फ़ोन कॉल पर बिगड़ गई सऊदी अरब-क़तर की बात!

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सऊदी अरब के युवराज और क़तर के शासक के बीच एक फ़ोन कॉल के कुछ ही देर बाद सऊदी अरब ने क़तर के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत से इनकार कर दिया.

इससे पहले, दोनों पक्ष बातचीत के ज़रिए मौजूदा संकट सुलझाने के लिए तैयार हुए थे. सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात ने क़तर से 5 जून को कूटनीतिक संबंध खत्म कर लिए हैं.

इन चारों देशों ने आरोप लगाया है कि क़तर आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता है, हालाँकि क़तर इन आरोपों से इनकार करता आया है.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के दोनों पक्षों से अलग-अलग बात करने के बाद शुक्रवार को सऊदी अरब और क़तर के बीच फ़ोन पर बातचीत शुरू हुई थी.

इस संकट के शुरू होने के बाद दोनों देशों के बीच ये पहली औपचारिक बातचीत थी.

दोनों देशों के सरकारी मीडिया ने बताया था कि क़तर के अमीर शेख तमीन बिन हमद अल थानी और सऊदी राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान ने संकट को सुलझाने के लिए बातचीत की थी.

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इमेज कैप्शन, क़तर के अमीर तमीम बिन हमद अल-थानी

किसने क्या कहा?

सऊदी प्रेस एजेंसी ने कहा कि क़तर के अमीर ने इस संकट पर बैठकर बातचीत करने और चारों की मांगों पर चर्चा करने की इच्छा जताई. इस बारे में विस्तृत जानकारी की घोषणा तब की जानी थी यदि सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात के साथ किसी समझौते पर पहुँच जाए.

इसी बीच, क़तर की समाचार एजेंसी ने कहा कि सऊदी राजकुमार ने इस विवादित मामले का हल निकालने के लिए दो राजदूत नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया है जिससे किसी भी देश की संप्रभुता पर असर न हो.

लेकिन कुछ ही देर बाद सऊदी अरब ने क़तर पर बातचीत को लेकर गंभीर नहीं होने का आरोप लगाते हुए आगे किसी भी तरह की बातचीत करने से इनकार कर दिया.

हालाँकि कहा जा रहा है कि मामला प्रोटोकॉल को लेकर बिगड़ा. पर्यवेक्षकों का कहना है कि सऊदी अरब इस बात से नाराज़ था कि क़तर के सरकारी मीडिया ने यह स्पष्ट नहीं किया कि बातचीत की प्रक्रिया दोहा ने शुरू की थी और ये संदेश देने की कोशिश की बातचीत के लिए सऊदी अरब बेताबी दिखा रहा है.

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ट्रंप की पहल पर हुई बात

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सऊदी अरब और क़तर के नेताओं से अलग-अलग बात करने के बाद इन दोनों देशों के नेताओं ने फ़ोन पर बात की है.

व्हाइट हाउस द्वारा जारी किए गए एक बयान में बताया गया है कि, अमरीकी राष्ट्रपति ने खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और ईरान के ख़तरे को कम करने लिए अरब राष्ट्रों की एकता पर ज़ोर दिया है.

सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और यूएई ने क़तर पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं. इन शर्तों में अल-जज़ीरा समाचार चैनल को बंद करना और ईरान के साथ संबंधो को कम करना शामिल है.

इन चार अरब राष्ट्रों ने अल जज़ीरा समाचार चैनल पर चरमपंथी को बढ़ावा देने के आरोप लगाए हैं.

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