‘ककड़ी चुराने के जुर्म में फाँसी की सज़ा दी’

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- Author, समीरात्मज मिश्रा
- पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिंदी के लिए
भारतीय जनता पार्टी के निष्कासित नेता दयाशंकर सिंह का कहना है कि उन्होंने इतनी बड़ी ग़लती नहीं की थी जितनी कि उन्हें सज़ा दी गई है.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि बीएसपी नेता मायावती के लिए उन्होंने जो कहा था, उसमें कुछ भी ग़लत नहीं था और वो आज भी अपनी बात पर क़ायम हैं. उनका कहना था कि ग़लती सिर्फ़ इतनी है कि उनकी ज़ुबान फिसल गई और उन्होने उदाहरण ग़लत दे दिया.
दयाशंकर सिंह ने कहा कि संसद में मायावती के बयान के बाद बीजेपी दबाव में आ गई और उन्हें पद से हटाने, माफ़ी मांगने के बावजूद पार्टी से भी निष्कासित कर दिया. इसके बाद मुझे गिरफ़्तार भी किया गया और जेल भी भेजा गया. बक़ौल दयाशंकर, उन्हें ‘ककड़ी चुराने के जुर्म में फांसी की सज़ा’ दी गई है.

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उनका आरोप है कि बीएसपी नेताओं ने सार्वजनिक रूप से उनके परिवार की महिलाओं और उनकी नाबालिग़ बेटी के ख़िलाफ़ इतनी अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया, ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ पॉक्सो एक्ट भी लगा है, बावजूद इसके बीएसपी कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.
दयाशंकर सिंह कहते हैं कि यदि सरकार इन लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं करती है तो वो न सिर्फ़ कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगे बल्कि इंसाफ़ के लिए जनता के बीच भी जाएंगे.
मायावती के ख़िलाफ़ अभद्र भाषा को लेकर दयाशंकर सिंह को बीजेपी ने यूपी के उपाध्यक्ष पद से हटा दिया था और उसके तुरंत बाद उन्हें पार्टी से भी निष्कासित कर दिया था. दयाशंकर सिंह का कहना है कि बावजूद इसके वो पार्टी को अपनी मां समझते हैं और उसके प्रति उनकी निष्ठा आज भी वैसी ही है.
हालांकि पार्टी नेताओं के सहयोग के बारे में उन्होंने साफ़ साफ़ नहीं बताया लेकिन कार्यकर्ताओं के सहयोग और समर्थन को लेकर वो काफ़ी उत्साहित दिखे.
दयाशंकर सिंह के ख़िलाफ़ एससी/एसटी एक्ट के तहत बीएसपी नेताओं ने मुक़दमा दर्ज कराया था और उनकी गिरफ़्तारी के लिए ग़ैर ज़मानती वारंट भी जारी किया गया था. दयाशंकर सिंह को 29 जुलाई को बिहार के बक्सर से गिरफ़्तार किया गया था और छह अगस्त को उन्हें ज़मानत मिल गई.

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वहीं दयाशंकर सिंह की माँ और उनकी पत्नी स्वाती सिंह ने भी नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी समेत कई बीएसपी नेताओं के ख़िलाफ़ पॉक्सो एक्ट के तहत लखनऊ में मामला दर्ज कराया है. हालांकि अभी इस मामले में किसी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
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