ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद तुर्की को क्या डर सता रहा है?

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- Author, अमीद मुंतज़री
- पदनाम, बीबीसी, तुर्की-ईरानी सीमा पर वान शहर से
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तुर्की की सबसे बड़ी चिंता यह है कि तेहरान में सरकार गिर सकती है और ईरान गृह युद्ध और इलाके में अफ़रा-तफ़री में फंस सकता है.
सीरिया के अनुभव को देखते हुए तुर्की के अधिकारी ख़ासतौर पर परेशान हैं. उन्हें यह भी डर है कि अगर ईरानी सरकार गिरती है, तो इलाक़े में अपना दबदबा बनाए रखने की कोशिश में तुर्की, इसराइल का अगला टारगेट बन सकता है.
इस पर सबसे साफ़ राय रविवार को नेशनलिस्ट हरकत पार्टी के हेड देवलेत बाग़चिली ने ज़ाहिर की, जो सत्ताधारी गठबंधन की दो पार्टियों में से एक है और रेचेप तैय्यप अर्दोआन की क़रीबी सहयोगी है. उन्होंने यह बात शहर के मेयरों के लिए एक इफ़्तार डिनर के दौरान कही.
इस दौरान उन्होंने कहा, "ईरान का एक बड़ा ऐतिहासिक बैकग्राउंड है, यहां कोई भी गिरावट किसी एक सरकारी मुद्दे तक सीमित नहीं होगी. बल्कि, इसके असर होंगे जैसे बॉर्डर पार सुरक्षा दबाव, आबादी का विस्थापन, सांप्रदायिक तनाव, गैर-कानूनी आर्थिक नेटवर्क का फैलना और हथियारबंद प्रॉक्सी ग्रुप का बढ़ना."
बाग़चिली ने कहा, "तुर्की जिस समस्या का सामना कर रहा है, वह कोई दूर का बॉर्डर संकट नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा, बॉर्डर सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ा है. सीरिया के अनुभव ने हमें बड़ी क़ीमत चुका कर सबक सिखाया है."
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"आज ईरान की तरक्की पर भी ध्यान से नज़र रखनी होगी. जैसे ही किसी इलाक़े में सरकारी वैक्यूम होता है, वहां तर्क, विवेक, सामूहिक समझदारी और दया काम नहीं करती, बल्कि वहां हथियारों का राज होता है."
बाग़चिली ने कहा कि तुर्की को सीरिया की तरह "लापरवाह" नहीं होना चाहिए.
उनका कहना था, "सबसे पहले, बॉर्डर सिक्योरिटी को सबसे ऊंचे लेवल तक मज़बूत किया जाना चाहिए. ईरानी बॉर्डर पर किसी भी संभावित हालात के लिए कई तरह की तैयारी ज़रूरी हैं."
"संभावित रूप से माइग्रेंट्स का दबाव, स्मगलिंग नेटवर्क का फैलना, हथियारबंद प्रॉक्सी का आना-जाना, आतंकवादियों की घुसपैठ और आर्थिक असर को एक बड़े सिक्योरिटी तरीक़े से मैनेज किया जाना चाहिए."
कुर्दों की क्या है तैयारी?

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यह भी हो सकता है कि ईरानी सरकार का विरोध करने वाले कुर्द ग्रुप भी युद्ध में शामिल हो जाएं. अमेरिकी मीडिया ने बताया है कि वॉशिंगटन और तेल अवीव भी यही चाहते हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि 'यह बहुत बढ़िया होगा.'
तुर्की के अधिकारी इसे लेकर बहुत परेशान हैं.
हालांकि कुछ दिनों बाद ट्रंप ने अलग रुख़ अपनाते हुए कहा कि फ़िलहाल कुर्दों को युद्ध में शामिल करने का कोई प्लान नहीं है. हालांकि, यह संभावना पूरी तरह ख़त्म नहीं हुई है.
ईरानी कुर्दिस्तान संगठन कोमला के सेक्रेटरी जनरल अब्दुल्ला मोहतदी ने न्यूज़वीक को बताया कि अगर डोनाल्ड ट्रंप इसका सपोर्ट करते हैं, तो उनकी सेनाएं अमेरिका-इसराइल के जॉइंट एयर कैंपेन के दौरान ईरानी सिक्योरिटी फ़ोर्स के ख़िलाफ़ ग्राउंड ऑपरेशन शुरू करने के लिए तैयार हैं.
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि अगर अमेरिका कुर्द पार्टियों को सुरक्षा और समर्थन देने का फ़ैसला करता है, तो हम बहुत ज़रूरी रोल निभा सकते हैं. हम आज़ादी की प्रक्रिया पारंपरिक तरीक़े शुरू कर सकते हैं."
"लेकिन हम ईरानी सेनाओं को पीछे धकेल सकते हैं और कुर्दिस्तान इलाक़े के शहरों पर क़ब्ज़ा कर सकते हैं, अपने लोगों की रक्षा कर सकते हैं, उन्हें सरकारी सेनाओं के नरसंहार से बचा सकते हैं, शांति ला सकते हैं और अफ़रा-तफ़री को रोक सकते हैं."
अब्दुल्ला मोहतदी के मुताबिक़, इससे ईरानी लोगों को उठ खड़े होने की हिम्मत मिल सकती है.
तुर्की कई दूसरे मामलों को लेकर भी परेशान है. जैसे एनर्जी की क़ीमतों में बढ़ोतरी और उसका इकॉनमी पर असर, इराक़ में बढ़ती अफ़रा-तफ़री जो तुर्की के हितों के लिए ख़तरा बन सकती है और नेटो द्वारा तुर्की के एयरस्पेस में मार गिराई गई मिसाइलें.
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर ने तुर्की पर कोई भी मिसाइल दागने से इनकार किया है.
तुर्की क्या जंग में होगा शामिल?

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तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फ़िदान ने अपने बांग्लादेशी समकक्ष के साथ शनिवार को अंकारा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "यह युद्ध जल्द से जल्द ख़त्म होना चाहिए. इस स्टेज पर, यह साफ़ है कि सभी पार्टियों को बातचीत की टेबल पर लौटना चाहिए और एक पक्का हल सिर्फ़ बातचीत से ही निकल सकता है. तुर्की इस दिशा में अपनी पूरी ताकत लगा रहा है."
"लेकिन मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहूंगा कि शांति और स्थिरता के लिए हमारी सच्ची कोशिशों और अच्छे रवैये का मतलब यह नहीं है कि हम अपनी नेशनल सिक्योरिटी से ज़रा भी समझौता करेंगे. जैसा कि आप जानते हैं, कल हमारी तरफ़ लॉन्च की गई मिसाइल हवा में ही ख़त्म हो गई थी. हम इस गंभीर मुद्दे पर अपने ईरानी समकक्ष के साथ सीधे संपर्क में हैं."
फ़िदान ने इसराइली सरकार की कड़ी आलोचना की और कहा कि तुर्की किसी भी उकसावे के जाल में नहीं फंसेगा और इस "गैरकानूनी युद्ध" में शामिल नहीं होगा.
इस बीच, अब्बास अराग़ची द्वारा सोशल मीडिया पर तुर्की भाषा में जारी पोस्ट को तुर्की मीडिया ने ब्रॉडकास्ट किया.
अराग़ची ने लिखा, "ईरानी लोगों के लिए भाईचारे वाले तुर्की राष्ट्र और दोस्ताना तुर्की सरकार की ओर से दुआएं और एकजुटता का प्रदर्शन हमारे लिए ताक़त और हिम्मत का एक बड़ा ज़रिया है."
लेकिन, बग़दाद में अमेरिकी दूतावास के सिक्योरिटी अलर्ट जारी करने और अमेरिकी नागरिकों को तुरंत इराक़ छोड़ने का निर्देश देने के बाद, तुर्की ने भी ऐसी ही चेतावनी जारी की और अपने नागरिकों को निर्देश दिया कि जब तक बहुत ज़रूरी न हो, इराक़ की यात्रा न करें.
यह चेतावनी बग़दाद में अमेरिकी दूतावास की बिल्डिंग पर ड्रोन हमले के बाद जारी की गई थी.
तुर्की में अब तक युद्ध के ख़िलाफ़ कई प्रदर्शन हुए हैं. सबसे नए विरोध प्रदर्शन में, टर्किश यूथ यूनियन के सदस्य तुर्की और ईरानी झंडे लेकर अंकारा में अमेरिकी दूतावास गए और ईरान पर अमेरिका और इसराइली हमलों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















