कहानी समलैंगिकों का रंगीन झंडा तैयार होने की

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अमरीका के ऑरलैंडो शहर में 12 जून को नाइट क्लब में हुए क़त्लेआम ने पूरी दुनिया का ध्यान एक बार फिर समलैंगिकों की तरफ़ खींचा है. सदियों से अपनी सैक्सुएलिटी के लिए समलैंगिक, ज़ुल्म के शिकार होते रहे हैं. ऑरलैंडो में हुई गोलीबारी के बाद पूरी दुनिया में लोगों ने समलैंगिकों के समर्थन में उनका इंद्रधनुषी झंडा लहराया.

लोगों के कपड़ों से लेकर, घरों की बालकनी और सड़कों से लेकर पार्क और रेस्तराओं तक ये इंद्रधनुषी झंडा लहराता दिखा. चलिए आपको समलैंगिकता का खुला एलान करने वाले इस झंडे का इतिहास बताते हैं.

इस झंडे को अमरीकी समलैंगिक गिलबर्ट बेकर ने सत्तर के दशक में डिज़ाइन किया था. ये वो दौर था, जब अमरीका में भारी उथल-पुथल मची थी. 1973 में अमरीका को वियतनाम से अपनी सेनाएं वापस बुलानी पड़ी थीं. अगले ही साल यानी 1974 में अमरीका के इतिहास में पहली बार एक राष्ट्रपति को इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

इन झटकों से जनता को उबारने के लिए उस वक़्त अमरीका में जगह जगह देश का झंडा लहराया गया था. ताकि लोग उसे देखें और उससे गर्व महसूस करें. उन्हें एकजुटता का एहसास हो.

उसी दौर में मशहूर अमरीकी समलैंगिक हार्वे मिल्क ने गिल्बर्ट बेकर को समलैंगिकों का एक प्रतीक चिन्ह तैयार करने को कहा था. बेकर को ये झंडा तैयार करने की प्रेरणा, अमरीकी झंडे की पट्टियों से मिली.

गिल्बर्ट बेकर ने जब इस बारे में सोचा, तो उन्हें समलैंगिकों पर सदियों से ढाए जा रहे ज़ुल्म याद आए. उन्हें याद आया कि हिटलर के राज में समलैंगिकों के कपड़ों पर गुलाबी तिकोनी पट्टियां टांक दी जाती थीं. जो उनके बाक़ी लोगों से अलहदा होने का एलान करती थीं. हिटलर के राज का ख़ात्मा होने पर समलैंगिकों ने पहले अपने कपड़ों पर टंकी ये पट्टियां उखाड़कर फेंक दी थीं. फिर उन्हें गुरूर से दोबारा टांक लिया था. वो उनका ज़ुल्म से आज़ादी का एलान था.

कुछ लोग मानते हैं कि गिल्बर्ट बेकर को इंद्रधनुषी झंडा बनाने की प्रेरणा हॉलीवुड की हीरोइन जूडी गारलैंड से मिली थी. जूडी समलैंगिक थीं. उन्होंने फिल्मों में इस तरह के कुछ रोल भी किए थे. जूडी का 'ओवर द रेनबो' नाम का गाना भी बहुत मशहूर हुआ था. कुछ लोग ये भी कहते हैं कि गिल्बर्ट को ऑस्कर वाइल्ड से प्रेरणा मिली थी. जो चटख रंगों से अपने समलैंगिक होने का एलान किया करते थे.

हालांकि ख़ुद गिल्बर्ट ने इन अंदाज़ों को ग़लत ठहरा दिया था. उन्होंने कहा था कि समलैंगिकों के लिए इंद्रधनुषी झंडा बनाने की प्रेरणा उन्हें क़ुदरत से मिली. आख़िर प्रकृति ख़ुद ये झंडा आसमान में फहराती है.

वैसे इतिहास में भी इसकी मिसालें मिलती हैं. जर्मनी में सुधारवादी थॉमस मुंतज़र ने इंद्रधनुष को अपनी बातों का प्रतीक बनाया था. सोलहवीं सदी में जर्मनी के किसानों ने इस झंडे को बदलाव की मांग उठाने के लिए इस्तेमाल किया था.

अठारहवीं सदी में अंग्रेज़-अमरीकी क्रांतिकारी लेखक थॉमस पेन ने इंद्रधनुष को झंडे के तौर पर इस्तेमाल करने की मांग की थी. उन्नीसवीं सदी में श्रीलंका के बौद्धों ने इसे अपनी एकता की नुमाइश के लिए इस्तेमाल किया था. इसी तरह भारत में मेहर बाबा की मौत की बरसी पर हर साल 31 जनवरी को उनके अनुयायी इंद्रधनुषी झंडा फहराते हैं. वो ऐसा 1961 से करते आ रहे हैं.

वैसे गिल्बर्ट का तैयार किये पहले झंडे में आठ रंगों की पट्टियां थीं. आज के झंडे में छह रंगों की पट्टियां ही हैं. गिल्बर्ट के झंडे में सबसे ऊपर गुलाबी पट्टी थी. जो समलैंगिकों की सेक्सुएलिटी का एलान करती थी. इसके बाद लाल रंग आता था जो ज़िंदगी का प्रतीक माना जाता है. फिर नारंगी रंग था जो ज़ख़्मों पर मरहम लगाने की बात कहता था.

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पीली पट्टी सूरज की रौशनी का प्रतीक थी, तो हरा रंग क़ुदरत के लिए, फ़िरोज़ी जादू के लिए और नीला शांति के लिए, वहीं बैंगनी रंग जोश की नुमाइश के लिए इस्तेमाल किया गया था.

पहले पहल ये झंडा अमरीका के सैन फ्रैंसिस्को शहर में संयुक्त राष्ट्र प्लाज़ा में फहराया था. तीस स्वयंसेवकों ने अलग अलग रंग की पट्टियों को धोकर, उन्हें सुखाकर एक साथ सिला था. इस तरह समलैंगिकता का एलान करने वाला ये झंडा पहली बार तैयार हुआ था.

उसके कुछ घंटों बाद ही मशहूर अमरीकी गे हार्वे मिल्क और सैन फ्रैंसिस्को के मेयर जॉर्ज मॉसकोन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

इसके बाद से इंद्रधनुषी झंडे की मांग और बढ़ गई. झंडे की चौड़ाई ज़्यादा होने की वजह से इसमें से गुलाबी और फ़ीरोज़ी रंग की पट्टियां हटा दी गई थीं. 1994 में न्यूयॉर्क में एक मील लंबा इंद्रधनुषी झंडा लेकर लोगों ने परेड निकाली थी. ये दुनिया का सबसे लंबा झंडा था.

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आज की तारीख़ में दुनिया भर में ये इंद्रधनुषी परचम, समलैंगिकता का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है. लोग इसे खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं.

यूक्रेन की पहले गे प्राइड परेड में 12 जून को ये झंडा लहराया गया. इसी तरह 24 से 26 जून के बीच ये ब्रिटिश संसद भवन पर दिखा. 2015 में फ़ेसबुक ने रेनबो फिल्टर की शुरुआत की थी. रूस और मध्य पूर्व के देशों में समलैंगिकता का तगड़ा विरोध हो रहा है. ऐसे में इस विरोध का सामना करने के लिए भी इस इंद्रधनुष का इस्तेमाल हो रहा है.

ये झंडा बनाने वाले गिल्बर्ट बेकर ने कहा था, 'झंडे लोगों की आत्मा को चीरकर बनाए जाते हैं.'

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