दलितों की पिटाई पुलिस की ग़लती से हुई थी

दलितों की इस पिटाई के विरोध में कई जगह प्रदर्शन हुए हैं

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    • Author, प्रशांत दयाल
    • पदनाम, अहमदाबाद से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

गुजरात में दलितों की पिटाई के मामले में नई बातें सामने आ रही हैं.

गुजरात पुलिस का कहना है कि 11 जुलाई को सोमनाथ गीर ज़िले के ऊना में चमड़ा उद्योग से जुड़े चार दलितों को पुलिस ने ही कथित गौरक्षकों को सौंप दिया था.

ज़िला मुख्यालय वेरावल के डिप्टी एसपी केएन पटेल ने बीबीसी से बात करते हुए इस बात की पुष्टि की है.

उन्होंने बताया कि जब पुलिस को दलितों की पिटाई की ख़बर मिली तो घटनास्थल पर पीसीआर वैन पहुंची लेकिन वैन में अस्टिटेंट सब इंस्पेक्टर ने दलितों को थाने ले जाने का काम गौरक्षकों को ही सौंप दिया. पुलिस ने उन्हें खुद थाने नहीं ले गई.

लेकिन पटेल कहते हैं कि गौरक्षक दलितों को थाने नहीं ले गए बल्कि उन्हें गांव में घुमाकर तीन घंटे तक पीटते रहे.

वो कहते हैं, “अगर ऊना की पुलिस समय पर कार्रवाई करती तो ये पूरा मामला इतना आगे नहीं बढ़ता.”

मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल इस मामले की जांच के आदेश दे चुकी हैं

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उन्होंने बताया कि इस मामले में चार पुलिसकर्मी निलंबित किए गए हैं.

पटेल का कहना है कि दलितों की तीन घंटे तक पिटाई होने के बाद भी स्थानीय पुलिस हरकत में नहीं आई.

उन्होंने कहा, “जब दोपहर के 1.25 बजे गांधीनगर स्टेट कंट्रोल रूम ने वेरावल पुलिस कंट्रोल को जानकारी दी कि ऊना में दलितों की पिटाई हो रही है तब पुलिस हरकत में आई.”

लेकिन इसके बाद भी गौरक्षकों के ख़िलाफ़ कार्वराई करने के बदले पुलिस ने दलितों को पशु अत्याचार विरोधी क़ानून के तहत गिरफ़्तार कर लिया.

जब इस घटना का वीडियो वायरल होने लगा तो ऊना पुलिस ने गौरक्षकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू की.

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