पटना: हॉस्टल में छात्रा की मौत, अब तक क्या क्या पता है?

पटना के एक हॉस्टल में छात्रा की मौत के विरोध में प्रदर्शन
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    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना से

रविवार को पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल के बाहर भीड़ लगी थी. ये भीड़ छात्राओं और अभिभावकों की थी जिनमें से ज्यादातर ने मास्क लगाया हुआ था.

उनमें से एक छात्रा बीबीसी से कहती हैं, "अब यहां आते डर लगता है. जिस लड़की की मौत हुई, उसका चेहरा सामने आता है. हम लोग तो अपना सामान लेने आए हैं ताकि दो फ़रवरी से शुरू होने वाली इंटर की परीक्षा के लिए तैयार किए अपने नोट्स और किताबें यहां से ले जाएं. हमारी परीक्षा होनी है लेकिन पुलिस कहती है कि हॉस्टल सील हो गया."

छात्रा के पास खड़े एक अभिभावक गुस्से में कहते हैं, " अब हमको इस हॉस्टल में बच्ची को रखना ही नहीं है. यहां इतना घिनौना काम हुआ है कि सुनकर मन सिहर जाता है. बच्ची घर में रह ले वो ठीक है, उसकी जान और इज्ज़त तो बची रहेगी."

पटना का ये गर्ल्स हॉस्टल बीते कई दिनों से ख़बरों में हैं. इस हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा की मौत 11 जनवरी को हो गई थी.

छात्रा के परिजनों का आरोप है कि उनकी बच्ची के साथ बलात्कार हुआ है. पटना पुलिस ने पहले बलात्कार की बात से इनकार करते हुए इसे आत्महत्या का मामला बताया था. लेकिन बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई कि 'यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता'.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद से ही ये मामला सुर्खियों में है. इस मामले ने हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाली छात्राओं की सुरक्षा के साथ-साथ पुलिस के रवैये पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)

क्या है पूरा मामला?

घटना के बाद हॉस्टल को सील कर दिया गया है
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बिहार के जहानाबाद की 18 वर्षीय रश्मि कुमारी (बदला हुआ नाम) पटना के इस गर्ल्स हॉस्टल में रहकर बीते दो सालों से नीट की तैयारी कर रही थीं.

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जहानाबाद, राजधानी पटना से महज़ 50 किलोमीटर दूर है.

रश्मि ने साल 2024 में नीट क्वालीफाई कर लिया था लेकिन वो एक बार और चांस लेना चाहती थीं ताकि अपनी रैंक इंप्रूव कर सकें.

उनके मामा ने बीबीसी से कहा, "बच्ची बहुत खुशमिज़ाज थी. हम लोगों ने कल्पना भी नहीं की थी कि इस तरह की कोई घटना हो जाएगी. मेरी बच्ची 5 जनवरी की दोपहर को हॉस्टल में पहुंच गई थी. वो नए साल में घर आई थी. रात 9 बजे के आसपास हम लोगों की उससे बात हुई और हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों से साढ़े दस बजे तक. बाद में 6 तारीख़ को हमें हॉस्टल से बाहर के एक शख़्स का फोन आया कि हमारी बच्ची बेहोश मिली है. उसे डॉक्टर सहजानंद के यहां लेकर जा रहे हैं. बाद में हॉस्टल की वार्डन ने फ़ोन किया कि बच्ची क्रिटिकल है."

डॉक्टर सहजानंद सिंह जिनके पास पहली बार इलाज के लिए छात्रा को लाया गया था, उन्होंने स्थानीय मीडिया को बताया, " 6 तारीख़ की दोपहर की बात है. मरीज़ बेहोश थी. हमारे यहां आईसीयू की सुविधा नहीं है. उसको देखते ही मैंने कहा कि इनको आईसीयू में ले जाइए. और हमने रेफ़र कर दिया. उनके साथ दो लोग थे एक पुरुष, एक महिला. उन लोगों ने कहा कि मरीज के गार्जियन आ रहे हैं, वो ले जाएंगे. तब तक उसको पानी चढ़ता रहा."

जिसके बाद रश्मि को पटना के ही प्रभात मेमोरियल हीरामती हॉस्पिटल ले जाया गया. छात्रा के मामा बताते हैं, "7 जनवरी को हम लोग बच्ची के हॉस्टल में उसका कमरा देखने गए लेकिन वहां पोछा लगाकर सब कुछ साफ सुथरा कर दिया था. इस बीच 8 तारीख़ को बच्ची शाम 6 बजे से 10 बजे तक होश में आई जिसमें उसने इशारे से बताया कि उसके साथ गलत हुआ है. हम लोगों को अस्पताल वालों ने बच्ची का कोई भी बयान मोबाइल से रिकार्ड नहीं करने दिया, उलटे हमारे साथ धक्का-मुक्की की गई. लेकिन प्रभात मेमोरियल के ही एक डॉक्टर ने हम लोगों से कहा कि आपकी बच्ची के साथ गलत हुआ है. जिसके बाद हम लोगों ने 9 जनवरी को एफ़आईआर दर्ज़ कराई."

छात्रा के पिता की तरफ़ से दर्ज़ एफ़आईआर में लिखा है, "मुझे शक है कि बेटी के साथ गलत शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किया गया है या मारपीट की गई है. उसके शरीर और सिर पर चोट है."

तीन अस्पतालों में चला इलाज

लड़की को इलाज के लिए प्रभात मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया
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इस पूरे मामले में बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने सेंट्रल रेंज पटना के पुलिस महानिरीक्षक जितेंद्र राणा के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित कर दी है.

घटना 6 जनवरी की लेकिन एफ़आईआर दर्ज़ हुई 9 जनवरी को.

प्रभात मेमोरियल अस्पताल में इलाज से असंतुष्ट परिवार ने छात्रा को 10 जनवरी को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन 11 जनवरी की दोपहर छात्रा की मौत हो गई.

पटना पुलिस ने इस संबंध में 13 जनवरी को एक प्रेस रिलीज़ जारी कर कहा, " स्त्री रोग चिकित्सक की जांच में यौन हिंसा की पुष्टि नहीं हुई है. 8 जनवरी को छात्रा के यूरीन में नींद की गोलियों का डोज़ पाया गया और छात्रा के मोबाइल की सर्च हिस्ट्री में 24 दिसंबर को सुसाइड और 5 जनवरी को नींद की दवा के संबंध में सर्च किया गया था."

लेकिन बाद में पटना मेडिकल कॉलेज में हुए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आई जिसके मुताबिक, "यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता और छात्रा के शरीर पर जगह-जगह जख़्म थे."

इसके बाद गर्ल्स हॉस्टल जिस बिल्डिंग में चलता है उसके मालिक को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है.

छात्रा पहली बार 6 जनवरी को दो अस्पतालों सहज सर्जरी और प्रभात मेमोरियल में भर्ती हुई लेकिन क्या स्थानीय थाने को जानकारी दी गई? इसका जवाब नहीं मिल पाया है.

जिस इलाके में प्रभात अस्पताल पड़ता है, उसके थाना अध्यक्ष जनमेजय कुमार ने बीबीसी से कहा, " इस संदर्भ में कोई जानकारी मीडिया को नहीं दी जा सकती."

वहीं प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के प्रबंधन ने कहा है, "एसआईटी ही अब सारे मामले पर जवाब देगी."

डॉक्टर सहजानंद जिनके क्लिनिक सहज सर्जरी में सबसे पहले छात्रा को ले जाया गया था, वहां जब हमने संपर्क किया तो कहा गया, "डॉक्टर सहजानंद ज़रूरी काम से गांव चले गए हैं."

पटना में लगातार बढ़ते हॉस्टल

घटना के विरोध में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन किया
इमेज कैप्शन, घटना के विरोध में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने पटना में विरोध प्रदर्शन किया

बीते डेढ़ दशक में पटना में हॉस्टल्स की संख्या में बहुत इज़ाफ़ा हुआ है. देश की कई नामचीन कोचिंग संस्थानों की ब्रांच पटना में खुलने के बाद छात्र छात्राएं अपने सपनों को पूरा करने के लिए यहां आने लगे. 2010 से पहले यहां पर स्थानीय लोगों के कोचिंग संस्थान ही ज्यादा चलते थे.

इसके बाद कई इलाके एजुकेशनल और हॉस्टल हब के तौर पर विकसित हुए.

क्या पटना में तेजी से पनप रहे इन प्राइवेट हॉस्टल्स के लिए कोई रेग्युलेटरी अथॉरिटी है?

बीबीसी ने ये सवाल पटना जिलाधिकारी त्यागराजन एस एम से किया, लेकिन उन्होंने हमसे बाद में फ़ोन करने को कहा.

जिलाधिकारी से दोबारा संपर्क नहीं हो पाया और उन्होंने व्हाट्सएप के ज़रिए पूछे सवालों के जवाब भी इस रिपोर्टो के लिखे जाने तक नहीं दिए हैं.

लेकिन पटना के हॉस्टल कैसे संचालित होते हैं, इस पर बीबीसी ने कई हॉस्टल संचालकों से बात की.

हॉस्टल संचालकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें हॉस्टल शुरू करने से पहले कहीं पंजीकरण नहीं कराना पड़ा और ना ही उन्हें प्राइवेट हॉस्टल्स के लिए बनी किसी रेग्युलेटरी बॉडी के बारे में कोई जानकारी है.

हॉस्टल की कैटेगरी

पटना में हॉस्टल तीन कैटेगरी के हैं.

पहला जो आर्थिक तौर पर कमजोर परिवारों से आने वाले स्टूडेंटस के लिए हैं जिनका खान- पान, कमरा आदि सुविधाएं देकर किराया चार से आठ हजार प्रति माह होता है.

उसके बाद के हॉस्टल मिडिल क्लास परिवार से आने वाले स्टूडेंटट के लिए होते है जो हर माह 9 से 13 हज़ार रुपए तक का किराया दे सकते हैं.

तीसरी कैटेगरी समृध्द परिवारों की होती है जिसमें किराया ज्यादा होता है.

पटना में हॉस्टल खोलने के इच्छुक लोग किराए पर अपार्टमेंट या लीज़ पर घर लेते हैं.

अपार्टमेंट में खाना बनाने से लेकर सुरक्षा तक की जिम्मेदारी हॉस्टल चलाने वाला परिवार ही संभालता है. वहीं जो ज्यादा प्रोफेशनली हॉस्टल चलाना चाहते हैं वो बाकायदा वार्डन, गार्ड, कुक वगैरह रखते हैं.

साथ ही सुरक्षा वगैरह को ध्यान में रखते हुए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाते हैं.

कई हॉस्टल संचालक खुद से पहल कर थाने में ये जानकारी देते हैं कि वो हॉस्टल चला रहे हैं और उनके पास कितने स्टूडेंट्स रहते हैं. लेकिन ऐसे हॉस्टल संचालकों की तादाद बहुत कम है.

वहीं स्टूडेंट्स के साथ साथ अभिभावक भी सुरक्षा और खान पान के मसले पर चिंतित रहते हैं.

अरवल के एक अभिभावक सुरेंद्र शर्मा बीबीसी से कहते हैं, "बच्ची हमेशा घटिया खाने की शिकायत करती है. पहले ये तसल्ली थी कि बच्ची हॉस्टल की चारदीवारी में सेफ है लेकिन अब तो हम दहल गए हैं."

वहीं पटना में रहकर इंजीनियरिंग की तैयारी कर रही एक छात्रा कहती हैं, " शुरू के दिनों में हॉस्टल में सब ठीक रहता है लेकिन बाद में खाने से लेकर साफ सफाई सब गड़बड़ा जाते हैं. कई बार हॉस्टल लेते वक्त तो बहुत कम मेल मेंबर दिखाई देते हैं लेकिन बाद में वो ज्यादा दिखने लगते हैं. हमारी मजबूरी है कि हमें पढ़ना है और मम्मी पापा हमें दिल्ली भेजना अफोर्ड नहीं कर सकते."

सम्राट चौधरी

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पटना की नागेश्वर कॉलोनी में बड़ी संख्या में गर्ल्स हॉस्टल हैं.

यहां पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ की अध्यक्ष मैथिली मृणालिनी भी रहती हैं.

मैथिली बीबीसी से कहती हैं, "सुरक्षा, स्वास्थ्य और खानपान तीन मुख्य चिंताएं है. मैं जहां रहती हूं वहां एक बार नंगे तार से एक लड़की को बिजली का झटका लगा था. अगर आप बीमार पड़ जाएं तो कभी हॉस्टल मालिक आपको डॉक्टर तक पहुंचाने का इंतज़ाम कर देगा वरना आपको खुद जाना होगा. खाने-पीने की क्वालिटी का कोई चेक नहीं होता. कमरे इतने छोटे हैं कि उसमें सूरज की रौशनी भी नहीं पहुंच पाती. लेकिन हम लोग ऐसी परिस्थितियों में रहते हैं क्योंकि हमारे कोचिंग संस्थान नज़दीक हैं. हॉस्टल मालिकों की पूरी मोनोपोली चल रही है यहां."

वहीं इस घटना के बाद छात्रा की मौत और न्याय की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन का दौर जारी है. राजद, कांग्रेस, वीआईपी के साथ-साथ महिला संगठनों ने भी कानून व्यवस्था के सवाल पर सरकार को घेरा है.

राज्य के गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने जहां दोहराया है कि कोई भी अपराधी नहीं बचेगा तो वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा, " बिहार की विधि व्यवस्था का जनाज़ा निकल चुका है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.