पाकिस्तानी बीवी और पति हिन्दुस्तानी, वर्ल्ड कप में कैसे जूझ रहा यह परिवार

- Author, मोहम्मद सुहैब
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
लखनऊ से ताल्लुक रखने वाले अली इक़बाल ने आज तक जो भी मैच ग्राउंड में जाकर देखा है, उसमें जीत भारत की ही हुई है.
रविवार को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मुक़ाबले के दौरान भी उनकी क़िस्मत का ये सिलसिला क़ायम रहा.
हालांकि कराची की रहने वाली उनकी पत्नी क़ुरअत-उल-ऐन ने उन्हें दो दिन के लिए व्हाट्सएप पर ब्लॉक कर दिया है.
साल 2015 में भारत और पाकिस्तान के बीच मैच के बाद भी कुछ ऐसा ही हुआ था.
एडीलेड में होने वाले उस मैच में ऐन और उनके बेटे को स्टैंड छोड़कर उस वक़्त जाना पड़ा था जब पाकिस्तान की बुरी परफॉर्मेंस और उनके पति और दूसरे भारतीय प्रशंसकों की ख़ुशी को वो बर्दाश्त नहीं कर पाए.
ऐन बताती हैं कि, "वैसे तो आप हर वक़्त दुआ करते हैं कि अल्लाह उन्हें ख़ुश रखे लेकिन उनकी ये वाली ख़ुशी बर्दाश्त नहीं होती है."
भारत और पाकिस्तान का मैच जब भी हो और जहाँ भी खेला जाए, दोनों ही देशों के प्रशंसकों की भावनाएं वैसे ही उबाल पर होती हैं लेकिन जब एक घर में पति का संबंध भारत से और पत्नी का संबंध पाकिस्तान से हो तो सोचिए क्या हालात होते होंगे.
अली जब भी घर पर भारत-पाकिस्तान का मुक़ाबला देख रहे होते हैं और भारतीय बल्लेबाज़ चौके-छक्के लगा रहे होते हैं, 'वहीं से घर में तनाव का माहौल बन जाता है.'
हालांकि अली और ऐन की कहानी में भारत और पाकिस्तान सिर्फ़ क्रिकेट मैच तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि दोनों के पहली बार मिलने से लेकर बारात पाकिस्तान आने तक हर मोड़ पर ही कहीं भारत-पाकिस्तान संबंधों तो कहीं क्रिकेट सिरीज़ का दख़ल रहा है.
बीते लगभग एक दशक से ये परिवार ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है लेकिन आज से लगभग 20 साल पहले इनके लिए भारत और पाकिस्तान आना जाना भी बहुत मुश्किल था.

इमेज स्रोत, QURAT UL AIN AALI
'खत में हालचाल पूछते थे, पता होता था कि अम्मी-अब्बू पहले ही पढ़ लेंगे'
भारत और पाकिस्तान के बँटवारे के दौरान अली और ऐन का परिवार भी भारत और पाकिस्तान में बँट गया था. हालांकि बाद में भी दोनों तरफ़ से आने-जाने का सिलसिला जारी रहा.
ऐन आठवीं क्लास में थीं जब वो पहली बार लखनऊ गई थीं. वो अपने ख़ास अंदाज़ में कहती हैं कि, "पता नहीं मैं क्यों गई थी, वरना बचत हो जाती आज."
ये 80 के दशक की बात है, जब ज़ाहिर है आज कल की तरह सोशल मीडिया नहीं था. तब अली और ऐन के बीच ख़त के ज़रिए बात होती थी.
ऐसा ख़त जो पहले ही दो महीनों के इंतज़ार के बाद पहुँचता, इसे पहले ऐन के माता-पिता पढ़ते और फिर आख़िरकार ये ऐन के पास पहुँचता.
अली बताते हैं कि उस वक़्त सिर्फ़ खत में ही हालचाल पूछ लिया करते थे क्योंकि पता होता था कि इसे पहले अम्मी और अब्बू पढ़ेंगे.
इसके बाद इंटरनेट आया और दोनों के बीच मैसेंजर के ज़रिए बातचीत होने लगी और दोनों परिवारों की सहमति से शादी तय हो गई.
ऐन बताती हैं कि, "मेरी अम्मा कहा करती थीं कि कहीं भी शादी करेंगे, भारत में नहीं. इसकी वजह ये थी कि उस वक़्त संचार के ज़रिए कम थे और आने जाने के ऐतबार से भी मुश्किलें थीं."
उस वक़्त भारत और पाकिस्तान के बीच फ़्लाइट भी दुबई के ज़रिए आया-जाया करती थीं. इसलिए शादी के प्रबंधन में फ्लाइट के अलावा वीज़ा की मुश्किलें भी थीं.
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मैच के वीज़ा पर आई बारात
साल 2004 में जब भारत और पाकिस्तान के संबंधों में नरमी आनी शुरू हुई तो दोनों देशों के बीच वनडे और टेस्ट सिरीज़ की घोषणा हुई जिसे 'दोस्ती सिरीज़' का नाम दिया गया. भारत को साल 2004 में पाकिस्तान का दौरा करना था और इस दौरान अली और उनके परिवार के लिए पाकिस्तान आने की उम्मीद बनीं.
उन्हें कराची वनडे मैच के लिए पाकिस्तान आने का 14 दिनों का वीज़ा मिला, जिसमें उनके परिवार के लोग और दोस्त भी कराची आए.
अली बताते हैं कि, "हम उस मैच के वीज़ा पर आए, वो मैच देखा, ये भी मेरे साथ गईं थीं. उस दौरान हमने मैच का भी ख़ूब मज़ा लिया और मैच भी इंडिया ही जीता था तो बहुत अच्छा लगा था."
इस पर ऐन ने फौरन कहा, "लेकिन मुझे बहुत बुरा लगा था, वहीं आप की बदक़िस्मती शुरू हो गई थी, ये भी आप याद कर लें."

"पाकिस्तान इंडिया मैच हो तो भूल जाती हूं ये आदमी कैसा है"
ऐन के मुताबिक पाकिस्तान-इंडिया का मैच उनके घर पर ऐसा मौक़ा होता है, जब सारी भावनाएं सामने आ जाती हैं.
"दुश्मन दुश्मन ही लगने लगता है. सब भूल जाते हैं कि आदमी कैसा है. बड़ी तक़लीफ़ होती है ख़ुशी देखकर उस वक़्त. वैसे तो आदमी दुआएं करता है कि ख़ुश रहें लेकिन ये एक ऐसा मौक़ा होता है, जब ये ख़ुश हो रहे होते हैं तो मुझे बड़ी जलन होती है. मै सच बोलूंगी."
इधर अली को क्रिकेट से बचपन से लगाव था और वो तेज़ गेंदबाज़ी किया करते थे. अब भी वो ना सिर्फ़ भारत के मैच बल्कि ऐशेज़ सिरीज़ भी देखने जाते हैं और क्रिकेट से रोमांचित होते हैं, चाहें टीम कोई भी हो.
हालांकि घर पर मैच देखते हुए माहौल को क़ाबू में रखने के लिए उन्हें कई बार अपनी ख़ुशी भी छुपानी पड़ती है.
उन्होंने बताया, "चौके-छक्के पड़ने शुरू होते ही ज़ाहिर है, ख़ुश तो होता हूँ लेकिन उस दौरान घर का भी ख़्याल होता है कि कहीं किसी की भावनाएं आहत ना हो जाएं."
हालांकि इस बारे में ऐन का नज़रिया अलग है. वो कहती हैं कि, "सच्चाई ये है कि मुश्किल से ही मुस्कुरा पाते हैं ये क्योंकि मुझे बहुत अफ़सोस होता है और बहुत तक़लीफ़ होती है कि कोई बहुत ख़ुश है, इसलिए की भारत जीत गया और मैं बर्दाश्त नहीं कर पाती."
वो बताती हैं कि, "अगर मेरे अब्बा पाकिस्तान से आए हों और पाकिस्तान और इंडिया का मैच हो तो इतना तनाव आप एमसीजी में महसूस नहीं करेंगे जितना आप इस घर में महसूस करेंगे."

बेटा पाकिस्तान और बेटी इंडिया की समर्थक
ये मतभेद सिर्फ़ ऐन और अली तक ही सीमित नहीं है बल्कि उनके बच्चों में भी इस बारे में अलग-अलग पक्ष लिया जाता है.
उनके बेटे पाकिस्तान की तरफ़ होते हैं क्योंकि वो पाकिस्तान में पैदा हुए जबकि बेटी भारत का समर्थन करती है क्योंकि वो अपने पिता के ज़्यादा क़रीब है.
हालांकि इस दौरान परिवार में सम्मान के रिश्ते को बरक़रार रखने पर भी ज़ोर दिया जाता है. ऐन बताती हैं कि उन्हें अपने बेटे को कभी-कभी कहना पड़ता है कि "अपने पिता के साथ सम्मान से पेश आओ और ये ना भूलो कि हम एक ही परिवार का हिस्सा हैं."

बेटी का समर्थन पिता के साथ इसलिए होता है क्योंकि ऐसा लगता है कि "उसके डैडी अकेले पड़ गए हैं और घर में दो लोग पाकिस्तान की तरफ़ हैं तो उसे भारत की तरफ़ होना चाहिए."
फिर मैच के बात ये तनाव कितने दिन तक रहता है? अली बताने लगे कि बस थोड़े दिन के लिए रहता है लेकिन ऐन ने बात काटते हुए कहा कि "एक दो दिन के लिए मैं बस व्हाट्सएप पर ब्लॉक कर देती हूं."
ऐन कहती हैं कि, "ज़ाहिर है अगर बराबर में बैठा आदमी हर थोड़ी देर बात अपनी जगह से उठकर खड़ा होगा और बार-बार ये कहेगा कि हां बताओ कैसा लग रहा है, तो बुरा नहीं लगेगा?"
पहले भारत-पाकिस्तान मैच को दौरान बिरयानी को दोनों देशों का साझा खाना समझकर पकाया जाता था लेकिन ऐन को कुछ अर्से बाद खयाल आया कि "पाकिस्तान मैच हार रहा होता है और ये बिरयानी भी मज़े लेकर खा रहे होते हैं, इसलिए मैंने कहा नहीं, अब से पिज़्ज़ा ऑर्डर किया जाएगा."
रविवार के मैच में पाकिस्तान की हार के बाद भी घर का माहौल तनावपूर्ण हो गया था लेकिन उम्मीद है कि ये तल्ख़ी कुछ दिनों से ज़्यादा नहीं रहेगी.
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