टी20 वर्ल्ड कप: भारत-पाकिस्तान के वो मैच, जो भुलाए नहीं भूलते…

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- Author, भरत शर्मा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
''सनी भाई, क्या आपको लगता है कि भारत-पाकिस्तान को न्यूट्रल मैदानों पर नियमित रूप से द्विपक्षीय सिरीज़ खेलनी चाहिए?''
''लाहौर में बर्फ़ गिर सकती है, लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच अभी द्विपक्षीय क्रिकेट सिरीज़ नहीं हो सकती.''
अप्रैल, 2020 में रमीज़ राजा ने सोशल मीडिया के ज़रिए होने वाली बातचीत में जब सुनील गावस्कर की तरफ़ ये सवाल उछाला, तो तपाक से ये जवाब मिला.
इस बात को गुज़रे दो साल से ज़्यादा हो गए, लेकिन हालात नहीं बदले. अब भी इन दोनों टीमों का आमना-सामना सिर्फ़ आईसीसी टूर्नामेंट में होता है और जब कभी ऐसा होता है तो वो सिर्फ मैच नहीं रह जाता.
भारत-पाकिस्तान क्रिकेट का इतिहास

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दोनों के बीच क्रिकेट की कहानी शुरू होती है आज से 70 बरस पहले और कहानी दिलचस्प है.
साल 1947 में भारत के बंटवारे के क़रीब पांच साल बाद साल जुलाई, 1952 में इम्पीरियल क्रिकेट कॉन्फ़्रेंस की बैठक में पाकिस्तान को टेस्ट क्रिकेट टीम का दर्जा मिला और वो भी भारत की सिफ़ारिश पर.
इसी साल पाकिस्तान टीम ने भारत का दौरा किया. तीन टेस्ट मैच खेले गए. पहला दिल्ली में भारत ने जीता, दूसरा लखनऊ में पाकिस्तान ने और तीसरा बॉम्बे में भारत ने.
साल 1955 में भारत ने पाकिस्तान का दौरा किया और 1961 में पाकिस्तान ने भारत का, दोनों टूर पर टेस्ट क्रिकेट खेला गया और दोनों दफ़ा सिरीज़ बराबर रही.
इसके बाद पहले साल 1965 और फिर साल 1971 में दोनों देश जंग के मैदान में एक-दूजे के सामने आए और क्रिकेट का मैदान कहीं पीछे छूट गए. लंबे अंतराल के बाद दोनों देशों के बीच साल 1978 में द्विपक्षीय क्रिकेट सिरीज़ हुई.

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इस हाइप की वजह क्या है?
भारत ने इस साल पाकिस्तान का दौरा किया और इस बार टेस्ट क्रिकेट के अलावा वनडे क्रिकेट में भी दोनों का आमना-सामना हुआ.
तब से अब तक जब-जब दोनों देशों के बीच क्रिकेट खेला गया, दिलचस्पी आसमान छूने लगी, लेकिन इस हाइप की वजह क्या है?
इस सवाल का जवाब वरिष्ठ खेल पत्रकार और लेखक अयाज़ मेमन इस तरह देते हैं, ''दोनों देशों का एक इतिहास ऐसा रहा है. दोनों के बीच क्रिकेट एक ऐसा मौक़ा बन गया है, जो सभी का ध्यान खींच लेता है. ख़ास तौर से बीते 15-20 साल में ऐसा हुआ है. ब्रॉडकास्टर भी इसे भुनाना चाहते हैं और दोनों के मैच को अलग तरह से परोसा जाता है.''
भारत-पाकिस्तान लंबे समय से द्विपक्षीय सिरीज़ नहीं खेल रहे, ऐसे में दोनों टीमों का आमना-सामना आईसीसी टूर्नामेंट में ही होता है. तो क्या आईसीसी भी 'दुश्मनी' को भुनाने में पीछे नहीं है?
वरिष्ठ खेल पत्रकार धर्मेंद्र पंत का कहना है, ''भारत-पाकिस्तान के रिश्ते कुछ ऐसे हैं कि उसका असर मैचों पर भी दिखता है. दोनों टीमें एक-दूसरे को हराने के लिए अतिरिक्त कोशिश करती है. आईसीसी भी इस 'दुश्मनी' को भुनाता है, क्योंकि आप गौर करेंगे कि आईसीसी टूर्नामेंट में दोनों टीमों को एक ही समूह में रखता है, ताकि कम से कम एक बार दोनों ज़रूर भिड़े. कई साल से ये सिलसिला जारी है.''
भारत-पाकिस्तान के बीच खेले जाने वाला हर क्रिकेट मैच हाइप बनाता है, लेकिन दोनों के बीच कुछ ऐसे मुक़ाबले हुए हैं, जो भुलाए नहीं भूलते.

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1. नवंबर, 1978. साहिवाल (पाकिस्तान)
भारत लंबे समय बाद पाकिस्तान का दौरा कर रहा था और वनडे सिरीज़ का पहला मैच क्वेटा में खेला गया. ये दोनों टीमों के बीच पहला वनडे मुक़ाबला भी था. उस सिरीज़ में तीनों मैच 40-40 ओवर के खेले गए थे.
भारतीय टीम ने पहले मैच में पाकिस्तान को महज़ चार रनों से हराया. दूसरा मैच सियालकोट में खेला गया और भारत की टीम महज़ 79 रनों पर सिमट गई. पाकिस्तान ने ये मैच आसानी से जीता.
लेकिन इस सिरीज़ का तीसरा मैच एक विवाद की वजह से याद किया जाता है. लाहौर से क़रीब दो सौ किलोमीटर दूर साहिवाल में पाकिस्तान ने पहले खेलते हुए 40 ओवर में 205 रन बनाए.
भारत ने इसका बढ़िया जवाब दिया और एक समय 37 ओवर में सिर्फ़ दो विकेट के नुक़सान पर 183 रन बना लिए थे. दिलचस्प अंत की ओर बढ़ रहे मैच में पाकिस्तानी गेंदबाज़ सरफ़राज़ नवाज़ ने चार लगातार बाउंसर मारी लेकिन अम्पायर ने वाइड या नो बॉल नहीं दी.
भारतीय टीम के कप्तान बिशन सिंह बेदी इस बात से इतना ख़फ़ा हुए कि आगे मैच खेलने से इनकार कर दिया. ऐसा लग रहा था कि भारत इस मैच को जीत जाएगा. लेकिन हुआ नहीं.
नियमों के मुताबिक़ ये मैच पाकिस्तान के खाते में चला गया. और उसने सिरीज़ 2-1 से जीती. इससे पहले पाकिस्तान में खेली गई टेस्ट सिरीज़ में भी अम्पायरिंग को लेकर कई सवाल उठे थे.
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2. अप्रैल, 1986. शारजाह (UAE)
ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, श्रीलंका, भारत और पाकिस्तान. ऑस्ट्रल-एशिया कप में पांच टीमों ने हिस्सा लिया और खिताबी भिड़ंत हुई भारत और पाकिस्तान के बीच. और ये मैच सिर्फ़ एक वजह से याद किया जाता है. चेतन शर्मा की आख़िरी गेंद पर जावेद मियांदाद का छक्का.
भारत ने पहले खेलते हुए सुनील गावस्कर के 92 और क्रिस श्रीकांत के 75 रनों की बदौलत 50 ओवर में 245 रन बनाए. जवाब में पाकिस्तान की तरफ़ से मोहसिन ख़ान और अब्दुल क़ादिर ने 30-30 रनों से ज़्यादा की पारी खेली, लेकिन भारत और जीत के बीच मियांदाद दीवार साबित हुए.
चेतन शर्मा आख़िरी ओवर फेंक रहे थे और शुरुआती पांच गेंदों पर कोई बड़ा नुक़सान नहीं उठाया था. पांचवीं गेंद पर जैसे-तैसे तौसीफ़ अहमद ने स्ट्राइक जावेद मियांदाद को दी. आख़िरी गेंद पर जीत के लिए पांच रन और टाई कराने के लिए चार रनों की ज़रूरत थी. मियांदाद शायद चौका मारकर मैच टाई कराने के बारे में सोच रहे थे.
लेकिन चेतन ने यॉर्कर फेंकने के चक्कर में फ़ुल टॉस दे दी और मियांदाद ने ऐसा बल्ला घुमाया गया कि गेंद बाउंड्री के बाहर जाकर गिरी. पाकिस्तान क्रिकेट के इतिहास में ये मैच अलग से दर्ज है और आज भी मियांदाद के इस छक्के का ज़िक्र होता है. चेतन आज भी वो गेंद नहीं भूले.
अयाज़ मेमन के मुताबिक़ इस मैच में मियांदाद ने आख़िरी गेंद पर छक्का लगाकर जो मैच जिताया, उसका असर भारतीय टीम और दर्शकों पर लंबे समय तक रहा.

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3. मार्च, 1996. बैंगलोर (भारत)
वर्ल्ड कप का क्वार्टर फ़ाइनल मुक़ाबला बैंगलोर में खेला गया और इसे दो वजह से याद किया जाता है. इस मैच में अजय जडेजा ने अंतिम ओवरों में ऐसी पारी खेली थी, जो भुलाए नहीं भूलती. चार चौकों और दो छक्कों की मदद से महज़ 25 गेंद में 45 रनों की इस पारी ने मैच पलट दिया था.
जडेजा ने इस पारी में ख़ास तौर से पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज़ वक़ार यूनुस को निशाने पर लिया. यूनुस ने इस मैच में दस ओवर में 67 रन लुटाए थे. भारत ने जडेजा की पारी की बदौलत 287 रनों का पहाड़ खड़ा किया, जो उस समय के हिसाब से बड़ा टार्गेट माना जाता है.
लेकिन पाकिस्तान हार मानने के मूड में नहीं था. जब टीम बल्लेबाज़ी करने लौटी तो आमिर सोहेल ने भारत के तेज़ बॉलरों की ख़ासी पिटाई की. सईद अनवर के साथ मिलकर दस ओवरों में उन्होंने 84 रन बटोर लिए थे और भारत का बड़ा लक्ष्य छोटा दिखने लगा था. अनवर आउट हुए तो भी सोहेल ने अंदाज़ नहीं बदला.
फिर आया 15वां ओवर, जो वेंकटेश प्रसाद फेंक रहे थे. क्रीज़ से आगे निकलकर ऑफ साइड पर करारा चौका जड़ने के बाद सोहेल ने प्रसाद की तरफ़ कुछ ऐसा इशारा किया जैसे कह रहे हों कि अगली गेंद भी बाउंड्री पार जाएगी.
लेकिन अगली गेंद पर प्रसाद की बदला लेने की बारी थी. सोहेल एक बार फिर आगे आए, लेकिन प्रसाद ने इस बार चालाकी दिखाई और उन्हें बोल्ड कर दिया. और बोल्ड करने के बाद सोहेल को उनकी भाषा में जवाब भी दिया.
धर्मेंद्र पंत को ये मैच खूब याद आता है. जडेजा की पारी, सोहेल-प्रसाद की तकरार और उस पर ख़ास बात ये कि इस वर्ल्ड कप का फ़ाइनल लाहौर में खेला जाना था. पंत कहते हैं, ''ऐसा लगा था कि भारत, पाकिस्तान को हराने के बाद पाकिस्तान में फ़ाइनल खेलेगा, लेकिन श्रीलंका ने सेमीफाइनल में उसका सपना तोड़ दिया था, जो आख़िरकार वर्ल्ड चैम्पियन भी बना.''

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4. सितंबर, 2007. जोहानिसबर्ग (दक्षिण अफ्रीका)
मध्यम गति के गेंदबाज़ जोगिंदर शर्मा की वो गेंद, मिस्बाह-उल-हक़ का छक्का मारने की कोशिश में गेंद को हवा में टांग देना और एस श्रीसंत का जैसे-तैसे उसे कैच करना, ये पल भारतीय दिलों में क़ैद हैं तो पाकिस्तानी दिलों में तीर की तरह चुभते हैं.
साल 2007 में टी20 का पहला वर्ल्ड कप खेला गया और भारत-पाकिस्तान ज़्यादातर टीमों को हराते हुए ख़िताब के लिए भिड़े. महेंद्र सिंह धोनी नए-नए कप्तान बने थे और भारतीय टीम भी अनुभवी होने से ज़्यादा युवा थी.
पहले खेलते हुए भारतीय टीम ने 20 ओवर में 157 रन बनाए. सलामी बल्लेबाज़ गौतम गंभीर ने 54 गेंदों में 75 रनों की शानदार पारी खेली और अंतिम ओवरों में मौजूदा कप्तान और उस दौर के युवा बल्लेबाज़ रोहित शर्मा ने रन गति बढ़ाते हुए 30 रन जड़े.
भारत ने शुरुआत से कसी गेंदबाज़ी की और पाकिस्तान के विकेट नियमित अंतराल पर गिरते रहे. लेकिन मिस्बाह-उल-हक़ ने अंतिम ओवर तक हार नहीं मानी और 43 रनों की पारी में कई बार भारतीय टीम का गला सुखाया.
लेकिन धोनी का अंतिम ओवर जोगिंदर शर्मा को देने का फ़ैसला जादू कर गया और मिस्बाह आख़िरी शॉट में वो कमाल नहीं कर पाए, जो अब तक कर पा रहे थे. पाकिस्तानी टीम जीत के लक्ष्य और वर्ल्ड कप की ट्रॉफ़ी से महज़ पांच रन दूर रह गई.
अयाज़ मेमन याद करते हैं, ''ये टूर्नामेंट कई मायनों में ख़ास रहा. आईसीसी के इतने बड़े टूर्नामेंट में पहली बार भारत-पाकिस्तान के बीच फ़ाइनल हुआ. दोनों टीमें इससे पहले इसी टूर्नामेंट में पहले भी भिड़ी थी तो स्कोर टाई रहा और भारत ने बॉल आउट के नायाब नियम से मैच जीता. क्रिकेट खेलने और देखने वाली युवा पीढ़ी इस टूर्नामेंट को कभी नहीं भुला सकती.''
5. अक्टूबर, 2021. दुबई (UAE)
ये वो मैच था, जिसका सभी को इंतज़ार था. भारत ने पाकिस्तान के हाथों कभी वर्ल्ड कप में हार नहीं खाई थी और इस मैच से पहले भी भारतीय टीम को पाकिस्तान की तुलना में कहीं ज़्यादा मज़बूत माना जा रहा था. कोरोना वायरस झेलने के बाद क्रिकेट की दुनिया किसी बड़े टूर्नामेंट का दीदार करने बैठी थी, और टूर्नामेंट का सबसे बड़ा मैच था भारत बनाम पाकिस्तान.
लेकिन जैसा कि अयाज़ मेमन कहते हैं, भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाने वाला मैच कई बार हाइप के सामने बौना रह जाता है. यहां भी ऐसा ही हुआ. एंटी-क्लाइमैक्स की तरह. दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन पाकिस्तानी टीम कुछ और करने के मूड में थी. अंत में ये मैच बेहद एकतरफ़ा साबित हुआ.
शाहीन शाह अफ़रीदी के पहले ओवर की चौथी गेंद की रोहित शर्मा को हवा तक नहीं लगी. बॉल पैड से टकराई, पल भर में अम्पायर की उंगली उठी और शर्मा पवेलियन लौट गए. अफ़रीदी अगला ओवर फेंकने आए तो उससे भी बेहतर गेंद फेंकी, के एल राहुल का दिल धक से रह गया और गिल्लियां हवा में.
इसके बाद कप्तान विराट कोहली ने संभलकर खेलते हुए 57 रन बनाए और ऋषभ पंत ने भी 39 रनों की पारी खेली. टीम ने बनाए सात विकेट पर 151 रन. ऐसा लगा कि भारतीय गेंदबाज़ इस स्कोर के बूते मैच में कुछ जान डालेंगे.
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लेकिन पाकिस्तानी टीम ने असली जलवा अपनी बल्लेबाज़ी में दिखाया. बुमराह, भुवनेश्वर, शमी सरीखे भारतीय गेंदबाज़ आते, लेकिन सलामी बल्लेबाज़ मोहम्मद रिज़वान और कप्तान बाबर आज़म उन्हें बार-बार पीटकर लौटा देते. रिज़वान ने नाबाद 79 और बाबर ने नाबाद 68 रन ठोंके. दोनों ने मिलकर 18वें ओवर में मैच ख़त्म कर दिया. दस विकेट से शानदार जीत. भारतीय टीम ने मैच हारा और भारतीय दर्शकों ने अगली कई रातों की नींद.
इन पांच मैचों के अलावा भारत-पाकिस्तान के बीच ऐसे कई मैच खेले गए हैं, जो किसी ने किसी वजह से क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में ख़ास जगह रखते हैं.
हाइप असली हो या नक़ली, ये सिर्फ़ एक मैच हो या फिर 'दो पुराने दुश्मनों के बीच क्रिकेट की जंग…' भारत बनाम पाकिस्तान जब-जब क्रिकेट में टक्कर लेते हैं तो दुनिया में चर्चा होती है.
हर बार की तरह इस दफ़ा भी 23 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में टी20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के अपने पहले मैच में भारत और पाकिस्तान टकराने वाले हैं. बारिश ने ख़लल ना डाला तो यक़ीनन ये मैच भी कई सारे यादों को तिजोरी में सजाने की वजह दे जाएगा.
बस दुआ कीजिए मौसम मेहरबान रहे और अच्छा खेल दिखाने वाली टीम पहलवान बने.
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