सऊदी अरब के शाही घराने में सत्ता संघर्ष की भीषण कहानी

सलमान

इमेज स्रोत, Getty Images

सऊदी अरब के शाही घराने के अंदर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को पद से हटाने की कोशिशें की जा रही हैं.

राज दरबार के नज़दीकी सूत्रों का कहना है कि सऊदी शाही घराने के अंदर कई प्रभावशाली गुट किसी दूसरे शख़्स को 82 वर्षीय सऊदी बादशाह का वारिस नियुक्त करना चाहते हैं.

लेकिन सऊदी बादशाह मलिक सलमान अपने प्रिय पुत्र को अपदस्थ करने के लिए तैयार नहीं हैं. इसलिए ये लोग उनके रहने तक सब्र से काम लेंगे.

इनमें से एक सूत्र का कहना है कि मलिक सलमान के एकमात्र जीवित सगे भाई राजकुमार अहमद को राज परिवार के सदस्यों, सुरक्षा एजेंसियों और कुछ पश्चिमी देशों का समर्थन हासिल है.

साल 1953 से छह भाइयों ने विश्व की एक मात्र अंतिम और पूर्ण राजशाही वाली व्यवस्था पर शासन किया है.

ये सभी भाई आधुनिक सऊदी अरब या तीसरी सऊदी राजसत्ता के संस्थापक मलिक अब्दुल अज़ीज़ आल-ए सऊद के बेटे रहे हैं.

इन्हीं के शासनकाल में पश्चिमी देशों की कंपनियों ने सऊदी अरब में व्यापक रूप से तेल के उत्पादन की शुरुआत की.

लाइन
लाइन

अमरीका-सऊदी रिश्ते

मलिक अब्दुल अज़ीज़ आल-ए सऊद ने साल 1945 में लाल सागर में एक अमरीकी युद्धपोत के डेक पर तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति फ़्रैंकलिन रूज़वेल्ट से मुलाक़ात की थी.

इसी के साथ सऊदी अरब और अमरीका की दोस्ती का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वो आज भी जारी है.

सऊदी अरब अमरीका को तेल की गारंटी देता है और बदले में अमरीका उसके आंतरिक मामलों में बिना हस्तक्षेप के दुश्मनों से उसकी रक्षा की गारंटी.

किंग अब्दुल अजीज अपने चार बच्चों के साथ

इमेज स्रोत, MONDADORI PORTFOLIO

इमेज कैप्शन, किंग अब्दुल अजीज अपने चार बच्चों के साथ

मलिक अब्दुल अज़ीज़ को 64 बेटे और 55 बेटियां थीं. उनके मरने के बाद इनमें से छह बेटों ने सऊदी अरब पर हुकूमत की.

अब तक हर एक भाई की मौत के बाद बेटों की जगह दूसरा भाई उत्तराधिकारी के रूप में शाही तख़्त पर बैठता आया है.

सऊदी अरब में 'सात सुदेरी' (बादशाह अब्दुल अज़ीज़ की एक बीवी हस्सा सुदेरी की संतान) नाम का एक गुट बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है.

ये सात सगे भाई जो मलिक अब्दुल अज़ीज़ के पुत्र थे राज परिवार के सबसे अधिक प्रभावशाली सदस्य रहे हैं.

ये बाद में छह हो गए थे क्योंकि इनमें से एक तुर्की बिन अब्दुल अज़ीज़ को कुछ पारिवारिक झगड़े के कारण ख़ानदान से हटा दिया गया था फिर साल 2016 में उनकी मौत हो गई.

लाइन
लाइन

सऊदी का 'बैत प्रतिनिधिमंडल'

तुर्की बिन अब्दुल अज़ीज़ ने कहा था कि सऊदी राजपरिवार का हाल ईरान के बादशाह या सद्दाम हुसैन जैसा होगा.

इन छह भाइयों में से फ़हद और सलमान बादशाह बने.

साल 2015 में मलिक अब्दुल्लाह की मौत के बाद उनके भाई सलमान बादशाह बने और परंपरा को तोड़ते हुए अपने छोटे भाई अहमद की जगह पर अपने भाई के बेटे मोहम्मद बिन नईफ़ को क्राउन प्रिंस और अपने 30 वर्षीय प्रिय बेटे मोहम्मद को डिप्टी क्राउन प्रिंस बनाया.

फिर कुछ समय बाद मोहम्मद बिन नईफ़ ने मोहम्मद के लिए वफ़ादारी की क़सम ली और उनके लिए अपने क्राउन प्रिंस का पद छोड़ दिया.

सलमान

इमेज स्रोत, Reuters

इसी तरह मलिक सलमान ने परंपरा के ख़िलाफ़ जाते हुए अपने क्राउन प्रिंस की नियुक्ति के लिए 'बैत प्रतिनिधिमंडल' से कोई परामर्श नहीं किया.

बैत प्रतिनिधिमंडल के पास सऊदी अरब के बादशाह और क्राउन प्रिंस की नियुक्ति का दायित्व रहता है.

जानकार सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने लिखा है कि बैत प्रतिनिधिमंडल के 34 सदस्यों में से एक प्रिंस अहमद, मोहम्मद बिन सलमान को क्राउन प्रिंस बनने के ख़िलाफ़ रहे हैं.

लाइन
लाइन

सत्ता पर हक़ की लड़ाई

साल 2017 में प्रिंस अब्दुल रहमान (सात सुदेरी में से एक) की मौत हो गई. इसके बाद प्रिंस अहमद ही सुदेरी और मलिक अब्दुल अज़ीज़ के एकमात्र जीवित पुत्र हैं.

मौजूदा बादशाह मलिक सलमान की आयु 82 वर्ष है और प्रिंस अहमद 76 साल के हैं.

सऊदी अरब शाही खानदान

इमेज स्रोत, Getty Images

अब मलिक अब्दुल अज़ीज़ की संतानों में से बादशाह मलिक सलमान और प्रिंस अहमद की मौत के बाद सऊदी राज परिवार में हर कोई सत्ता पर अपना अधिकार जताएगा.

लेकिन सत्ता प्रतिष्ठान में सुदेरी गुट के असर को देखते हुए ऐसा लगता है कि इसी परिवार का कोई सदस्य तख्त पर बैठेगा.

साल 2005 में मलिक अब्दुल्ला के बादशाह बनने के बाद से आज तक तमाम क्राउन प्रिंस सुदेरी परिवार से ही रहे हैं और मलिक सलमान की भी यही कोशिश है कि उनके मरने के बाद इसी परिवार के सदस्यों के हाथ में सत्ता रहे.

लाइन
लाइन

जमाल अहमद ख़ाशोज्जी की हत्या

अब जबकि जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का नाम सामने आया है तो प्रिंस अहमद के लिए बादशाह बनने का ये अच्छा अवसर साबित हो सकता है.

सऊदी अरब शाही खानदान

इमेज स्रोत, BANDAR ALGALOUD / SAUDI ROYAL COUNCIL

इमेज कैप्शन, साल 2017 के जून महीने में मलिक सलमान ने मोहम्मदन बिन नईफ़ को क्राउन प्रिंस के पद से हटाकर अपने बेटे मोहम्मद बिन सलमान को ये पद दे दिया.

वो 40 साल तक गृह मंत्रालय में उपमंत्री के पद पर काम कर चुके हैं और उन्हें अमरीका का समर्थन भी हासिल है.

ऐसा कहा जाता है कि सऊदी राज परिवार के सदस्यों की संख्या लगभग 15 है लेकिन तकरीबन दो हजार लोग हैं जिनके पास सत्ता, धन और निर्णय लेने का हक़ है.

मोहम्मद बिन सलमान नौजवानी में ही क्राउन प्रिंस बन गए और सुधार की बातें (जैसे औरतों को गाड़ी चलाने की अनुमति) भी करने लगे लेकिन जब सूचना और सुरक्षा संस्थान का कंट्रोल उनके हाथ में आया तो उन्होंने ख़ानदान के वरिष्ठ सदस्यों को नाराज़ कर दिया.

मलिक अबदुल्लाह के बेटे मतब बिन अब्दुल्लाह

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, मलिक अबदुल्लाह के बेटे मतब बिन अब्दुल्लाह

क्राउन प्रिंस ने प्रभावशाली गृह मंत्री मोहम्मद बिन नाईफ़ को पद से हटा दिया और राष्ट्रीय गार्ड के कमांडर मतब बिन अब्दुल्लाह को वित्तीय घोटाले के बहाने बंदी बना लिया और दोनों पदों को अपने पास रख लिया.

मतब बिन अब्दुल्लाह, मलिक अब्दुल्लाह के बेटे और एक बहुत शक्तिशाली व्यक्ति थे जिन्हें मोहम्मद बिन सलमान ने कुर्सी से हटा दिया.

वे साल 1996 से राष्ट्रीय गार्ड कमांडर बने थे और ऐसा कहा जाता था कि आने वाले समय में वे तख़्त के दावेदार हो सकते हैं.

लाइन
लाइन

सऊदी अरब का राष्ट्रीय गार्ड

सऊदी अरब का राष्ट्रीय गार्ड ढांचे और वफ़ादारी के लिहाज से ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड की तरह है. इनकी कुल संख्या 75 हज़ार और एक लाख के बीच आंकी जाती है.

साल भर पहले मोहम्मद बिन सलमान ने 200 से अधिक सऊदी राजकुमारों, राजनेताओं और कारोबारियों को भ्रष्टाचार से लड़ने के बहाने होटल रिट्ज-कार्लटन में बंदी बना लिया था.

सऊदी अरब नेशनल गार्ड

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, सऊदी अरब नेशनल गार्ड

इनमें से अधिकतर लोग कुछ महीने के बाद आज़ाद हो गए.

सऊदी अटॉर्नी जनरल के कार्यालय के मुताबिक़ इन लोगों से 200 अरब डॉलर से अधिक वसूला गया.

मोहम्मद बिन नईफ़ को गृह मंत्रालय के पद से और मतब बिन अब्दुल्लाह को राष्ट्रीय गार्ड के कमांडर के पद से हटाने और रक्षा मंत्रालय का पद अपने पास रखने से सऊदी अरब में सत्ता की तमाम शक्ति किसी एक व्यक्ति हाथ में केंद्रित हो गई है और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था.

हालांकि बैत प्रतिनिधिमंडल ने मोहम्मद बिन सलमान के क्राउन प्रिंस बनने पर अब अपनी सहमति दे दी है लेकिन मलिक सलमान की मौत के बाद क्राउन प्रिंस को बादशाह बनने के लिए इस मंडल का समर्थन हासिल करना होगा.

लेकिन चूंकि उनके पिता ने इस मंडल को हाशिये पर डाल दिया था और इस मंडल के कुछ सदस्य मोहम्मद बिन सलमान के विरोधी हैं तो ऐसे में क्राउन प्रिंस के लिए उन लोगों को राज़ी कर पाना और बादशाह बनना मुश्किल होगा.

लाइन
लाइन

सऊदी अरब पर अंतरराष्ट्रीय दबाव

सऊदी राज परिवार में ये धारणा है कि मोहम्मद बिन सलमान ने सौ साल पुरानी सऊदी सल्तनत की नींव को कमजोर किया है, राज परिवार को कमज़ोर और अस्थिर किया है.

इन लोगों का ये भी मानना है कि यमन के मोर्चे पर उन्हीं के ग़लत फ़ैसले के कारण सऊदी अरब को नुक़सान उठाना पड़ रहा है.

राज परिवार के इन सदस्यों की राय है कि मोहम्मद बिन सलमान अपने पिता के लिए लाल सागर के किनारे शरमा में दो अरब डॉलर की लागत से जो राजमहल बना रहे हैं, असल में ये एक सोने का पिंजरा है ताकि जितना संभव हो सके वो अपने पिता को रियाद से दूर रख सकें.

मोहम्मद बिन नाईफ़

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, सऊदी अरब के पूर्व गृह मंत्री मोहम्मद बिन नईफ़

ये राजमहल निकटतम शहर तबूक से भी 100 से अधिक किलोमीटर दूर है.

लेकिन इसके बावजूद मलिक सलमान अपने बेटे का समर्थन करते हैं और इतनी मुश्किलों से घिरे होने के बाद भी अपनी नीतियों को उसी तरह जारी रखे हुए हैं.

लाइन
लाइन

सुल्तान का संदेश

ख़ाशोज्जी की हत्या के बाद सऊदी अरब पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और राज परिवार के कुछ सदस्यों की नाराज़गी के बावजूद मलिक सलमान ने 19 नवंबर को सलाहकार समिति की बैठक में अपने सालाना बयान में इस विवाद का कोई ज़िक्र नहीं किया लेकिन अपनी न्यायपालिका की प्रशंसा ज़रूर की.

सऊदी अरब

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, वलीद इब्न तलाल उन प्रभावशाली लोगों में शामिल थे जिन्हें कार्लटन रिट्ज़ होटल में नज़रबंद किया गया था.

सऊदी अरब के बादशाह ने इस बात पर भी जोर दिया कि उनके नौजवान बेटे और उनके उत्तराधिकारी को मानव संसाधन के विकास के लिए नौजवानों को तैयार करने के काम पर ध्यान देना चाहिए.

ऐसा लगता है कि मलिक सलमान ख़ाशोज्जी की हत्या का राज़ फ़ाश होने की क़ीमत चुकाने को तैयार हैं. इसके संकेत इस बात से मिले जब उन्होंने कहा कि वे यमन में जंगबंदी की संयुक्त राष्ट्र की कोशिश का समर्थन करते हैं.

वीडियो कैप्शन, सऊदी अरब में सत्ता संघर्ष का मतलब

ऑडियो टेप और 'सऊदी राजमहल में भूकंप'

जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या के ऑडियो टेप सामने आने से समीकरण बदल सकते हैं और मोहम्मद बिन सलमान को बहुत नुक़सान उठाना पर सकता है. इसका उनके विरोधियों को भरपूर लाभ भी मिल सकता है.

तुर्की के एक अख़बार 'यनी शफ़क़' ने लिखा कि जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या के ऑडियो टेप में 'क़ातिलों की आपसी बातचीत के अलावा क़त्ल के बाद रियाद में किसी से की गई बातचीत भी दर्ज है, जिससे ये साबित होता है कि मोहम्मद बिन सलमान ने क़त्ल का आदेश' दिया था.

जमाल खाशोज्जी

इमेज स्रोत, Getty Images

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी ये बात कह दी कि इस 'भयानक', 'दर्दनाक', और 'कानों को फाड़ने वाले' ऑडियो टेप को वे सुन नहीं सकते हैं. इस मामले में सीआईए की रिपोर्ट भी आई है.

अमरीकी सीनेट के सूचना और सुरक्षा समिति के सदस्य डेमोक्रेटिक सीनेटर रॉन वाइडन ने अपने बयान में अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी से कहा कि वे अपनी जांच के आधार पर अमरीकी जनता को बताएं कि जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या किसने की है.

रेचप तैयप अर्दोआन ने तुर्की की संसद में अपने वक्तव्य के दौरान कहा कि हत्या का आदेश सऊदी प्रशासन के बड़े व्यक्ति के द्वारा दिया गया था लेकिन पूरी बात स्पष्ट नहीं होने तक इस विषय पर छानबीन जारी रहेगी.

ऑडियो टेप के सार्वजनिक होने का नुक़सान इस हद तक हो सकता है कि सऊदी बादशाह को मजबूर होकर अपने प्रिय पुत्र को पद से हटाना पड़े.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)