'मेरी बेटी को क्यों इंसाफ़ नहीं मिला?': मणिपुर में 'गैंगरेप सर्वाइवर' की ढाई साल बाद मौत

कैंडल लाइट मार्च निकालते लोग

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इमेज कैप्शन, चूराचांदपुर में 17 जनवरी को पीड़ित को श्रद्धांजलि देते आम लोग
    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए

"मेरी बेटी दर्द और सदमे में थी. रेप की घटना से वो टूट चुकी थी. उसके मन में यौन हिंसा का ऐसा डर बैठ गया था कि दहशत में कई बार सांस तक अटक जाती थी.."

इतना कहते ही ये महिला काफ़ी देर तक ख़ामोश हो जाती हैं. उन्होंने 11 जनवरी की शाम को घर पर अपनी 20 साल की बेटी को खो दिया.

मणिपुर में कुकी-ज़ो जनजाति और मैतेई समुदाय के बीच शुरू हुई जातीय हिंसा के दौरान 15 मई 2023 की शाम को इंफ़ाल के न्यू-चेकॉन इलाक़े में स्थित एक एटीएम के पास से कुछ लोगों ने उनकी बेटी को अग़वा कर लिया था.

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मां ने क्या-क्या बताया

लड़की की मां ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "मुझे उम्मीद थी कि वो ठीक हो जाएगी. मैं पिछले ढाई साल से उसे इलाज के लिए कांगपोकपी से लेकर गुवाहाटी के अस्पतालों का चक्कर काटती रही लेकिन उसे बचा नहीं पाई."

"वह बार-बार बीमार पड़ रही थी. उसने लोगों से मिलना-जुलना बंद कर दिया था और वह किसी से बात नहीं करना चाहती थी. वह घर पर रहती और कभी-कभी बाइबल पढ़ती थी."

"हम उसे एक साइकियाट्रिस्ट और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट द्वारा बताई गई दवा दे रहे थे. लेकिन 11 जनवरी को उसने पहले उल्टियां कीं और बाद में उसे सांस लेने में तकलीफ़ होने लगी, फिर दोपहर 3 बजे के क़रीब उसने दम तोड़ दिया."

बेटी के साथ हुई घटना के बारे में वो कहती हैं, "मेरी बेटी को अग़वा करने के बाद वे लोग उसे पहले सफ़ेद रंग की कार में ले गए. उसके साथ मारपीट की. बाद में उन लोगों ने लैंगोल के एक सुनसान इलाक़े में सामूहिक बलात्कार किया."

"वो इस भयानक यौन हिंसा के बाद भी वहां से भागने में सफल रही. लेकिन उसके गर्भाशय में काफ़ी चोटें आई थीं. वो उस घटना को भुला नहीं पा रही थी. मैं जब भी उसे इलाज के लिए शहर लेकर जाती उसे सफ़ेद रंग की कार नज़र आती थी. उसे ऐसा सदमा लगा जिसने उसकी जान ले ली."

श्रद्धांजलि देते लोग

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इमेज कैप्शन, चूराचांदपुर में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया

तक़रीबन ढाई साल पहले हुई थी घटना

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एपिसोड

समाप्त

असल में जुलाई 2023 में कुकी-ज़ो समुदाय की दो महिलाओं को नग्न घुमाने का एक वीडियो सामने आया था. उसी दौरान 20 साल की इस युवती ने भी कांगपोकपी थाने में यौन हिंसा, मारपीट और सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाते हुए एफ़आईआर दर्ज कराई थी.

जिस समय इस लड़की के साथ यौन हिंसा हुई वो 17 साल की थीं.

परिजनों का आरोप है कि उस भयानक घटना के बाद से ही वो गंभीर शारीरिक चोट के कारण ट्रॉमा और गर्भाशय की समस्याओं से जूझ रही थीं और गुवाहाटी में उनका इलाज चल रहा था.

उनकी मां रोते हुए कहती हैं, "मेरी 17 साल की बेटी के साथ मैतेई समुदाय के एक संगठन के लोगों ने बलात्कार किया. हमने थाने में एफ़आईआर भी की लेकिन अब तक किसी एक अपराधी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया."

"सरकार बेटियों को बचाने की बात करती है तो मेरी बेटी को क्यों नहीं बचाया गया? मेरी बेटी को क्यों इंसाफ़ नहीं मिला? वो जिंदा रहते हुए अपराधियों को क्यों सलाखों के पीछे नहीं देख पाई? क्या इंसाफ़ केवल पहुंच वाले लोगों को ही मिलता है? मैं अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए आखिरी सांस तक लडूंगी."

इस घटना को लेकर 21 जुलाई 2023 को कांगपोकपी थाने में दर्ज कराई गई ज़ीरो एफ़आईआर में गैंगरेप समेत हमला, हत्या की कोशिश, हत्या के इरादे से अपहरण या अग़वा करना जैसी धाराएं लगाई गई हैं.

लड़की ने पुलिस को जो लिखित शिकायत दी उसमें काली पोशाक में हथियारों के साथ आए चार लोगों द्वारा किडनैप कर ले जाने के आरोप लगाए थे.

मणिपुर में हिंसा

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इमेज कैप्शन, मणिपुर में हिंसा की शुरुआत 3 मई 2023 को हुई थी

मामला सीबीआई को ट्रांसफ़र किया गया

मणिपुर में 3 मई, 2023 को शुरू हुई हिंसा में ख़ासकर महिलाओं के ख़िलाफ़ हुए जघन्य अपराधों के कई मामले की इस समय गुवाहाटी में स्पेशल सीबीआई कोर्ट में सुनवाई चल रही है.

मृतक युवती के मामले को भी जांच के लिए सीबीआई को ट्रांसफ़र किया गया था. मामला दर्ज होने के बाद कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया.

हालांकि मृतका की मां ने बताया कि उन्हें इस मामले में किसी गिरफ्तारी या जांच की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

लड़की की मौत के बाद कुकी-ज़ो समुदाय में भारी नाराज़गी है.

कुकी जनजाति के प्रमुख संगठन कमेटी ऑन ट्राइबल इंटेग्रिटी के प्रवक्ता लुन किपगेन ने कहा, "किशोरी के साथ हुई बर्बरता को लेकर जुलाई 2023 में मणिपुर पुलिस में एक ज़ीरो एफआईआर दर्ज की गई थी. सुप्रीम कोर्ट के दख़ल के बाद 27 एफआईआर के एक बैच के हिस्से के तौर पर 22 जुलाई, 2023 को यह मामला भी सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था."

"ढाई साल से ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी इस मामले में कार्रवाई के तौर पर कुछ भी सामने नहीं आया. कोई आरोप तय नहीं किए गए हैं."

कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन की दिल्ली यूनिट ने भी एक प्रेस बयान जारी कर मणिपुर में तनाव के दौरान हुई यौन हिंसा के मामलों में जवाबदेही की मांग की है.

इस मामले में कुकी जनजाति के एक और प्रमुख संगठन इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम ने मृतका के साथ हुई घटना को "क्रूर और अनसुलझे अत्याचारों का प्रतीक" बताया.

फोरम ने 17 जनवरी को अपराधियों को तुरंत गिरफ्तार करने को लेकर चुराचांदपुर में एक कैंडल मार्च निकाला था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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