दलितों का साथ देने का दिखावा कर रही सरकार

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गांधीनगर में रविवार को एक दलित सम्मेलन हो रहा है. गुजरात में दलितों का ये तीसरा महासम्मेलन है.

दलितों के सम्मेलन और उनकी मागों पर केंद्र और राज्य सरकार का क्या रवैया है. जानिए क्या कहते हैं स्थानीय पत्रकार प्रशांत दयाल इस बारे में.

11 जुलाई के दिन उना में दलितों के साथ जो हुआ उसके बाद गुजरात के दलित काफ़ी नाराज़ है.

दलितों की शिकायत है कि वे मरे हुए जानवर भी उठाते हैं और फिर मरे हुए जानवर उठाने पर गोवंश के नाम पर उन्हीं की पिटाई होती है.

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वे अब ये काम नहीं करना चाहते. उनकी मांग है कि इसके बदले उन्हें वैकल्पिक रोज़गार दिया जाए. इस सम्मलेन में इस मांग को मुख्य मुद्दा बनाया जाएगा.

उनका कहना है कि वे मरे हुए जानवर भी नहीं उठाएंगे और गटर में काम भी नहीं करेंगे. ये राज्य सरकार की ज़िम्मेवारी है कि उन्हें ये दोनों कामों के बदले कोई और काम दिया जाए. उनकी मांग है कि उन्हें पांच एकड़ ज़मीन दी जाए ताकि भूमिहीन दलित अब किसान बन सकें.

राज्य में दलितों की ये तीसरी महासभा है. हाल ही में विजय रूपाणी मुख्यमंत्री बने हैं. देखना है कि सरकार उनकी मांगों को लेकर कितनी गंभीर है.

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गुजरात में अभी भाजपा सरकार है. यहां इससे पहले भी बीते 15 सालों से भाजपा सरकार रही है. इससे पहले कांग्रेस सरकार भी थी. लेकिन सभी सरकारों ने दलितों की अनदेखी की.

ऐसा इसलिए क्योंकि गुजरात में दलितों की संख्या बेहद कम है. गुजरात की आबादी के मुक़ाबले वे सिर्फ़ सात प्रतिशत है.

पहले राज्य सरकार इस मामले में गंभीर नहीं थी, लेकिन अब सरकार को ये लग रहा है कि यदि अभी भी अनदेखी की गई तो इसका प्रभाव अन्य राज्यों में ग़लत हो सकता है या भाजपा की छवि बिगड़ सकती है. इसी कारण सरकार अपनी छवि सुधारने के लिए संवेदनशील होने का दावा और उस दिशा में प्रयास कर रही है.

गुजरात में अगले साल दिसंबर में चुनाव होने वाले हैं.

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ये सभी सरकारों को मालूम है कि 2017 के चुनावों में गुजरात के दलित अधिक नुक़सान नहीं पहुंचा सकते हैं और ये भाजपा सरकार को भी मालूम है. 2012 में यहां थानगढ़ हत्याकांड हुआ था.

पिछले चार साल से दलित मांग कर रहे हैं कि मामले में उन्हें न्याय दिया जाए. चार साल के बाद गुजरात सरकार ने एक एसआईटी का गठन किया है.

भाजपा सरकार को गुजरात की चिंता नहीं है. लेकिन वे नहीं चाहते कि आने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव में उनकी छवि ख़राब हो.

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उत्तर प्रदेश में अगले साल फ़रवरी में चुनाव होने हैं. इस चुनाव में दलित वोट काफ़ी प्रभाव डालेंगे क्योंकि यहां दलितों की अच्छी ख़ासी आबादी है.

इसी वजह से भाजपा सरकार अपनी छवि सुधारना चाहती है, इसलिए अब वह दलितों के साथ होने का दिखावा कर रही है .

(बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह से बातचीत पर आधारित )

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