ईरान-तुर्की, अमेरिका-मेक्सिको... अवैध आप्रवासियों के लिए ये हैं दुनिया के सबसे खतरनाक रास्ते

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पिछले कुछ ही दिनों के भीतर दुनिया ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने की कोशिश करने वालों आप्रवासियों से जुड़ी दो बड़ी त्रासदियां देखी हैं.
शुक्रवार को स्पेन से मोरक्को को अलग करने वाले एनक्लेव में मेलिला के बाड़े को पार करने के चक्कर में 23 लोगों की मौत हो गई.
इसके तीन दिन बाद ही टेक्सस के सैन एंटोनियो की पुलिस ने एक लावारिस ट्रक के अंदर से 50 से अधिक लोगों के शव बरामद किए.
दरअसल कोविड-19 की वजह से हुई उथलपुथल ने अवैध आप्रवास के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रास्तों पर लोगों की तादाद काफी बढ़ा दी है. लिहाजा कई देशों ने इन रास्तों पर कड़े प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे आने वाले दिनों में मौतों की संख्या बढ़ सकती है.
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) का आकलन है 2014 से अब तक अमेरिका या यूरोपियन यूनियन के देशों में पहुंचने के चक्कर में 50 हजार आप्रवासी या तो मारे गए हैं या लापता हैं.
एजेंसी का मानना है कि ये संख्या इससे ज्यादा हो सकती है. लेकिन दुनिया भर में जिन सबसे खतरनाक रास्तों से होकर होकर ये आप्रवासी गुजरते हैं उनके बारे में जानना जरूरी है.
मध्य भू-मध्यसागर
एजेंसी के मुताबिक मध्य भूमध्यसागर आप्रवासियों के लिए सबसे खतरनाक रास्ता है. एक आकलन के मुताबिक 2014 से लेकर अब तक उत्तरी अफ्रीका से भूमध्यसागर के रास्ते यूरोप जाने के रास्ते में 19 हजार 500 लोगों की मौत हो चुकी है.
भू-मध्यसागर पार करने के चक्कर में ज्यादातर हादसे नावों में जरूरत से ज्यादा लोगों के भरे होने या किसी तरह जुगाड़ से बनाई नावों में सफर करने से होते हैं. इस तरह के इंतजामों से खतरा और बढ़ जाता है.
ट्यूनीशिया से आने वाले लोग भू-मध्य सागर जाने के रास्ते से यूरोप जाने के लिए लीबिया से रवाना होते हैं. यूरोप जाने की राह में जिन लोगों की समुद्र में डूबने से मौत हो गई है उनकी याद में एक समाधि बनाई गई है.
ट्यूनीशिया से यात्रा शुरू करने की उम्मीद पाले नाइजीरियाई आप्रवासी विकी का कहना है, "इन कब्रों को देखने से बड़ी उदासी होती है. मैं जब इन्हें देखता हूं तो समुद्र के रास्ते उस पार जाने की मेरी चाह मर जाती है."
आईओएम जैसी एजेंसियों का कहना है कि इस तरह की समाधियां भी आप्रवासियों को समुद्र के रास्ते यूरोप या अमेरिका की यात्रा करने से रोक नहीं पाती.
आईओएम की प्रवक्ता सफा सेहली कहती हैं, "चिंता की बात ये है कि इस खतरनाक समुद्री रास्ते को पार करने के दौरान मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है."
उनका कहना है कि सरकारें इन मौतों को घटाने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रही हैं.
यूरोपियन सीमा और तटरक्षक एजेंसी फ्रंटेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक 2015 से अब तक इस रास्ते से गुजरने वाले तीन लाख लोग बचाए गए हैं.

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अफ्रीका के अंदरूनी रास्ते
कई अफ्रीकी आप्रवासियों के लिए यूरोप पहुंचने का सपना उनके अपने महाद्वीप की यात्रा से शुरू होता है. उत्तरी अफ्रीका के देशों में पहुंचने के लिए सहारा रेगिस्तान को पार करना होता है.
लेकिन इस राह में मुश्किल पर्यावरणीय हालात एक बड़ी चुनौती है. आईओएम का आकलन है कि 2014 से लेकर 2022 के बीच सहारा पार करने क्रम में 5400 लोगों की मौत हो चुकी है.
आप्रवासी अब्दुल्ला इब्राहिम ने न्यूज़ एजेंसी एएफपी से सहारा पार करने का अनुभव साझा करते हुए बताया था कि रेगिस्तान में लोग मारे जाते हैं. दरअसल ऊर्जा की कमी से उनकी मौत हो जाती है.
पानी खत्म हो जाने की वजह से भी लोगों की मौत हो जाती है.
एक और बड़ी चुनौती इस मार्ग पर मानव तस्करी में सक्रिय लोगों की सक्रियता भी है. आईओएम ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है, "इस इलाके में तस्करों और बॉर्डर एजेंटों की हिंसा की वजह से सहारा रेगिस्तान में मौत होती है."

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अमेरिका-मैक्सिको बॉर्डर
हालांकि अमेरिकी महाद्वीप में आप्रवासियों की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले ज्यादातर रास्ते अमेरिका जाने के लिए नहीं होते. लेकिन इसके जरिये इस इलाके के रास्तों का इस्तेमाल कहीं और नई जिंदगी शुरू करने के लिए भी किया जाता है.
अमेरिकी-मेक्सिको बॉर्डर की चुनौतियां भी कम नहीं. भौगोलिक तौर पर यह इलाका काफी कठिन है. इसमें रेगिस्तान का भी बड़ा हिस्सा आता है.
आप्रवासी अक्सर यहां खतरनाक रियो ग्रांड (मैक्सिको में रियो ब्रेवो के नाम से भी जाना जाता है) रास्ते से पार करने करने की कोशिश करते हैं.
यह नदी बॉर्डर के समांतर बहती है. इस रास्ते में ज्यादातर लोगों की मौत डूबने से होती है. आईओएम का कहना है कि 2014 से अब तक इस रास्ते में 3000 लोगों की मौत हो चुकी है.
जो लोग इस तरह के प्राकृतिक खतरों से बचने के लिए वाहनों में छिप कर जाने का विकल्प आजमाते हैं उन्हें और अधिक खतरा रहता है.
आईओएम की प्रवक्ता सफा सेहली का कहना है, "हाल के दिनों में अमेरिका जाने के रास्ते में काफी लोगों की मौत हो चुकी है."
दिसंबर 2021 में दक्षिणी मैक्सिको के चियापास में एक ट्रक के दुर्घटनाग्रस्त होने से 56 आप्रवासियों की मौत हो गई थी.

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एशियाई रास्ते
आईओएम का कहना है कि 2020 के दस आप्रवासियों में से चार का जन्म एशिया में हुआ था. एशिया में कई अहम माइग्रेशन रूट हैं.
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी का कहना है कि पिछले आठ साल में एशिया में 5000 लोग गायब हो गए हैं.
मरने वाले ज्यादातर लोग रोहिंग्या और बांग्लादेशी आप्रवासी थे जो बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर पार करके पड़ोसी देशों या यूरोप जाना चाह रहे थे.
लेकिन इस यात्रा में वो काफी ज्यादा मुश्किलों का सामना करते हैं. दूसरे रास्तों पर ये आप्रवासी अक्सर मानव तस्करी गैंग के शोषण के शिकार होते हैं.
एक और खतरनाक रास्ता ईरान और तुर्की की सीमा है. पिछले साल अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद इस रास्ते में अफगानी शरणार्थियों की अभूतपूर्व बाढ़ आ गई है.
संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर ने कहा है कि ईरान और दूसरे पड़ोसी देशों में 20 लाख लोगों ने खुद को एक शरणार्थी के तौर पर रजिस्टर कराया है.

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