क्या ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्ज़े की कोशिश का फ़ायदा चीन और रूस को होगा?

पुतिन, ट्रंप और शी जिनपिंग

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    • Author, पाउला एडमो इडोएटा
    • पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि रूस और चीन को ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने से रोकने के लिए, उनका डेनमार्क के इस स्वायत्त इलाक़े का अधिग्रहण करना ज़रूरी है.

डोनाल्ड ट्रंप ने इस महीने कहा है, "हमें ग्रीनलैंड की रक्षा करनी होगी. अगर हम ऐसा नहीं करेंगे, तो चीन या रूस करेंगे. मैं उन्हें ग्रीनलैंड में पड़ोसी के रूप में नहीं चाहता, ऐसा कभी नहीं होगा."

कई पर्यवेक्षकों का मानना है कि ट्रंप की ग्रीनलैंड संबंधी महत्वाकांक्षाओं (और उन्हें पूरा करने के लिए बल प्रयोग और टैरिफ की धमकियों) का व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग स्वागत कर सकते हैं.

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यूरोपियन पॉलिसी सेंटर से जुड़ीं विश्लेषक मारिया मार्टिसियूट कहती हैं, "मुझे लगता है कि रूस और चीन को अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा होगा."

उन्होंने कहा, "यूरोपीय देशों के साथ-साथ नेटो गठबंधन का भी अपने सबसे शक्तिशाली सहयोगी से खतरे में दिखना उन (चीन और रूस) के हित में है. यह रूस और चीन के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि इससे यूक्रेन में रूस की गतिविधियों और ताइवान को लेकर चीन की महत्वाकांक्षाओं को वैधता मिल सकती है."

यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, "चीन और रूस को तो खूब मजा आ रहा होगा. सहयोगी देशों के बीच फूट से तो उन्हें ही फ़ायदा होता है."

लेकिन वास्तविकता थोड़ी अधिक जटिल हो सकती है. बीबीसी के विशेषज्ञ टोनी हान इस बात का विश्लेषण करते हैं कि रूस और चीन वास्तव में ग्रीनलैंड को लेकर यूरोप के साथ ट्रंप के विवाद को किस नजरिए से देखते हैं.

रूस की प्रतिक्रिया क्या रही है?

सर्गेई गोरियाश्को, बीबीसी रूसी सेवा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

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डोनाल्ड ट्रंप की हाल ही में ग्रीनलैंड को हासिल करने की दिलचस्पी एक असाधारण कोशिश है. ये एक ऐसी बयानबाजी है जो लहजे और तर्क दोनों में, व्लादिमीर पुतिन के क्राइमिया के विलय के औचित्य की याद दिलाती है.

ट्रंप ग्रीनलैंड को एक ऐसे तोहफ़े के रूप में पेश करते हैं जिसे कभी अमेरिका ने डेनमार्क को दिया गया था. ये सोवियत-युग की उस कहानी की याद दिलाता है जिसमें क्राइमिया को यूक्रेन को "उपहार" के रूप में दिया गया था. उनका यह आग्रह कि अमेरिका इसे "किसी न किसी तरह से वापस ले लेगा" पुतिन के यूक्रेन के प्रति लहजे को दर्शाता है.

इस मसले पर फ़िलहाल मॉस्को ने संयमित प्रतिक्रिया दी है. लेकिन पुतिन ने चुटकी लेते हुए कहा है कि ट्रंप के पास ग्रीनलैंड खरीदने के लिए पैसा है. उन्होंने इस मुद्दे की तुलना एक बोर्ड गेम से की है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस मसले का "रूस से कोई लेना-देना नहीं है."

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिकी सुरक्षा के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि रूस के लिए क्राइमिया है, लेकिन उन्होंने ट्रंप के दावे का समर्थन करने से परहेज किया है.

दरअसल, ट्रंप को रूस की ओर से कोई स्पष्ट समर्थन नहीं मिला है, और यह चुप्पी बहुत कुछ कहती है. ट्रंप के चापलूसी के प्रति लगाव को देखते हुए, अगर रूस उनकी तारीफ़ करे तो ये उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

तो फिर क्रेमलिन की प्रतिक्रिया इतनी संयमित क्यों है, जबकि पश्चिमी सहयोगियों के बीच तनाव यूक्रेन से ध्यान हटाकर रूसी हितों की पूर्ति कर सकता है?

यह मुद्दा केवल ट्रंप द्वारा मॉस्को के ईरान और वेनेज़ुएला जैसे सहयोगियों पर किए गए हमलों में ही निहित नहीं है, न ही केवल ग्रीनलैंड पर अमेरिकी दावों को उचित ठहराने के लिए रूस को एक खतरे के रूप में पेश करने पर उनकी नाराजगी में है.

कार्नेगी 'रशिया यूरेशिया सेंटर' के विश्लेषक अलेक्जेंडर बाउनाव का कहना है कि ट्रंप की अनिश्चितता मॉस्को को खुश करने से कहीं ज्यादा परेशान कर सकती है. अमेरिकी राष्ट्रपति की "विनाशकारी प्रवृत्ति" से रूस में घबराहट है.

अपने रूसी समकक्ष की तरह, ट्रंप भी स्थापित विश्व व्यवस्था पर प्रहार कर रहे हैं. इस व्यवस्था से रूस को भी नफ़रत है लेकिन अगर यह व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो जाती है, तो रूस के पास विरोध करने के लिए क्या बचेगा, और वह अपनी महत्वाकांक्षाओं को किस आधार पर उचित ठहराएगा?

फिलहाल, रूस बड़ी सतर्कता से सारे घटनाक्रम पर नज़र रख रहा है.

चीन में इस पर क्या प्रतिक्रिया रही है?

टोनी हान, बीबीसी ग्लोबल चाइना यूनिट

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को हासिल करने की महत्वाकांक्षा पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी अधिकारियों ने अमेरिका से संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन करने का आग्रह किया है. इस चार्टर में देशों की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान शामिल है.

चीनी मीडिया आउटलेट्स ने यूरोप के सामने मौजूद रणनीतिक दुविधा को लेकर अपनी राय स्पष्ट रूप से व्यक्त की है.

चीन के सरकारी प्रसारक सीजीटीएन ने ग्रीनलैंड पर 'कब्ज़ा करने की अमेरिकी धमकियों को नेटो के एक सदस्य देश के प्रति अमेरिका द्वारा किया गया घोर विश्वासघात और गठबंधन का लगभग विघटन' बताया है.

यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के फेलो जोस-इग्नासियो टोरेब्लांका ने बीबीसी की ग्लोबल चाइना यूनिट को बताया, "अटलांटिक गठबंधन का टूटना या कमजोर होना चीन के लिए अच्छी खबर है."

उन्होंने बताया, "यूरोपीय देश जितना ज़्यादा अमेरिका से भिड़ेंगे, चीन के रणनीतिक सहयोगी पुतिन के लिए अस्तित्व बनाए रखना उतना ही आसान हो जाएगा. और यह तय है कि यूरोपीय देशों को रूस के ख़िलाफ़ अकेले ही अपना बचाव करना होगा. इस स्थिति में ये भी हो सकता है कि यूरोपीय देश प्रशांत क्षेत्र में भी अमेरिका का साथ देने से कतराएं."

इस बीच, ग्रीनलैंड पर अमेरिकी मंसूबों को लेकर चीनी विश्लेषकों में चीन की आर्कटिक गतिविधियों को खतरे के रूप में दिखाने के अमेरिकी प्रयासों की कड़ी निंदा की गई है.

अपनी "पोलर सिल्क रोड" पहल के तहत, चीन आर्कटिक से किए जाने वाले वैज्ञानिक, आर्थिक और रणनीतिक अवसरों की खोज कर रहा है.

अक्तूबर 2025 में, चीन से यूरोप तक एक नए आर्कटिक शिपिंग मार्ग के माध्यम से यात्रा करने वाला पहला जहाज ब्रिटेन के फेलिक्सस्टोव बंदरगाह पर पहुंचा था.

ग्रीनलैंड में चीनी कंपनियों की दिलचस्पी रही है. लेकिन हार्वर्ड के बेलफर सेंटर फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल अफेयर्स के अनुसार, ये कंपनियां द्वीप पर पैर जमाने में काफी हद तक असफल रही हैं.

2018 में, चीन की एक सरकारी कंपनी ने ग्रीनलैंड के हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने की कोशिश की थी. लेकिन अमेरिका की चिंता के बाद, डेनमार्क की सरकार ने हस्तक्षेप किया और चीनी कंपनी ने अपनी बोली वापस ले ली.

ग्रीनलैंड की एक और महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति है इसकी खनिज संपदा.

दुनिया की दिलचस्पी मुख्य रूप से क्वानफजेल्ड और तानब्रीज नामक दो स्थानों पर केंद्रित है. यहाँ रेयर अर्थ मिनरल्स के भंडार मौजूद हैं.

रेयर अर्थ मिनरल्स का इस्तेमाल लाउडस्पीकर और स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों और विमानों तक में किया जाता है.

चीन की कंपनियां रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन और उनकी प्रोसेसिंग में पहले से ही सबसे आगे हैं. ग्रीनलैंड के भंडारों में हिस्सेदारी उस स्थिति को और मजबूत कर सकती है.

चीनी कंपनियों ने ग्रीनलैंड के खनिज भंडारों में हिस्सेदारी हासिल करने के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन हवाई अड्डे की विकास परियोजनाओं की तरह, ये भी सियासी अड़चनों में फंस गए हैं.

चीन की शेनघे रिसोर्सेज ने क्वानफजेल्ड परियोजना में दूसरी सबसे बड़ी हिस्सेदारी हासिल की थी. लेकिन ग्रीनलैंड ने यूरेनियम के खनन पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून बना दिया है. इसके बाद कंपनी ने अपना उत्पादन बंद कर दिया है.

इस बीच, तानब्रीज को न्यूयॉर्क स्थित क्रिटिकल मेटल्स कॉर्प ने अधिग्रहित कर लिया है. ऐसी खबरें हैं कि अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले मालिक पर दबाव डाला था कि वह इस कंपनी को किसी चीनी फर्म को न बेचे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.