भविष्य में अर्थव्यवस्था की दिशा बताने वाले क्या हैं छह संकेत

अर्थव्यवस्था

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, क्रिस्टीना ओर्गेज़
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

दुनिया की आर्थिक स्थिति के भविष्य को लेकर कुछ संकेत मिल रहे हैं. ये बेहद ख़ास हैं क्योंकि सरकारों, कंपनियों और यहाँ तक कि परिवारों को भी इसका पता चलेगा कि आख़िर भविष्य में क्या होने वाला है.

उदाहरण के लिए- कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के बाद, हाल ही में एक बार फिर शिपिंग उद्योग में आई तेज़ी ने सुधरते हालात की ओर इशारा किया था.

कई महीनों तक बंद रहने के बाद कारोबारियों और उपभोक्ताओं ने एक बार फिर ख़रीदारी शुरू की. इसके लिए उत्पादों को दुनिया के एक छोर से दूसरे तक भेजने की ज़रूरत थी.

महामारी की समस्या अर्थशास्त्रियों के लिए एक स्टडी की तरह थी- रिकवरी बहुत तेज़ थी, पहले से कहीं अधिक मजबूत.

इसका अनुमान ऐसे लगाया जा सकता है कि इसने कई सारे असंतुलन पैदा कर दिए हैं.

जो संकेत मिल रहे हैं वो पारंपरिक जीडीपी के आँकड़ों से अलग हैं. किसी देश में विकास की स्थिति क्या है, बेरोज़गारी कहाँ है या वहाँ के लोगों को कितनी महँगाई से दो चार होना पड़ रहा है, ये सब जीडीपी से ज़ाहिर होता है.

विक्टर एल्वरगोंज़ालेज़ एक स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार कंपनी नेक्सटेप से जुड़े हैं. वे कहते हैं, "अर्थव्यवस्था की स्थिति के आकलन की जो पारंपरिक पद्धति जीडीपी है, वो हमें बीती तिमाही या बीते वर्ष अर्थव्यवस्था कितनी बढ़ी या घटी इसके बारे में बताती है. यानी जो गुज़र चुका है, उसके विषय में संक्षेप में जानकारी देती है."

साथ ही वे कहते हैं, "लेकिन अर्थशास्त्र में यह देखना वाक़ई अहम है कि आगे क्या होने जा रहा है और यह भी कि एक व्यक्ति ख़ुद इसमें कैसे बेहतर कर सकता है. यहीं पर इन आँकड़ों से जो संकेत प्राप्त होते हैं, वो काम आते हैं. ये निवेशकों और उन अर्थशास्त्रियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं, जो आगे की आर्थिक रणनीति बनाने की योजना का हिस्सा हैं.

यहाँ ये ध्यान रखने वाली बात है कि आर्थिक संकेतक बहुतेरे हो सकते हैं.

अर्थव्यवस्था

इमेज स्रोत, Getty Images

हर सेक्टर के अपने इंडेक्स

बतौर उदाहरण, एक संकेतक है जो शॉपिंग सेंटर में जाने वाले लोगों की संख्या की गणना करता है और इससे आने वाले समय में खपत कैसी रहेगी, इसकी एक अवधारणा बनती है.

अधिकतर, इन स्टोर्स के एंट्री पॉइंट पर ऐसे सेंसर लगे होते हैं जो अंदर जाने वाले लोगों की गिनती करते हैं.

एल्वरगोंज़ालेज़ कहते हैं, "ये व्यावसायिक गतिविधियों का अनुमान लगाने का एक बहुत अच्छा संकेतक है. अब जबकि सबकुछ डिज़िटल हो रहा है तो वर्तमान आर्थिक माहौल में चिप्स (खाने वाले नहीं, उपकरणों में इस्तेमाल किए जाने वाले) की मांग कृषि उत्पादों की तुलना में अधिक ध्यान रखने की ज़रूरत है."

हालांकि, सब कुछ मापने योग्य और गिनती करने के लायक है और आँकड़े इस बात को जानने में मदद करते हैं कि कोई सेक्टर किसी दिशा की तरफ़ बढ़ रहा है, हम आपको उन छह बेहद ख़ास संकेतकों के बारे में बता रहे हैं, जिसकी प्रासंगिकता दुनिया के सभी मुल्कों में हैं. और वो ये बता रहे हैं कि अभी क्या स्थिति है.

अर्थव्यवस्था

इमेज स्रोत, Getty Images

कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स

इसे उपभोक्ता विश्वास सूचकांक भी कह सकते हैं. ये समाज के विभिन्न वर्गों के कई लोगों के एक बहुत बड़े सैंपल के आधार पर तैयार किया जाता है, जिसमें देश की अर्थव्यवस्था के वर्तमान और भविष्य को लेकर उनकी धारणा, उनके पारिवारिक की माली हालत और उनके रोज़गार की स्थिति को मिलाकर बनाया जाता है.

ये सर्वे इस तरह से किया जाता है कि उपभोक्ताओं की ख़रीद, बिक्री और किसी वस्तु या सेवा को ख़रीदने को लेकर उनकी आर्थिक स्थिति के पैमाने का डेटा तैयार किया जा सके.

अगर किसी को लगता है कि उनकी जॉब चली जाएगी तो इसका अर्थ ये भी निकाला जा सकता है कि अर्थव्यवस्था को लेकर उनका आत्मविश्वास कमज़ोर है. साथ ही ये इस बात का संकेत भी है कि भविष्य में वो किसी भी नई चीज़ को ख़रीदने से अधिक बचत करने पर ध्यान देंगे.

कुल मिलाकर कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स ये मापता है कि उपभोक्ता अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर आशावादी है या निराशावादी और बड़ी संख्या में लोगों के इन आंकड़ों का अध्ययन कर भविष्य में अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता के खर्च के स्वभाव का आकलन किया जाता है.

इस तरह से जब उपभोक्ता आशावादी होते हैं, तो वे अधिक खर्च करेंगे और अर्थव्यवस्था को गति देंगे, लेकिन अगर वे निराशावादी हैं तो उनके खर्च करने के तरीक़े से अर्थव्यवस्था में सुस्ती आ सकती है.

यह इंडेक्स कितना अहम है इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि उपभोक्ता देश की आर्थिक गतिविधियों के दो-तिहाई के लिए ज़िम्मेदार माने जाते हैं.

तो इस वक़्त दुनिया में चल क्या रहा है?

फिलहाल, जो डेटा मिल रहे हैं वो ये इशारा कर रहे हैं कि वैश्विक स्तर पर उपभोक्ताओं में ख़रीद की भूख है और वे भविष्य को लेकर आशावादी हैं.

निश्चित तौर पर कुछ विश्लेषक ये भी चेतावनी दे रहे हैं कि हाल के दिनों में कोविड-19 के नए वैरिएंट आने से कुछ देशों ने जो एहतियातन क़दम उठाए हैं उससे खपत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

बावजूद इसके कई अन्य कारक दिख रहे हैं जो खपत के दृष्टिकोण से सकारात्मक बताए जा रहे हैं.

ला फिनैन्सिएरे डे एल'इक्किएर में ऐसेट मैनेजमेंट के निदेशक ओलिवियर डी बेरैंगर के मुताबिक, बीते साल पूरी दुनिया में लोगों ने घूमने या पर्यटन पर खर्च नहीं किया, छुट्टियां बिताने कहीं बाहर नहीं गए. इस साल उसके बढ़ने की उम्मीद है. और ब्लैक फ्राइडे जैसे बड़े प्रचार अभियान निकट आ रहे हैं.

एल्युमिनियम रोलर्स

इमेज स्रोत, Getty Images

एक्टिविटी इंडिकेटर

एक्टिविटी इंडिकेटर में चढ़ाव और गिरावट यह दर्शाते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था में तेज़ी है या स्थिति कमज़ोर है.

यह उत्पादन, नए ऑर्डर, रोज़गार की स्थिति और कीमतों आदि की निगरानी के आधार पर यह संकेत देता है कि निजी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में क्या हो रहा है.

इसमें एक सेक्टर की सबसे अधिक प्रतिनिधियों वाली कंपनियों के अधिकारियों से ली गई जानकारियों के आधार पर डेटा तैयार किया जाता है. उनसे पूछा जाता है कि क्या वे पहले से अधिक कच्चा माल ख़रीद रहे हैं या कम, और क्या उन्होंने अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई है या जल्द ही बढ़ाने वाले हैं?

अगर पेंच बनाने वाली कंपनी पहले से अधिक एल्युमिनियम ख़रीद रही है तो इसका मतलब है कि वो उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रही है, और ये वो इस अनुमान पर कर रही है कि उसकी बिक्री बढ़ेगी.

एनालिटिकल फर्म आईएचएस मार्किट के विशेषज्ञों ने बताया, "यूरो ज़ोन के पर्चेंजिंग मैनेजर इंडेक्स (पीएमआई) ही 2008 के अंत में जीडीपी में तेज़ गिरावट के साथ वैश्विक वित्तीय संकट के साथ मंदी के आने के संकेत दिए थे."

तो ये क्या संकेत दे रहे हैं?

विसडम ट्री के मैक्रोइकोनोमिक एनालिस्ट अनीका गुप्ता कहती हैं कि दो बड़े लीड मिल रहे हैं.

पहला ये कि, स्मार्टफ़ोन, कंप्यूटर और घरेलू उपकरणों के लिए जो सबसे ज़रूरी चीज़ चिप्स हैं, हाल के दिनों में उनकी बिक्री संभल गई है.

तो दूसरी चीज़ ये कि ऑटो सेक्टर के निर्माता साल के अंत तक उत्पादन के पटरी पर आने की संभावना जता रहे हैं.

गुप्ता के मुताबिक ये सभी औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति के सुधरने के संकेतक हैं जो कि व्यापक आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं.

साओ पाउलो स्टॉक एक्सचेंज

इमेज स्रोत, Getty Images

स्टॉक मार्केट

वे अच्छे संकेतक हैं क्योंकि जब वे चढ़ते हैं तो ऐसा इसलिए होता है क्योंकि निवेशकों को लगता है कि कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करेंगी और उनके (कंपनियों) के अच्छा करने से सीधा उन्हें लाभ मिलेगा.

इसके विपरीत, जब इन कंपनियों को गिरावट का सामना करना पड़ता है तब ये आने वाले आर्थिक स्थिति की ओर इशारा करती हैं. तब ये बताती हैं कि देश की अर्थव्यवस्था मंदी या सुस्ती या ठहराव की स्थिति की ओर बढ़ रही हैं.

भविष्य की आर्थिक गतिविधियों के एक अच्छे और अहम संकेतक हैं.

अभी मार्केट की स्थिति कैसी है?

विश्लेषक विसडम ट्री के मुताबिक, "2021 की तीसरी तिमाही में कॉर्पोरेट मुनाफे में दिखे सुधार की बदौलत अमेरिका, यूरोप, जापान के स्टॉक मार्केट लगातार नई ऊंचाइयों पर चढ़ रहे हैं."

यूरोप में जिन 92 फ़ीसद कंपनियों ने अब तक अपनी तीसरी तिमाही के प्रदर्शन की जानकारी रिपोर्ट की है, उनमें से 68 फ़ीसद ने अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया है.

अमेरिका में भी ऐसा ही देखा गया, वहां यह आंकड़ा और भी बेहतर है. वहां 93 फ़ीसद कंपनियों ने रिजल्ट प्रकाशित की हैं जिनमें से 81.6 फ़ीसद ने अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया है.

श्रमिक कार्यबल

इमेज स्रोत, Getty Images

रोज़गार

रोज़गार के क्षेत्र में क्या अनुमान है?

विक्टर एल्वरगोंज़ालेज़ कहते हैं, "इस समय महंगाई को लेकर एक विशेष चिंता का विषय ये है कि अमेरिका जैसे देश में एक बेहद असामान्य घटना देखने को मिली है. वहां नौकरियों की आपूर्ति उसकी मांग से ज़्यादा देखी गई."

ये बताते हैं कि श्रमिक कार्यबल की संख्या पहले से कितनी बदल रही है.

इसका मतलब ये है कि बहुत दिनों बाद पहली बार अमेरिकी कंपनियों के लिए श्रमबल ढूंढना मुश्किल हो रहा है. और उन्हें आकर्षित करने के लिए मजदूरी के बढ़ने की संभावना भी है. वहीं श्रमिकों के पक्ष में ये बात भी है कि

वो अधिक आसानी से अपनी जॉब बदलने का जोखिम उठा सकते हैं.

तो ये संकेतक क्या इशारा कर रहा है?

स्विस वित्तीय कंपनी यूबीएस वेल्थ मैनेजमेंट के वैश्विक मुख्य अर्थशास्त्री पॉल डोनावन कहते हैं, "इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि अमेरिकी रोज़गार बाज़ार में सुधार हो रहा है."

अर्थव्यवस्था

इमेज स्रोत, Getty Images

रियल स्टेट बाज़ार

निर्माण की अनुमति और नए घरों की कीमतें और कितनी तेज़ी से घरों की आपूर्ति की जा रही है, ये मुख़्य तौर पर रियल स्टेट बाज़ार की स्थिति के पूर्वानुमानों की ओर इशारा करते हैं.

अगर ये वॉल्यूम अधिक है तो संकेत निर्माण उद्योग के बढ़ने का है, जिसका मतलब अधिक नौकिरयों की संभावनाओं से और फलस्वरूप सकारात्मक आर्थिक विकास की स्थिति से भी है.

और क्या हो रहा है?

एलियांज जीआई में वैश्विक अर्थव्यवस्था विश्लेषक एन-कैटरीन पीटरसन उस क्षेत्र में जहां तेज़ी देखी जा रही है, उसे देखते हुए कहती हैं, "अमेरिकी हाउसिंग मार्केट, उदाहरण के लिए, बहुत अधिक गरम होने के (यानी तेज़ी के) संकेत दिखा रहा है."

हालांकि वे ये भी स्पष्ट करती हैं कि, "इन संकेतों को, पुराने घरों की बिक्री और मकान के किराए जैसे अन्य कारकों का समर्थन भी प्राप्त होना चाहिए. क्योंकि ये अमेरिका में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को प्रभावित कर रहा है."

अर्थव्यवस्था

इमेज स्रोत, Getty Images

ट्रांसपोर्ट सेक्टर

बाल्टिक एक्सचेंज ड्राई इंडेक्स भी एक अहम संकेतकों में से एक है. यह वैश्विक अर्थव्यवस्था का पूर्वानुमान लगाने में सक्षम है क्योंकि यहां कारखानों के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल की आपूर्ति और मांग में उतार-चढ़ाव देखे जा सकते हैं.

यह 23 अलग अलग समुद्री शिपिंग मार्गों के ज़रिए 600 कंपनियों के लिए कोयला, लौह अयस्क, अनाज और कई अन्य वस्तुओं के परिवहन की लागत में होने वाले परिवर्तनों का मूल्यांकन करती है.

इसके सदस्य सीधे शिपिंग एजेंट्स के संवाद करते हैं ताकि उत्पाद को जहाज तक पहुंचाने, और उसकी डिलीवरी की समयावधि के आधार पर किसी शिपिंग मार्ग के लिए कीमतों का आकलन किया जा सके.

ये क्या संकेत दे रहा है?

बाल्टिक एक्सचेंज ड्राई इंडेक्स 7 अक्तूबर को अपने चरम पर था लेकिन उसके बाद से इसमें बहुत तेज़ गिरावट देखी गई है, लेकिन अब यह संकेत दे रहा है कि समुद्र से ट्रांसपोर्ट की स्थिति सामान्य हो रही है.

वीडियो कैप्शन, पेट्रोल के दाम बढ़ने के पीछे किसका हाथ है?

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)