सऊदी अरब के अवमिया में हिंसा का इल्ज़ाम क़तर पर

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सऊदी अरब के पूर्वी इलाके के शहर अवमिया में जो कुछ चल रहा है, उसे लेकर कौन ज़िम्मेदार है?
इस सवाल पर अरब के अख़बारों और ऑनलाइन न्यूज़ वेबसाइट्स का रुख अलग-अलग है.
मीडिया का एक हलका इसका आरोप क़तर पर लगा रहा है, कुछ इसके लिए क़तर के मीडिया संस्थानों को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं तो कुछ ईरान की भूमिका की तरफ इशारा कर रहे हैं.
ऐसे भी आवाज़ें हैं जो शिया लोगों के प्रति भेदभाव के लिए सऊदी अरब की हुकूमत को दोष दे रही हैं. अवमिया का इलाका शिया बहुल है.
सऊदी अधिकारियों ने एक सिक्योरिटी ऑपरेशन के नाम पर अवमिया में दर्जनों घरों को ढहा दिया जिसके बाद वहां आम लोगों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हो गई.
क़तर फिर निशाने पर
हिंसा में कई लोग मारे गए और कहा जा रहा है कि तकरीबन 20,000 लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर पनाह ले ली है.
सऊदी अख़बार 'अल-यौम' ने अवमिया के हालात के लिए क़तर के मीडिया संस्थानों को ज़िम्मेदार बताया है.
अख़बार का कहना है कि क़तर के मीडिया आउटलेट्स अवमिया के हालात के बारे में झूठ फैला रहे हैं और वहां बगावत को हवा दे रहे हैं.
स्तंभकार इब्राहिम अल-ज़ाहरानी का कहना है, "ईरान के लिए सऊदी अरब के पूर्वी इलाके में क़तर अक्सर ही हालात बिगाड़ने की कोशिश करता रहता है. वे भगोड़ों को पनाह देते हैं. मीडिया का इस्तेमाल एक औज़ार की तरह करते हैं और उन्हें पैसा भी मुहैया कराया जाता है."

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शियाओं के ख़िलाफ़ भेदभाव
मिस्र से ऑपरेट की जाने वाली न्यूज़ वेबसाइट 'अल-बदील' में कॉलमनिस्ट महमूद अब्देल हाकिम ने लिखा है, "सऊदी अरब के पूर्वी इलाके में सल्तनत का सबसे बड़ा तेल का ख़ज़ाना है लेकिन इसके बावजूद वहां के शहरियों को सबसे ज्यादा भेदभाव का शिकार होना पड़ता है."
राजनीतिक कमेंटेटर खलील कोठरानी सऊदी ऑपरेशन की आलोचना करते हुए कहते हैं, "संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग ने पिछले कुछ हफ्तों में अवमिया में हो रही बर्बादी को लेकर कई बार अपील जारी की लेकिन मुल्क की इंटीरियर मिनिस्ट्री ने उसे अनसुना कर दिया."
उनका कहना है, "सऊदी हुकूमत पूर्वी इलाके में रहने वाले लोगों को विदेशी समुदाय की तरह देखती है."
अवमिया की सफाई!
स्तंभकार दीना हिल्मी ने 'अल-अवमिया नरसंहार: जब सऊदी अरब नया सीरिया बन गया' शीर्षक से एक लेख लिखा है. वो लिखती हैं, "अवमिया के इलाके में सऊदी अरब की कार्रवाई का मकसद इलाके में सिक्योरिटी कंट्रोल बढ़ाने की सल्तनत की ख्वाहिश है. सऊदी अधिकारी वहां रहने वाले 30 हज़ार लोगों से डरे हुए हैं और उनमें से ज्यादातर शिया हैं."
हालांकि सऊदी अख़बारों में हुकूमत की कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करने वाले राजनीतिक विश्लेषक भी कई हैं.
क़िनान-अल-ग़ामदी ने सऊदी अरब की सरकार का पक्ष लेते हुए लिखा है, "ये इलाका तस्करी के हथियारों और नशीले पदार्थों और उसके सौदागरों का पनाहगाह था. आखिरकार अवमिया की सफाई कर ली गई. बहादुर सुरक्षा कर्मियों ने पिछले कुछ दिनों में जो कुछ किया हैं, उसे मुद्दतों याद रखा जाएगा."
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