जब जब दलित आए नेताओं के निशाने पर

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- Author, मानसी दाश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती के ख़िलाफ़ बीजेपी के नेता दयाशंकर सिंह के अपशब्द ऐसा पहला उदाहरण नहीं है जब किसी दलित का अगड़ी जाति के किसी प्रभावशाली व्यक्ति ने अपमान किया हो.
भारतीय जनता पार्टी के नेता दयाशंकर सिंह ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती के बारे में कहा था 'मायावती जी एक <link type="page"><caption> वेश्या से भी बदतर</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2016/07/160720_objectionable_comment_on_mayawati_bjp_pp" platform="highweb"/></link> चरित्र' की हो गई हैं.
हालाँकि इस पर विवाद छिड़ने के बाद उन्होंने अपने इस बयान के लिए माफ़ी मांगी लेकिन भाजपा ने उन्हें तत्काल प्रभाव से पार्टी के सभी <link type="page"><caption> पदों से हटा</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2016/07/160720_mayawati_bjp_up_sjm" platform="highweb"/></link> दिया और पार्टी से भी <link type="page"><caption> निष्कासित</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2016/07/160721_dayashankar_mayawati_comment_iv_sh" platform="highweb"/></link> कर दिया.

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इसी साल अप्रैल में उत्तरप्रदेश की भाजपा महिला मोर्चा की राज्य प्रभारी मधु मिश्रा ने कहा था, "आज तुम्हारे सिर पर बैठकर संविधान के सहारे जो लोग राज कर रहे हैं, याद करो वो कभी तुम्हारे जूते साफ़ किया करते थे."
उन्होंने कथित तौर पर दलितों के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने की बात कही थी.
इस टिप्पणी के लिए मधु मिश्रा को बीजेपी से छह साल के लिए निकाल दिया गया. बाद में उन्होंने कहा कि वे पढ़ी लिखी हैं, ऐसा नहीं कह सकतीं और उनके भाषण के ऑडियो के साथ छेड़खानी की गई है.

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इसी तरह महाराष्ट्र के डोंबिवली से विधायक रविंद्र चव्हाण ने ठाणे में स्मार्ट सिटी कार्यक्रम के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में दलितों की तुलना सूअरों से की थी.
उन्होंने कहा था कि जिस तरह अब्राहम लिंकन ने नाली से सूअर को निकाला और उसे साफ किया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस भी दलितों के उत्थान के लिए कई काम कर रहे हैं.
इसका वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस ने उनसे माफ़ी की मांग की. इस पर रविंद्र चव्हाण ने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है.

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केंद्रीय राज्य मंत्री वीके सिंह भी एक बार दलितों की तुलना <link type="page"><caption> कुत्तों के साथ</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2015/10/151022_vk_singh_contro_sh" platform="highweb"/></link> करके विवादों में फंस चुके हैं.
पिछले साल अक्तूबर में हरियाणा के फरीदाबाद में दो दलित बच्चों की हत्या के मामले में केंद्र का बचाव करते हुए कहा था, “अगर कोई किसी कुत्ते पर पत्थर फेंकता है तो आप इसके लिए सरकार को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकते.”
इस बयान पर आम आदमी पार्टी ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम के तहत उनकी गिरफ्तारी की मांग की.
बाद में <link type="page"><caption> वीके सिं</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2015/10/151023_politics_on_vk_singh_statement_dil" platform="highweb"/></link>ह ने कहा कि उनके बयान का मकसद फरीदाबाद घटना के साथ तुलना करना नहीं था और हर काम के लिए केंद्र सरकार को उत्तदायी नहीं ठहराया जा सकता.

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दलितों के ख़िलाफ़ बयानों की बात हो तो पूर्व शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी का संसद में दिया ‘मेरी जाति बताओ’ वाला बयान भी भूला नहीं जा सकता.
हैदराबाद यूनिवर्सिटी के पीएचडी स्कॉलर <link type="page"><caption> रोहित वेमुला</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2016/01/160123_rohit_vemula_caste_sdp" platform="highweb"/></link> की मौत के बाद उनके दलित होने या न होने पर ही सवाल खड़े किए गए. स्मृति ईरानी पर जातिगत भावना से प्रेरित होकर काम करने के आरोप लगाए गए.
रोहित की मां ने इस पर सफाई दी और बताया कि <link type="page"><caption> वे दलित ही</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2016/02/160224_smriti_irani_loksabha_sr" platform="highweb"/></link> हैं, जिसके बाद स्मृति ईरानी ने कहा कि उन्होंने जातिगत भेदभाव के नज़रिए से कोई कार्रवाई नहीं की है.

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पतंजलि के संस्थापक रामदेव ने वर्ष 2014 में एक कार्यक्रम में कहा था, ''राहुल गांधी दलितों के घर में <link type="page"><caption> हनीमून</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2014/04/140426_ramdev_rahul_gandhi_aa" platform="highweb"/></link> और पिकनिक मनाने जाते हैं.''
बाद में उन्होंने अपने इस बयान को वापस लिया और कहा कि उनके बयान को ग़लत तरीके से पेश किया गया है और राहुल गांधी का अपमान करने का उनका इरादा नहीं था.
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