा जाता है, उनसे आपकी मुलाक़ात कैसे हुई. आप उनकी आवाज़ पर मर मिटे कि बस आपने प्रपोज़ कर दिया?

 ‘दो कलियां’ में थीं माला सिन्हा वो बहुत अच्छी हैं. मुझे याद है जब मैं जम्मू साइंस कॉलेज में पढ़ता था और जिबल चौक में हमने दोपहर का मैटिनी शो देखा था. मीना कुमारी भी अपने आप में लाजवाब थीं
ग़ुलाम नबी आज़ाद

नहीं मेरे ताया और शमीम के पिता दोनो शिक्षा क्षेत्र से जुड़े थे. हमारा उनके यहाँ आना जाना दूसरे-तीसरे दिन होता था. तो हमारे अच्छे पारिवारिक संबंध थे और एक दूसरे को अच्छे से जानते थे.

तो स्कूल के ज़माने से ही पसंद थी वो आपको?

पसंद नहीं. मतलब उस वक़्त जब वो स्कूल में थी तब इन सब के लिए वो उम्र बहुत छोटी होती है. लेकिन मेरे ख़्याल से जब मैं विश्वविद्यालय में था और वो कॉलेज में थीं तब हमारी नज़दीकियां बढ़ीं और बाद में मामला शादी में बदल गया.

अच्छा ये बताइए कि आपके पसंदीदा ऐक्टर कौन हैं?

अमिताभ बच्चन. वो एक महान कलाकार हैं. उन्हें नकारा नहीं जा सकता.

चलिए अमिताभ के अलावा एक और पसंदीदा स्टार बताएं?

और नए में से कोई जमा नहीं.

शाहरूख़, सलमान, अक्षय, ऋतिक. ऋतिक तो आपके बहुत अच्छे दोस्त के दामाद हैं?

मेरे दोस्त के दामाद हैं. बल्कि उसकी जो बीवी है उसे मैं हमेशा कहता था कि ये मेरी मांगी हुई बेटी है.

ऋतिक रोशन बहुत ज़बरदस्त डांसर हैं ग़ुलाम नबी आज़ाद साहब. आपने उनका डांस देखा है कभी?

डांस में तो बहुत अच्छा है वो. उनकी पहली फ़िल्म ही बहुत क़ामयाब रही.

आपने देखी थी ‘कहो न प्यार है’?

हां. बल्कि उससे ज़्यादा जो दूसरी फ़िल्म मुझे अच्छी लगी वो थी मिशन कश्मीर…वो बहुत अच्छी लगी. और उसमें सभी का जो रोल है वो बहुत अच्छा रहा.

और आपकी पसंदीदा अदाकारा?

‘दो कलियां’ में थीं माला सिन्हा वो बहुत अच्छी हैं. मुझे याद है जब मैं जम्मू साइंस कॉलेज में पढ़ता था और जिबल चौक में हमने दोपहर का मैटिनी शो देखा था. मीना कुमारी भी अपने आप में लाजवाब थीं.

नए ज़माने की कोई हीरोइन ध्यान नहीं आ रहीं हैं जो आपको पसंद हैं?

नई फ़िल्में ज़्यादा नहीं देखीं. नए में माधुरी दीक्षित का अभिनय अच्छा लगता है. ऐक्टिंग का मतलब होता है कि तीन घंटे जब आप फ़िल्म देख रहे हैं एक सेकेंड के लिए भी नहीं लगना चाहिए कि आप फ़िल्म देख रहे हैं.

जब हम कॉलेज में देखते थे तो दारा सिंह की फ़िल्में देखते थे. और जब कॉलेज से निकलते थे तो उस वक़्त जो सामने आता था उसे मुक्का ज़रूर लगाते थे. हमें लगता था कि हम दारा सिंह हो गए हैं.

अच्छा आपकी पसंदीदा महिला राजनीतिक हस्ती कौन हैं?

ये कहने मे मुझे एक सेकेंड भी नहीं लगेगा. इंदिरा गांधी ही पहली और आख़िरी पसंद हैं. मुझे लगता है वो एक नेता थी, एक मां थीं और एक दोस्त थीं. वह बहुत ख़्याल रखतीं थीं.
जब मैं कांग्रेस महासचिव था तो मैं उनके साथ राज्यस्तरीय सम्मेलन में हिस्सा लेने सीतापुर चला गया. उनके लिए कमलापति त्रिपाठी वगैरह ने खाना रखा था ऊपर कमरे में और मैं प्रतिनिधियों के साथ मैदान में खाना खा रहा था. तो इतने में राजेंद्र कुमारी बाजपेयी ढ़ूढ़ते-ढ़ूढ़ते वहाँ आईं और कहा कि मिसेज़ गांधी बुला रही हैं. मैने पूछा कि क्यों बुला रही हैं तो उन्होंने बताया कि क्योंकि मुझे चावल पसंद हैं इसलिए मुझे बुलाया है.

 मैं कई और प्रधानमंत्रियों के साथ भी केंद्रीय मंत्रियों के रूप में रहा, लेकिन कई तो ये परवाह भी नहीं करते कि हम खा भी रहे हैं कि नहीं
ग़ुलाम नबी आज़ाद

मैं कई और प्रधानमंत्रियों के साथ भी केंद्रीय मंत्रियों के रूप में रहा, लेकिन कई तो ये परवाह भी नहीं करते कि हम खा भी रहे हैं कि नहीं. एक प्रधानमंत्री का ज़िक्र मैं करूंगा नाम नहीं लूँगा. मैं और वो एक साथ हैलीकॉप्टर से चुनाव प्रचार के लिए गए और फिर अलग-अलग गाड़ियों में प्रचार किया. मुझे और दो दिन रूकना था. एयरपोर्ट पर जब मैं उन्हें छोड़ने गया तो वो मुझसे पूछने लगे कि मैं वहाँ कितने दिनों से हूँ. यानी उन्हें ये भी मालूम नहीं था कि हम सुबह एक साथ ही दिल्ली से आए हैं.

सारी दुनिया कश्मीर आती है. आप कश्मीर के मुख्यमंत्री हैं. आप भी मानते हैं कि कश्मीर दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत जगह है या थोड़ी ओवररेटेड है?

मैं कहूँगा कि इत्तेफ़ाक से मुझे दुनिया के कई हिस्सों में जाने का मौक़ा मिला है. पर्यटन मंत्री की हैसियत से मुझे दुनिया के सबसे सुंदर पर्यटन स्थल देखने को मिले हैं. मैं कहूँगा कि कश्मीर दुनिया की ख़ूबसूरत जगह में से एक है.

चूंकि आप हमेशा खुद इतने वेल ड्रेस्ड रहते हैं तो आपकी नजरों में सबसे वेल ड्रेस्ड राजनेता कौन है?

अलग-अलग होता है. किसी को बंद गला पसंद आएगा. जैसे शिवराज पाटिल बंद गला पसंद करते हैं, कोई सफ़ारी. हर किसी की अपनी पसंद है. अलग-अलग आदमियों पर अलग-अलग कपड़े अच्छे लगते हैं. मेरे ख़्याल से शिवराज पाटिल ज़्यादतर ट्रिम रहते हैं और मेरी तरह शायद बहुत लोगों को ग़लतफ़हमी है नए सूट पहनते हैं. शायद हम दोनों ही हैं जो अभी भी 20 साल पुराने सूट पहनते हैं.

आपकी और शिवराज पाटिल की एक दूसरी कॉमन बात ये है कि दोनों के जूते भी हमेशा चमकते रहते हैं?

वो इसलिए हैं कि मैं आज तक भी जूते ख़ुद ही पॉलिश करता हूं. मेरी आम रोज़मर्रा की ज़िदगी में गांधी जी का प्रभाव पड़ा है. और उसका सबसे बड़ा कारण है कि 1969 में जब गांधीजी की जन्मशताब्दी मनाई जा रही थी तो तमाम कॉलेजों के कुछ बच्चों का चुनाव किया गया और मैं और मेरा दोस्त बशारत अहमद चुने गए. हमने 15 दिन गांधी पर लेक्चर सुनें पढ़े और गांधी की सच्चाई, अहिंसा और सेक्युलरिज़्म की वो छाप आज तक मेरे ज़ेहन में है.

आपकी ज़िदगी का सबसे भावुक क्षण कौन सा रहा?

मैं फिर कहूंगा..इंदिरा गांधी, संजय गांधी और राजीव गांधी की मौत. और सबसे ज़्यादा सदमा इंदिरा गांधी की मौत से लगा. उनकी मौत से पहले हमारा डिस्कशन कश्मीर पर और इत्तेफ़ाक की बात है कि चिनारों के बारे में हुआ.

मैं उस वक़्त सूचना प्रसारण राज्य मंत्री था. सुबह के चार बजे आरके धवन ने मुझे फोन किया कि इंदिराजी बुला रही हैं. तो मैं सीधे उनके पास पहुंच गया.

इतने में इंदिरा जी अंदर से आ गईं सवा चार बजे और सिर्फ़ नाइट गाउन में. मैने पहली बार उन्हें नाइट गाउन में देखा था. उन्होंने कहा कि तुम्हें मालूम है इलेक्शन में जाना है फिर शायद फ़ुर्सत न मिले. मैं सोचती हूं कि दो-तीन दिन छुट्टियों के लिए जाऊं. उन्होंने कहा कि चिनार के पत्ते उन्हें बचपन से ही अच्छे लगते हैं. उनका रंग बदलना उन्हें माता-पिता के ज़माने से ही अच्छा लगता है. उन्होंने दो-तीन दिन वहाँ गुज़ारे.

मुझे याद है 31 अक्तूबर के दिन मैं बंबई हवाई अड्डे पर विमान की सीढ़ियों से उतर रहा था तो ग्राउंड स्टाफ़ की एयर होस्टेस ने मुझे बताया कि मि. आज़ाद बहुत बुरी ख़बर है..वायरलेस पर मैसेज आया है इंदिरा जी के गोली मार दी गई है और वो अस्पताल में हैं. वहां से मैं सीधे अस्पताल गया तब तक वो मर चुकीं थी. उस वक़्त मैं जितना चिल्लाया हूँ..न कभी चिल्लाया था और न कभी चिल्ला पाऊंगा.

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