होर्मुज़ को लेकर ट्रंप क्यों दे रहे नेटो को धमकी, यूरोप और बाकी देशों ने आने से क्यों मना किया

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को बहुत नुक़सान पहुंचाया है

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इमेज कैप्शन, ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की सेना की ताक़त को पूरी तरह ख़त्म कर दिया गया है, लेकिन ईरान की ओर से हमले रुके नहीं हैं
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ईरान के साथ अमेरिका और इसराइल की जंग में होर्मुज़ स्ट्रेट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए मुसीबत बन गया है. युद्धपोत भेजने की उनकी अपील के बावजूद यूरोप और अन्य देशों ने अभी तक कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं दिखाई है.

इसके बाद रविवार को ट्रंप ने यूरोपीय देशों को धमकी दी और कहा कि अगर वे होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने में मदद नहीं करते हैं, तो यह नेटो के भविष्य के लिए 'बहुत बुरा' होगा.

ये बात उन्होंने फ़ाइनेंशियल टाइम्स के साथ एक साक्षात्कार में और फिर फ्लोरिडा से वॉशिंगटन लौटते हुए अपने एयर फ़ोर्स वन विमान पर पत्रकारों से बात करते हुए दोहराई.

ट्रंप ने उम्मीद जताई कि चीनी राष्ट्रपति के साथ बीजिंग में इसी महीने होने वाली उनकी प्रस्तावित बैठक से पहले चीन होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने में मदद करेगा. उन्होंने कहा कि चीन को "उसका 90 फ़ीसदी तेल इसी स्ट्रेट से मिलता है."

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बीजिंग में ट्रंप और शी जिनपिंग की ये बैठक मार्च के अंत में होनी है, लेकिन ट्रंप ने कहा कि वह चाहते हैं कि इससे पहले ही चीन कोई क़दम उठाए, क्योंकि बैठक दो हफ़्ते बाद होनी है और यह 'लंबा समय' है.

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी चीन यात्रा टल भी सकती है, हालांकि उन्होंने इस बारे में कोई और स्पष्ट जानकारी नहीं दी.

ट्रंप की यह टिप्पणी उस अपील के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने चीन, ऑस्ट्रेलिया, फ़्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलने के लिए "साझा प्रयास" में शामिल होने को कहा था.

ईरान ने संकरी खाड़ी होर्मुज़ स्ट्रेट को लगभग बंद कर रखा है, जोकि दुनिया के तेल व्यापार के 20 प्रतिशत हिस्से का एकमात्र रास्ता है.

इसकी वजह से तेल के दाम सोमवार को भी 100 डॉलर के आस-पास पहुंच गए. तेल व्यापार से जुड़े जानकारों का कहना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचा तो तेल के दाम और बढ़ सकते हैं.

इस जंग में तेल के दाम बढ़ने से घरेलू स्तर पर भी ट्रंप पर दबाव बन रहा है और इसी वजह से पिछले सप्ताह अमेरिका ने भारत समेत कई देशों को रूस का वो तेल ख़रीदने की हरी झंडी दी, जो जहाजों पर लदा है और ये जहाज़ प्रतिबंधों के कारण समंदर में फंसे हुए हैं.

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ट्रंप ने यूरोप को लेकर क्या कहा?

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ट्रंप का कहना है कि यूरोप और चीन खाड़ी से आने वाले तेल पर काफ़ी हद तक निर्भर हैं.

ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों को चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा कि अगर कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है, तो यह 'नेटो के भविष्य के लिए बहुत बुरा' हो सकता है.

उन्होंने कहा कि 'ये देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा देश इस कोशिश में अमेरिका की मदद करता है.'

हालांकि उन्होंने ताज़ा बयान में किसी विशेष देश का नाम नहीं लिया लेकिन उन्होंने नेटो गठबंधन और उन देशों का ज़िक्र ज़रूर किया जिनके बारे में उनका मानना है कि 'उन देशों को अपनी ख़ुद की सुरक्षा करने की ज़रूरत है.'

दो दिन पहले ही ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा था, "उम्मीद है कि चीन, फ़्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और दूसरे देश जहाज़ भेजेंगे ताकि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को ऐसे देश से ख़तरा न हो, जो पूरी तरह ख़त्म हो चुका है."

ट्रंप ने चेतावनी दी कि 'अगर दूसरे देशों से कोई जवाब नहीं आता है तो यह नेटो के भविष्य के लिए बहुत बुरा हो सकता है क्योंकि यूरोपीय सहयोगियों के प्रति अमेरिका बहुत नरम रहा है.'

अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा, "हमें यूक्रेन के लिए उनकी मदद करना ज़रूरी नहीं था. यूक्रेन हमसे हज़ारों मील दूर है... लेकिन हमने उनकी मदद की. अब हम देखेंगे कि क्या वे हमारी मदद करते हैं. क्योंकि मैं लंबे समय से कहता आया हूं कि हम उनके लिए खड़े रहेंगे, लेकिन वे हमारे लिए खड़े नहीं रहेंगे. और मुझे यक़ीन नहीं है कि वे खड़े होंगे."

ट्रंप ने कहा कि दो हफ़्ते पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री अपने दो विमानवाहक पोत होर्मुज़ भेजने से हिचकिचा रहे थे.

उन्होंने कहा, "अब जब हमने इसे काफ़ी हद तक तबाह कर दिया... तो उन्होंने कहा, 'हम अपने विमानवाहक पोत भेजना चाहते हैं'. इस पर मैंने कहा, 'जंग जीतने के बाद मुझे उनकी ज़रूरत नहीं है'."

ट्रंप ने कहा, "मुझे उनकी ज़रूरत तब थी जब हम जंग शुरू कर रहे थे. इसलिए हमें समर्थन मिले या न मिले, मैं इतना कह सकता हूं और मैंने उनसे भी कहा है: हम इसे याद रखेंगे."

ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने जिन देशों से होर्मुज़ स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की है, उनके मदद करने या नहीं करने, दोनों ही स्थिति में वह 'याद रखेंगे'.

युद्धपोत भेजने की ट्रंप की अपील पर देशों ने क्या कहा

ट्रंप ने होर्मुज़ स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए चीन, फ़्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से युद्धपोत भेजने की अपील की है (फ़ाइल फ़ोटो)

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ट्रंप ने शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में उम्मीद जताई थी कि चीन, फ़्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन होर्मुज़ स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजेंगे.

इस अपील पर कुछ देशों ने प्रतिक्रिया दी है.

ब्रिटेन: ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "जैसा कि हम पहले भी कह चुके हैं, हम क्षेत्र में शिपिंग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने सहयोगियों और साझेदारों के साथ कई विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं."

ग़ौरतलब है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने शुरू में अमेरिका को ईरान के ख़िलाफ़ इसराइल के साथ उसके संयुक्त हमले में ब्रिटिश सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने की इजाज़त देने से मना कर दिया था, जिसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी अनबन हो गई थी. लेकिन बाद में स्टार्मर ने ब्रिटिश बेस से ईरान के मिसाइली अड्डों के ख़िलाफ़ "डिफ़ेंसिव" अमेरिकी कार्रवाई को मंज़ूरी दे दी.

इस जंग में साइप्रस में ब्रिटिश हवाई अड्डे को भी निशाना बनाया गया है.

चीन: वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने सीएनएन से कहा कि चीन तुरंत युद्ध समाप्त करने की अपील करता है. हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि चीन ट्रंप के अनुरोध को स्वीकार करेगा या नहीं, लेकिन उन्होंने कहा कि स्थिर और बिना किसी बाधा की ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना सभी पक्षों की ज़िम्मेदारी है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि चीन संबंधित पक्षों के साथ संवाद को मज़बूत करता रहेगा.

जापान: बुधवार से शुरू हो रहे प्रधानमंत्री सनेई तकाइची के अमेरिका दौरे में इस मुद्दे पर बात होने की संभावना है. हालांकि तकाइची ने सोमवार को कहा कि उनके देश को होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलने में मदद के लिए कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है, लेकिन वह "उचित प्रतिक्रिया कैसे दी जाए" इस पर विचार कर रही हैं.

इससे पहले उन्होंने कहा था, "जापानी क़ानून के तहत समुद्र में किसी तरह की सुरक्षा या पुलिस कार्रवाई करना बेहद मुश्किल है. हमें यह देखना होगा कि मौजूदा क़ानूनी ढांचे के भीतर रहकर हम सबसे बेहतर क़दम क्या उठा सकते हैं."

फ़्रांस: फ़्रांस के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक एक्स अकाउंट ने उन ख़बरों से इनकार किया जिनमें कहा गया था कि फ़्रांस अपने युद्धपोत होर्मुज़ स्ट्रेट भेज रहा है. जबकि फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए बताया कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से उनकी बात हुई है.

उन्होंने लिखा, " मैंने ईरान से कहा है कि वह क्षेत्र में अन्य देशों के ख़िलाफ़ हमले तुरंत बंद करे. मैंने याद दिलाया कि फ़्रांस अपने हितों, क्षेत्र में अपने साझेदारों और फ़्रीडम ऑफ़ नेविगेशन को लेकर अभी रक्षात्मक रवैया अपना रहा है और हमारा देश खुद पर हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा. होर्मुज़ स्ट्रेट में स्वतंत्र आवाजाही तुरंत बहाल की जानी चाहिए."

जर्मनीः जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने रविवार को कहा कि "एस्पाइड्स" मिशन अपने मौजूदा काम को पूरा करने में भी प्रभावी नहीं है. उन्होंने जर्मनी के एआरडी टेलीविजन को दिए इंटरव्यू में कहा, "इसी कारण मुझे संदेह है कि एस्पाइड्स मिशन को होर्मुज़ स्ट्रेट तक बढ़ाने से ज्यादा सुरक्षा मिल पाएगी."

दक्षिण कोरिया: दक्षिण कोरियाई सरकार की ओर से सोमवार को कहा गया कि वह मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष पर 'क़रीबी नज़र' बनाए हुए है. विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा, "दक्षिण कोरिया अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रहा है, ताकि कोरियाई नागरिकों की रक्षा की जा सके और ऊर्जा परिवहन मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके."

ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट को फ़िर से खोलने में मदद के लिए अपने युद्धपोत नहीं भेजेगा. प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ की कैबिनेट की सदस्य कैथरीन किंग ने सरकारी प्रसारक एबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा, "हम होर्मुज़ स्ट्रेट में युद्धपोत नहीं भेजेंगे. हमें पता है कि यह कितना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके लिए हमसे न तो अनुरोध किया गया है और न ही हम इसमें योगदान दे रहे हैं."

यूरोपीय संघः यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री सोमवार को पश्चिम एशिया में चल रहे छोटे नौसैनिक मिशन को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे. हालांकि राजनयिकों और अधिकारियों के अनुसार इस मिशन का दायरा बढ़ाकर बंद पड़े होर्मुज़ स्ट्रेट तक करने पर चर्चा होने की संभावना नहीं है.

यूरोपीय संघ का एस्पाइड्स मिशन 2024 में शुरू किया गया था. इसका उद्देश्य लाल सागर में यमन के हूती विद्रोही समूह के हमलों से जहाजों की सुरक्षा करना है.

स्पेन ने खुलकर जताया विरोध जताया

यूरोपीय देश स्पेन ने ईरान के साथ अमेरिका इसराइल के जंग का खुलकर विरोध किया है.

एक टेलीविज़न प्रसारण में स्पेन के प्रधानमंत्री पेट्रो सांचेज़ ने कहा, "सवाल यह नहीं है कि क्या हम आयतुल्लाओं (ईरान के धार्मिक शासकों) के पक्ष में हैं, कोई भी नहीं है. सवाल यह है कि क्या हम शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून के पक्ष में हैं."

उन्होंने कहा, "आप एक गैरकानूनी काम का जवाब दूसरे गैरकानूनी काम से नहीं दे सकते, क्योंकि इसी तरह मानवता की बड़ी त्रासदियां शुरू होती हैं."

ग़ज़ा पर जंग को लेकर बोलने वाला स्पेन यूरोप का एकमात्र मुखर देश रहा है.

इसके बाद ट्रंप ने स्पेन से सारे व्यापारिक रिश्ते ख़त्म करने की धमकी दी थी.

ईरान बातचीत के लिए बेताब है- ट्रंप

होर्मुज़

ट्रंप ने कहा है कि ईरान बातचीत करना चाहता है. उन्होंने यह भी कहा कि ग़लत जानकारी फैलाने के लिए ईरान एआई का इस्तेमाल कर रहा है.

'एयर फ़ोर्स वन' में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि 'ईरान समझौता करने के लिए बेताब है.' कूटनीतिक बातचीत के बारे में उन्होंने बताया, "हम उनसे बात कर रहे हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे अभी तैयार हैं, हालांकि वे काफ़ी क़रीब पहुंच रहे हैं."

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह ईरान पर जीत की घोषणा करने के लिए तैयार हैं, तो उन्होंने कहा, "ऐसा करने की कोई वजह नहीं है."

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने इतना नुक़सान पहुंचाया है कि "अगर हम अभी उन्हें छोड़ दें तो उन्हें दोबारा खड़े होने में 10 साल लगेंगे."

ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई के समर्थन में एक चौक पर हज़ारों लोगों के जुटने की तस्वीरें, "कामिकाज़ी बोट्स" से जुड़े दावे और यूएसएस अब्राहम लिंकन पर हमले की ख़बरें एआई से बनाई गई हैं.

हालांकि उन्होंने इसके लिए कोई सबूत नहीं दिया.

बातचीत को लेकर ईरान ने क्या कहा?

अब्बास अराग़ची

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इमेज कैप्शन, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने दावा किया कि कई देशों ने ईरान से संपर्क किया है, ताकि उन्हें होर्मुज़ स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता मिल सके (फ़ाइल फ़ोटो)

ईरानी विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराग़ची ने दावा किया है कि ईरान ने कभी युद्धविराम या बातचीत की मांग नहीं की है.

अराग़ची ने रविवार को कहा कि ईरान ने "कभी भी युद्धविराम की मांग नहीं की है और न ही बातचीत की मांग की है."

बीबीसी के अमेरिकी साझेदार सीबीएस न्यूज़ से बात करते हुए अब्बास अराग़ची ने कहा, "हमें कोई वजह नहीं दिखती कि हम अमेरिकियों से बात करें, क्योंकि जब हम उनसे बात कर रहे थे, उस समय उन्होंने हम पर हमला करने का फ़ैसला किया."

अराग़ची ने होर्मुज़ स्ट्रेट पर कहा, "ईरान उन देशों से बातचीत करने को तैयार है जो होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही पर चर्चा करना चाहते हैं. कई देशों ने ईरान से संपर्क किया है, ताकि उन्हें होर्मुज़ स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता मिल सके."

ग़ौरतलब है कि भारत के दो जहाज़ हाल ही में होर्मुज़ स्ट्रेट से भारत रवाना हुए हैं, जिसे भारत के विदेश मंत्री ने बातचीत का नतीजा बताया था.

सीबीएस से अराग़ची ने यह भी कहा, "ईरान की न्यूक्लियर फ़ैसिलिटीज़ अब मलबे में दब चुकी हैं और फ़िलहाल उन्हें वापस बनाने का कोई कार्यक्रम या योजना नहीं है."

इस बीच ईरान ने अब इसराइल और अमेरिकी सैन्य केंद्रों पर भारी और तेज़ सेजिल मिसाइलों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है.

बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, आईआरजीसी ने रविवार को एक बयान में कहा, "इन हमलों में ख़ोर्रमशहर मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ. पहली बार इस ऑपरेशन में 4 ख़ास स्ट्रेटेजिक मिसाइलें और सॉलिड फ़्यूल वाली सेजिल मिसाइल का भी इस्तेमाल किया गया."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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