रॉटरडैम का वो बंदरगाह जहां से पूरे यूरोप में पहुंचती है कोकीन

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- Author, लिंडा प्रेस्ली और माइकल गैलहर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
लगभग एक दर्जन लोगों को सीसीटीवी स्क्रीन पर रॉटरडैम के बंदरगाह पर सैनिकों की तरह भागते देखा जा सकता है.
उनका ध्यान एक बंदरगाह शिपिंग कंटेनर पर है जो कोलंबिया से नीदरलैंड के रॉटरडैम पहुंचा है. कागज़ातों के मुताबिक इस कंटेनर के ज़रिए फल लाए गए हैं लेकिन इन युवाओं की उन फलों में कोई दिलचस्पी नहीं है जो अब तक कंटेनर से निकाले जा चुके होंगे.
12 मीटर लंबे एक कंटेनर की रेफ्रिजरेटर यूनिट में 80 किलोग्राम कोकीन को छिपाया जाता है, जिसकी बाज़ार में क़ीमत चार मिलियन यूरो यानी 34 करोड़ रुपये है और कोकीन हासिल करना ही युवाओं का असली लक्ष्य है.
इसलिए इन्हें कोकीन कलेक्टर कहा जाता है क्योंकि उनका काम शिपिंग कंटेनरों से इस बंदरगाह में पर लाए गए कोकीन की सुरक्षित तस्करी करना है ताकि कोकीन को एम्स्टर्डम, बर्लिन और लंदन तक पहुँचाया जा सके.
कोकीन की तस्करी करने वालों को आमतौर पर कंटेनर से निकाले गए कोकीन के लिए 2,000 यूरो यानी एक लाख 70 हज़ार रुपये प्रति किलोग्राम तक मिलते हैं.
बीबीसी को कोकीन तस्करी में शामिल इस समूह की ख़तरनाक गतिविधियों की एक झलक देखने का मौका मिला.
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'बंदरगाह सोने की ख़ान है'
एक नकाबपोश व्यक्ति ने डच टीवी नेटवर्क वीपीआरओ के एक पत्रकार डैनी गॉसिन को बताया, "रॉटरडैम का बंदरगाह सोने की ख़ान है. मैं घर के पास ही अच्छे पैसा कमा सकता हूं. यहां हमेशा काम मिल जाता है."
वह एक शक्तिशाली तस्करी नेटवर्क के लिए कोकीन कलेक्टर के तौर पर काम करने वाले युवकों में से एक है. उनके अनुसार, इस काम का स्वरूप समय-समय पर बदलता रहता है, कभी कोई उन्हें पैसे की पेशकश करता है तो कभी कोई उन्हें तस्करी के नशीले पदार्थों में हिस्सा देता है.
नशीली दवाओं का यह व्यापार तेज़ी से फैल रहा है. बंदरगाह पर कंटेनर प्रोसेस कंपनी चलाने वाले आंद्रे क्रेमर ने कहा, "पहली बार इन लोगों को दो साल पहले देखा था. पहले साल में ऐसे कंटेनर एक-दो बार आते थे और ऐसे एक-दो लोग ही थे, लेकिन पिछले छह महीनों में हफ्ते में तीन से चार बार ऐसा हो रहा है और कलेक्टरों की संख्या भी दस से बारह तक पहुंच गई है."

तस्करों का 'होटल' कंटेनर
जैसे-जैसे नीदरलैंड पहुंचने वाले कोकीन की मात्रा बढ़ती है, वैसे-वैसे तस्करों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके भी अत्याधुनिक हो रहे हैं.
कभी-कभी वे कोकीन को बंदरगाह से बाहर नहीं ले जाते. इसके बदले उनका काम एक बंदरगाह पर मौजूद किसी कर्मचारी की मदद से कोकीन को दूसरे कंटेनर में ले जाना होता है, जिसे बाद में ट्रक द्वारा बंदरगाह से बाहर ले जाया जाता है. कभी-कभी गिरोह के लोग बंदरगाह के अंदर खाली पड़े कंटेनरों में बैठ जाते हैं और ड्रग्स के आने का इंतज़ार करते हैं.
क्रेमर कहते हैं, "हमें हाल ही में तीन 'होटल' कंटेनर मिले हैं जहां कलेक्टर कई दिनों तक खाने, पीने और अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए रह सकते हैं. हमें इन कंटेनरों में गद्दे, खाली पानी की बोतलें और खाने के रैपर भी मिले हैं."
लेकिन ऐसे 'होटल' कंटेनर में समय बिताना कई बार जानलेवा भी हो सकता है. सितंबर की शुरुआत में इसी तरह के एक कंटेनर में नौ कोकीन कलेक्टर तब मुश्किल में पड़ गए जब कंटेनर का दरवाजा जाम हो गया और उसे खोला नहीं जा सका.
रॉटरडैम पुलिस प्रमुख जेन जेन्स कहते हैं, "यदि आप फलों या लकड़ी से भरे कंटेनर में हैं, तो ये चीजें भी ऑक्सीज़न का उपयोग करती हैं, जिसका मतलब है कि अंदर के लोगों के लिए कम ऑक्सीज़न उपलब्ध होती है."
जेन के मुताबिक, कोकीन कलेक्टर आमतौर पर कंटेनर को अंदर से खोल लेते हैं, लेकिन इस मामले में कुछ ऐसा हुआ कि वे निकल नहीं पाए.
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जब कोकीन तस्करों ने मांगी मदद
कंटेनर में फंसे कोकीन कलेक्टरों ने आख़िरकार जान बचाने के लिए डच आपातकालीन सेवाओं को बुलाया.
रॉटरडैम पुलिस प्रमुख जेन जेन्स ने कहा, "हम जानते थे कि एक कंटेनर में नौ लोग मुसीबत में थे, लेकिन बंदरगाह पर लगभग 100,000 और कंटेनर थे और कोकीन लेने वालों को यह नहीं पता था कि वे किस कंटेनर में फंसे हैं?"
जेन जेन्स ने बताया, "पूरे बंदरगाह की तलाशी ली गई. हमने हेलीकॉप्टर और सीमा शुल्क अधिकारियों की भी मदद ली. ये लोग भाग्यशाली थे जो समय रहते मिल गए."
लेकिन तलाशी में क़रीब चार घंटे लग गए. जब कोकीन लेने वाले मिले तो उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.
बीते सात साल से रॉटरडैम के पुलिस प्रमुख जेन जेन्स ने सुरक्षा कारणों से यह नहीं बताया कि कोकीन कलेक्टरों का पता उन्होंने किस तरह से लगाया. उन्होंने रहस्यात्मक ढंग से कहा, "बस समझ लीजिए कि हम लोगों ने कुछ स्मार्ट क़दम उठाए थे."

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'हर साल बन रहा है नया रिकॉर्ड'
2014 में रॉटरडैम के अधिकारियों ने बंदरगाह से 5,000 किलोग्राम से अधिक कोकीन ज़ब्त की जबकि 2020 में इन लोगों ने 41,000 किलोग्राम कोकीन ज़ब्त किया.
पुलिस प्रमुख जेन जेन्स के अनुसार, "इस साल 60,000 किलोग्राम तक कोकीन ज़ब्त करने की उम्मीद है. हम हर साल नए रिकॉर्ड बना रहे हैं. हमें इस पर गर्व नहीं है. यह अच्छा है कि हमने कोकीन ज़ब्त कर ली है, लेकिन हर साल इसकी मात्रा बढ़ रही है."
बंदरगाह पर जब्त कोकीन तस्करी की कुल कोकीन का एक छोटा सा हिस्सा भर है.
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'हम घूमने आते हैं'
इस पूरे मामले में अजीब यह है कि अगर ये कलेक्टर पकड़े भी जाते हैं, तो भी उन्हें मादक पदार्थों का तस्कर साबित करना बहुत मुश्किल है.
सितंबर महीने में महज़ एक सप्ताह में बंदरगाह क्षेत्र से 110 कलेक्टर गिरफ़्तार किए गए. लेकिन जब तक वे रंगे हाथों पकड़े नहीं जाते, उन पर 100 यूरो से कम का जुर्माना लगाया जा सकता है. कुछ कलेक्टर नकद भी अपने साथ रखते हैं ताकि रोकने पर वे तुरंत जुर्माना भर सकें.
डच टीवी से बात करते हुए, एक कलेक्टर ने कहा, "हम अधिकारियों को बताते हैं कि हम यहां घूमने आते हैं. हमें कंटेनरों को देखना अच्छा लगता है. क्या मेरे पास कुछ है? क्या मेरे पास कोई नशीला समान है? या कोई उपकरण? मेरे पास कुछ नहीं है."
42 किलोमीटर लंबा रॉटरडैम का बंदरगाह यूरोप में सबसे बड़ा है. यहां प्रतिदिन 23,000 से अधिक मालवाहक कंटेनरों में सामान लादा-उतारा जाता है. कोकीन की तस्करी करने वाले नेटवर्क और कोकीन कलेक्टरों को भ्रष्टाचार से बहुत मदद मिलती है.

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'कभी रिश्वत तो कभी धमकी'
कलेक्टर के मुताबिक, ''अगर आप यहां सुबह आते हैं तो मैं गारंटी देता हूं कि आपको सुरक्षा पास मिल जाएगा. कोई भी कर्मचारी आपको पांच सौ यूरो (चालीस हज़ार रुपये) के बदले में एक दिन के लिए अपना पास दे देगा."
"सीमा शुल्क अधिकारी की मदद के बिना काम करना मुश्किल है. उसके पास एक कंटेनर हो सकता है जिसका निरीक्षण किया जाना है, लेकिन वह इसे आपके लिए निरीक्षण सूची से हटा सकता है."
जब कोई सीमा शुल्क अधिकारी इन तस्करों के साथ सहयोग करने से मना कर देता है, तो वे दूसरे रास्ता अपनाते हैं.
कलेक्टर ने बताया, "जैसे ही कोई अधिकारी हमारे साथ सहयोग करने से मना करता है तो हम उसके बच्चों को लेकर उसे धमकाते हैं और वह तुरंत हमारे साथ काम करने के लिए तैयार हो जाता है."
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आंद्रे क्रेमर का कहना है कि उनके कर्मचारी दबाव में हैं क्योंकि वे संगठित आपराधिक गिरोहों की नजर में हैं.
क्रेमर बताते हैं, "अधिकारियों से उनके घर पर जाकर संपर्क किया जाता है और बाड़ के पास एक विशिष्ट कंटेनर रखने के लिए दबाव डाला जाता है. मेरे कई कर्मचारियों ने इस्तीफ़ा दे दिया है क्योंकि वे डर के मारे यहां काम नहीं करना चाहते हैं."
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रॉटरडैम में तस्करी से जुड़े अपराध
रॉटरडैम के मुख्य अभियोजक के लिए भी ये कहानियां नयी नहीं है.
ह्यूगो हेलिनार बताते हैं, "शहर में कई अपराध बंदरगाह में नशीली दवाओं की तस्करी से संबंधित हैं. हमारे शहर में लगभग हर दिन गोलीबारी होती है. दस साल पहले सड़कों पर ऐसा नहीं था. लेकिन अब हिंसा बढ़ रही है."
कोकीन की तस्करी का असर पूरे देश में दिखने लगा है. बीते जुलाई महीने में नीदरलैंड के सबसे प्रसिद्ध अपराध पत्रकार पीटर आरडे वारिस की एम्स्टर्डम में दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी.
युवाओं की मदद करने वाले संगठन जॉज़ की संस्थापिका नादिया बारकियोआ कहती हैं, "अपराध करने वाले नेटवर्क बहुत अच्छी तरह से संगठित हैं. इन नेटवर्कों के पास सीईओ हैं, उनके पास मानव संसाधन हैं, उनके पास कर्मचारी हैं."
जॉज़ की ओर से रॉटरडैम के दक्षिणी तट पर बसे उपनगरीय इलाके में युवा कल्याण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं. इसी इलाक़े में कोकीन की तस्करी करने वाले अधिकांश युवा रहते हैं. इस इलाके की एक चौथाई से अधिक आबादी की उम्र 23 वर्ष से कम है, और आधे से अधिक अप्रवासी लोग हैं.
1960 और 1970 के दशक में, बाहर से आए लोग रॉटरडैम बंदरगाह पर रोजग़ार के अवसरों की तलाश में इस क्षेत्र में बस गए. लेकिन जब औद्योगिक गतिविधियां पश्चिम की ओर स्थानांतरित हो गई और काम बंद हो गया तो जो परिवार यहां से शिफ्ट करने की स्थिति में थे वे सब परिवार यहां से निकल गए. जबकि बड़ी संख्या में मामूली आमदनी वाले परिवार यहां रह गए.
इन परिवारों के युवाओं को अपराध से दूर रखने के लिए जॉज़ यहां के स्कूलों, क्लबों और सामुदायिक केंद्रों में काम करता है.
नादिया बारकियोआ कहती हैं, "इन लोगों को बताना होगा कि सामान्य तरीके से पैसा कमाना आपराधिक तरीके से कमाई करने की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित है. उन्हें यह बताना होगा कि शहरों में उनके लिए अवसर हैं. बच्चे को अच्छी परवरिश देकर अपराध से दूर रखा जा सकता है."
नादिया बताती हैं, "अब 14-15 साल के बच्चे अपराध कर रहे हैं और यह कष्टप्रद है. कम उम्र से ही लोग अपराध कर रहे हैं."
ह्यूगो हेलिनार कोकीन इस्तेमाल करने वाले को संदेश देते हैं, "रॉटरडैम में हर दिन कोकीन की 40,000 लाइनें को लोग सूंघते हैं. आपके द्वारा सूंघने वाली हर पंक्ति में हिंसा, ज़बरन वसूली और मौत का इतिहास है."
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हेलिनार को उम्मीद है कि आने वाले साल 2022 में नया क़ानून लागू होने से कोकीन कलेक्टरों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी. नए क़ानून के प्रस्तावों के मुताबिक बंदरगाह के इलाक़े में अवांछित लोगों को पकड़े जाने पर भारी जुर्माने के अलावा एक साल तक क़ैद की सज़ा का प्रावधान रखा गया है.
हालांकि कई लोग ऐसे भी जिन्हें लगता है कि नए क़ानून से भी हालात नहीं बदलेंगे.
कंटेनर प्रोसेस कंपनी चलाने वाले आंद्रे क्रेमर कहते हैं, "ईमानदारी से कहूं तो मुझे नहीं लगता है कि रॉटरडैम बंदरगाह पर नशीले पदार्थों की तस्करी बंद हो जाएगी. जुर्माना और सज़ा बढ़ाए जाने से बंदरगाह के इलाके में हिंसा बढ़ सकती है."
"जेल जाने के डर से हो सकता है कि कुछ युवा इस अपराध में आने से पहले दोबारा सोचें लेकिन इसमें होने वाली कमाई का आकर्षण उन्हें खींचता रहेगा. कोकीन की तस्करी करने वाले इन युवाओं को मालूम है कि यूरोप में कोकीन बाज़ार के लिए वे बेहद अहम हैं, ऐसे में यहां कोकीन तस्करी का कारोबार निकट भविष्य में थमता नहीं दिख रहा है.''
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