उना कांड की रहस्यमय गाय कहाँ गई?

गाय

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    • Author, प्रशांत दयाल
    • पदनाम, अहमदाबाद से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

गुजरात में उना में गाय को मारने के आरोप में दलितों की पिटाई के मामले में एक दिलचस्प मोड़ आ गया है.

मामले की जाँच कर रहे सीआईडी के अधिकारी ने बीबीसी को बताया है कि 11 जुलाई को दिन में दलितों की पिटाई की गई थी, जिसका वीडियो वायरल हो गया था, जबकि उसी दिन शाम को उना थाने में एक गाय के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज की गई थी.

मामले की जाँच कर रहे गुजरात सीआईडी के डीएसपी केजी सरडवाने का कहना है कि गाय की गुमशुदगी की रिपोर्ट किस मक़सद से दर्ज की गई इसकी जाँच की जा रही है, गाय के लापता होने की रिपोर्ट नाजाभाई अहीर के नाम से दर्ज की गई थी.

सीआईडी ने जाँच के बाद कहा है कि दलितों ने गाय की हत्या नहीं की थी बल्कि उस गाय को शेर ने मार डाला था जिसकी खाल दलित युवक उतार रहे थे.

गुजरात दलित

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इस मामले में दलितों की ओर से बनाई गई 'फैक्ट फाइडिंग कमेटी' के सदस्य कौशिक परमार का आरोप है कि पुलिस ने गौरक्षकों को बचाने के लिए ये शिकायत दर्ज की थी और वे ऐसा दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि जिस गाय की खाल दलित निकाल रहे थे वह नाजाभाई अहीर की गाय थी जिसे दलितों ने मार डाला था.

यहाँ तक कि पुलिस ने दलित युवकों के ख़िलाफ़ इसी आधार पर एनिमल क्रुएलिटी एक्ट के तहत केस भी दर्ज कर दिया था.

सीआईडी जाँच में ये भी पाया गया है कि उना पुलिस के अधिकारियों को दलितों की बर्बर पिटाई की पूरी जानकारी थी और उन्होंने ऐसा होने दिया, यहाँ तक कि उन्होंने गौरक्षकों को ही ये काम सौंप दिया कि वे दलितों को थाने में ले आएँ.

दलित विरोध प्रदर्शन

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गौरक्षकों ने दलितों को थाने ले जाने के बदले घंटों तक उनकी सरेआम पिटाई की और उसका वीडियो बनाया.

इस मामले के तूल पकड़ने के बाद उना से लेकर संसद तक काफ़ी हंगामा हुआ, यहाँ तक कि गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के पद से हटने के पीछे दलितों के गुस्से को एक कारण के तौर पर देखा गया.

इस मामले में चार पुलिसवालों को निलंबित किया गया है और 35 अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया गया है.

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