ये तस्वीर क्या बताती है?

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- Author, केली ग्रोविएर
- पदनाम, बीबीसी कल्चर
कुछ तस्वीरें होती हैं जो यादगार बन जाती हैं. कुछ ऐसी भी होती हैं जो इंक़लाब की मिसाल बनती हैं. वहीं कुछ तस्वीरों से किसी राजनैतिक-सामाजिक हालात बयां होते हैं.
अभी हाल ही में ब्रिटेन में लंबी राजनैतिक उठा-पटक के बाद टेरीज़ा मे ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बनीं. वहां की परंपरा के मुताबिक़ महारानी एलिज़ाबेथ ने टेरीज़ा को सरकार बनाने के लिए बुलाया. टेरीज़ा और महारानी एलिज़ाबेथ की मुलाक़ात की एक तस्वीर राजमहल ने जारी की.
इस तस्वीर में टेरीज़ा मे, महारानी के सम्मान में घुटने टेकती दिखाई देती हैं. कुछ लोगों ने इस तस्वीर को देखते हुए गुज़रे दौर की शाही चमक-दमक की याद दिलाने वाला करार दिया. लेकिन, कुछ लोगों ने ये भी कहा कि ये तस्वीर ब्रिटेन की राजनैतिक-सामाजिक संस्कृति की मिसाल है.
इस तस्वीर से पहली बात तो ये ज़ाहिर होती है कि ब्रिटेन में लोकतंत्र आज भी राजशाही के सामने घुटने टेकता है. भले ही ये केवल नाम के लिए क्यों न हो. फिर ये तस्वीर ये बिल्कुल भी नहीं ज़ाहिर करती कि महारानी और टेरीज़ा मे के बीच क्या बात हुई. इस मसले पर ये तस्वीर बुत जैसी ख़ामोशी अख़्तियार किए हुए है.
ब्रिटेन की दो ताक़तवर महिलाओं की मुलाक़ात की इस तस्वीर में टेरीज़ा, महारानी के प्रति आदर दिखा रही हैं, वहीं महारानी अपनी फ़राख़दिली.
इस तस्वीर से ब्रिटेन में सोलहवीं सदी में बनी एक कलाकृति की याद आ गई. ये कलाकृति असल में दो बुतों की है, जो संगमरमर के बने हैं. ये बुत ब्रिटेन में हार्टफोर्डशायर में बने बैक्टन चर्च में लगे हैं.

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इसमें उस वक़्त की ब्रिटिश महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम के आगे उनकी बांदी ब्लांश पैरी, सिर झुकाए दिखती है. एलिज़ाबेथ के पैदा होते ही ब्लांश पैरी को उनकी ज़िम्मेदारी दे दी गई थी. ब्लांश ने ही एलिज़ाबेथ प्रथम को पाला पोसा.
जब एलिज़ाबेथ महारानी बनीं तो ब्लांश उनकी सबसे क़रीबी सलाहकार हो गई. जहां पहले ब्लांश को सिर्फ़ एलिज़ाबेथ की मदद के लिए लगाया गया था. वहीं एलिज़ाबेथ के महारानी बनते ही वो ब्रिटेन की दूसरी सबसे ताक़तवर महिला बन गई. ब्लांश को शाही गहनों, कपड़ों और क़िताबों से लेकर और भी बड़ी-बड़ी ज़िम्मेदारियां सौंप दी गईं. ब्लांश के पास शाही परिवार की ज़मीनों की देखभाल का भी ज़िम्मा आ गया. वो ब्रिटिश राजदरबार के काम में भी दखलंदाज़ी करती थी.
आख़िर ब्लांश पैरी को सत्ता में इतना दखल कैसे मिल गया? वजह साफ़ थी. इसमें उसकी क़ाबिलियत से ज़्यादा वफ़ादारी का इनाम था. और वफ़ादारी आप घुटनों के बल झुककर ही दिखाते हैं.
जो ब्लांश पैरी और एलिज़ाबेथ प्रथम की मूर्ति में दिखता है. कमोबेश वैसा ही टेरीज़ा मे का महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय के आगे झुकना दिखाता है. हालांकि अब ब्रिटेन में शाही परिवार का राज केवल नाम का रह गया है. जहां टेरीज़ा मे को केवल परंपरा निभाने के लिए महारानी के आगे झुकना पड़ा. वहीं सोलहवीं सदी में ब्लांश पैरी ने महारानी के क़दमों में गिरकर बहुत ऊंचे दर्जे का मुकाम हासिल कर लिया था.
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