होली के दिन झगड़ा, युवक की मौत और बुलडोज़र कार्रवाई: उत्तम नगर में अब कैसा है माहौल

- Author, शुभांगी मिश्रा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
दिल्ली के उत्तम नगर इलाक़े में होली के दिन हिंसा और एक युवक की मौत के छह दिन बाद भी तनाव साफ़ महसूस किया जा सकता है. इलाक़े में पुलिस की कड़ी क़िलेबंदी है.
इस हिंसा में 26 साल के तरुण गंभीर तौर पर ज़ख़्मी हो गए थे. बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. उनका परिवार ग़म और ग़ुस्से में है.
उनकी हत्या के अभियुक्तों में से एक के घर पर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), पश्चिम ज़ोन ने बुलडोज़र चलाया और कुछ हिस्सा ढहा दिया.
एमसीडी के एक अफ़सर के मुताबिक़, घर के ये हिस्से अतिक्रमण करके बने थे.
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दूसरी ओर, इलाक़े के जेजे कॉलोनी बाज़ार में सन्नाटा पसरा है और लोगों को लग रहा है कि इस बार ईद नहीं मन पाएगी.
इस पूरी घटना को कुछ लोग साम्प्रदायिक मान रहे हैं तो कुछ आपसी पुरानी रंजिश.
पुलिस ने सात मार्च को एक बयान में कहा था कि यह दो पड़ोसियों के बीच का झगड़ा है. इसे कुछ और रंग देने और क़ानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर सख़्त कार्रवाई की जाएगी.
बीबीसी की टीम ने सोमवार को इस इलाक़े का दौरा किया.
यह इलाक़ा तीन सेक्टर में बँटा है. यहाँ क़रीब 20 हज़ार घर हैं. अलग-अलग धर्मों के लोग सालों से एक साथ रहते हैं.
हिंसा के बाद अभी इस इलाक़े में क़रीब साढ़े चार सौ सुरक्षाकर्मी तैनात हैं. गलियों में पीले रंग के बैरिकेड लगे जिससे एक गली से दूसरी गली जाना मुश्किल है.
द्वारका के डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (डीसीपी) कुशल पाल सिंह ने बीबीसी हिन्दी को बताया कि इलाक़े में डेढ़ सौ से अधिक बैरिकेड लगाए गए हैं.
तरुण के घरवालों ने क्या बताया

जेजे कॉलोनी की संकरी गलियों में तरुण का चार मंज़िला मकान है. यह मुश्किल से 50 गज़ में फैला है. तरुण अपने चाचा, ताऊ और भाई-बहनों के साथ संयुक्त परिवार में रहते थे.
इस गली में तक़रीबन 45 मकान हैं. इनमें से लगभग आधे मुसलमानों और आधे हिन्दुओं के हैं. हिन्दू ज़्यादातर दलित हैं.
डीसीपी कुशल पाल सिंह के मुताबिक़, होली के दिन तरुण के परिवार और उनके पड़ोसियों के बीच रात के क़रीब साढ़े दस बजे कथित झगड़ा उस वक़्त शुरू हुआ, जब एक बच्ची ने बालकनी से पानी भरा गुब्बारा फेंका. यह एक मुस्लिम महिला को जा लगा. उनके मुताबिक़, इसके बाद महिला ने चिल्लाना शुरू किया.
तरुण के घरवालों का दावा है कि उनकी चीख-पुकार सुनकर महिला के घरवाले भी मौक़े पर आ गए और उन्होंने कथित तौर पर हमला कर दिया. इसी बीच तरुण अपनी बाइक से वहाँ पहुँचे.
परिजनों का आरोप है कि इसके बाद उन्हें हमले का निशाना बनाया गया.
बीबीसी से बात करते हुए उनके पिता ममराज ने बताया कि गंभीर रूप से घायल तरुण को एक स्कूटर से पास के अस्पताल ले जाया गया. वहाँ पाँच मार्च (होली के दूसरे दिन) को उनकी मौत हो गई.
डीसीपी कुशल पाल सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि तरुण के शरीर पर कई जगह चोट और घाव थे. इनकी वजह से ही तरुण की मृत्यु हुई.
इसके बाद इस घटना के विरोध में कई संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं.
पुलिस का क्या कहना है?

डीसीपी के मुताबिक़, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (हत्या), धारा 3(5) (एक ही इरादे से किया गया सामूहिक अपराध) और एससी/एसटी एक्ट और पॉक्सो की धाराओं के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है.
तरुण परिवार के वकील सुमित कुमार ने बीबीसी हिन्दी को बताया कि 22 लोगों के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है.
बीबीसी हिन्दी ने यह शिकायत पढ़ी है. इसमें यह भी आरोप है कि परिवार वालों के साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया और उनके घर की नाबालिग बच्ची को यौन हिंसा की धमकियाँ दी गईं.
डीसीपी कुशलपाल सिंह का कहना है कि ये परिवार एक-दूसरे को काफ़ी साल से जानते थे.
हालाँकि, तरुण के पिता ममराज ने इस बात से इनकार किया. यही नहीं, उन्होंने कहा कि उनकी उस परिवार से कोई पुरानी रंजिश नहीं थी.
हमने देखा कि तरुण के घर में मातम पसरा है. ममराज ने बताया कि तरुण इंटीरियर डिजाइन का कोर्स कर रहे थे.
वह बताते हैं, "वह मुझसे कहता था पापा, मैं एक दिन बड़ा आदमी बनूँगा. बहुत पैसे कमाऊँगा और आपकी सेवा करूँगा. मेरा बेटा बहुत अच्छा था, वह मेरे बुढ़ापे का सहारा था."
उस दिन मारपीट में परिवार के कई और लोग भी घायल हो गए थे. ममराज की एक आँख पर गहरा काला घाव भी दिखा. उनके ताऊ रमेश का हाथ टूट गया है और सिर पर आठ टाँके लगे हैं. उनकी माँ के सिर और चेहरे पर भी चोटें आई हैं.
इस मामले में अब तक 16 लोगों की गिरफ़्तारी हो चुकी है. इनमें दो नाबालिग भी हैं.
पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ़्तार किया है, इनमें उमरदीन (49), जुम्मादीन (36), कमरुद्दीन (36), मुश्ताक़ (46), मुज़फ़्फ़र (25), ताहिर (18), इमरान उर्फ़ बंटी (38), सायरा उर्फ काली (40), शरीफ़न (50), सलमा (36), सुहेल (21), समीर (20), फ़िरोज़ (22) और इस्माइल (50) शामिल हैं.
डीसीपी कुशल पाल सिंह ने बीबीसी हिन्दी को बताया कि नाबालिगों को 'जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड' के सामने पेश किया जा चुका है. वहीं बाकी अभियुक्त न्यायिक हिरासत में हैं.
उन्होंने बताया कि पुलिस ने इलाक़े की सीसीटीवी की जाँच भी की है. उनके पास झगड़े का एक छोटा पाँच सेकंड का वीडियो भी है. इसमें कुछ लोग लाठियों के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं.
उनके मुताबिक़, इस वीडियो की जाँच चल रही है.
बुलडोजर से मकान तोड़ा गया

नीली यूनिफॉर्म पहने रैपिड एक्शन फ़ोर्स (आरएएफ़) जवान घटना वाली गली की निगरानी कर रहे हैं. दोनों तरफ़ बैरिकेड लगे हैं और आवाजाही पर रोक है.
इस मामले में अभियुक्तों के घरों पर ताले लटके हैं.
इनमें से एक अभियुक्त के तीन मंज़िला घर का एक हिस्सा एमसीडी ने आठ मार्च को बुलडोजर से तोड़ा है. एमसीडी का दावा है कि घर का यह हिस्सा अतिक्रमण करके बना था. मकान की ईंटें सड़क पर बिखरी पड़ी दिखीं.
यह मकान वार्ड-107, विकासपुरी के पार्षद असीवाल की मौजूदगी में तोड़ा गया था. उनका कहना है, "आरोपियों को ऐसा सबक सिखाना ज़रूरी था."
बीबीसी हिन्दी से उन्होंने कहा, "हमने सिर्फ़ अवैध ढाँचे और अतिक्रमण को ही हटाया है. यह कार्रवाई हमने इलाक़े में बढ़ते आक्रोश को शांत करने के लिए की है."
एमसीडी के एक सीनियर अफ़सर ने नाम न बताने की शर्त पर बीबीसी हिन्दी से कहा कि कार्रवाई का मक़सद एक नाले से अतिक्रमण हटाना था. उनके मुताबिक़, "अनधिकृति ढाँचे को ढहाने से पहले नोटिस देना होता है न कि अतिक्रमण हटाने के लिए."
हमने पाया कि यह घर, मोहल्ले के बाक़ी घरों से अलग नहीं दिख रहा था. हालाँकि, तोड़-फोड़ सिर्फ़ इसी एक घर में की गई.
डीसीपी कुशल पाल सिंह का कहना है कि इस कार्रवाई की जानकारी उन्हें एमसीडी से आठ मार्च की सुबह मिली और उन्होंने केवल एमसीडी का सहयोग किया.
इससे पहले भी दूसरे राज्यों में किसी अपराध के अभियुक्तों के घरों को ढहाने के लिए बुलडोज़र का इस्तेमाल हो चुका है. विपक्ष और मानवाधिकार संगठन इसकी तीखी आलोचना करते रहे हैं.
पीटीआईके मुताबिक़, छह मार्च को इस घर पर प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया था और कुछ गाड़ियाँ भी जलाई थीं.
डीसीपी कुशल पाल सिंह ने कहा है कि आगज़नी के मामले की जाँच चल रही है और उचित कार्रवाई की जाएगी. हालाँकि, पुलिस ने अभी तक प्रदर्शनकारियों की पहचान नहीं की है और न ही इस मामले में कोई एफ़आईआर दर्ज हुई है.
इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए बुधवार की सुबह तक किसी तरह के तोड़-फ़ोड़ पर रोक लगा दी है.
अभियुक्त के परिवार की महिला का दावा

दूसरी ओर, इस घटना के बाद अभियुक्तों के घरवाले मोहल्ले में मौजूद नहीं हैं.
इस बीच, इस मामले में एक अभियुक्त सायरा की भतीजी सामने आईं. उन्होंने दिल्ली में 10 मार्च को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की. हालाँकि, उन्होंने अपनी पहचान ज़ाहिर नहीं की.
उन्होंने अपने रिश्तेदारों पर लगे आरोपों को सिरे से ख़ारिज़ करते हुए उन्हें ग़लत बताया. उन्होंने घटना का अलग ही विवरण देते हुए दावा किया कि सायरा के ऊपर किसी बच्ची ने नहीं बल्कि एक 20 साल के युवक ने गंदे पानी का गुब्बारा फेंका था.
उनका आरोप है कि इसके बाद उनके साथ बदतमीज़ी भी की गई.
उन्होंने रोते हुए कहा, "इसके बाद मेरे घर के पुरुष बाहर आए और गली में हाथापाई शुरू हो गई. जब दोनों घरों के बड़े-बुजुर्ग आपसी समझौते की बातें कर ही रहे थे, तब ही तरुण कुछ लड़कों के साथ हॉकी स्टिक और सरिया लेकर वहाँ आ धमका.''
उनका आरोप है, ''उन लोगों ने मेरे परिवार वालों के सिर पर वार किया,"
इस महिला का यह भी दावा है कि तरुण के सिर पर चोट उनके घरवालों की ही लाठी से लगी. उनका दावा है, "तरुण घर पर कुछ लड़कों के साथ नशे में आया था. उन्हीं का डंडा तरुण के सिर पर लगा और वह बेहोश होकर गिर गया."
उन्होंने यह भी कहा कि इस मारपीट में उनके परिवार वालों को भी चोटें आई हैं.
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इस महिला ने कहा, "घर पर बुलडोज़र चलाना कहाँ का इंसाफ़ है? हमारा सारा सामान, हमारे डाक्यूमेंट्स, हमारा कैश, जेवर .. सब जला दिए. हमें बेघर कर दिया."
इलाक़े में ईद कैसे मनेगी

यहाँ के प्रमुख जेजे कॉलोनी बाज़ार के दुकानदारों ने बताया कि रमज़ान के दौरान यह इलाक़ा आमतौर पर जगमगाता रहता था. इफ़्तार के बाद बेहद रौनक रहती थी. इस साल सब सूना-सूना है.
बाज़ार रोशनी की झालर और रंगीन कागज़ों से सजे हैं. जगह-जगह 'रमज़ान मुबारक' के बोर्ड भी लगे हैं, लेकिन दुकानों के शटर गिरे हुए हैं.
यहाँ के मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष अज़हर कहते हैं कि रमज़ान का महीना ख़राब किया जा रहा है.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया, "रोज़ यहाँ लोग आकर नारेबाज़ी करते हैं और भड़काने की कोशिश करते हैं. इसी एहतियात के तौर पर सारी दुकानें बंद हैं ताकि कोई झगड़ा न हो और बात न बढ़े."
बीबीसी की टीम ने भी देखा कि उत्तम नगर थाने के सामने छोटे-छोटे प्रदर्शन लगातार चल रहे हैं. यहाँ तरह-तरह के नारे लग रहे हैं.
यहाँ के मुस्लिम एसोसिएशन के अध्यक्ष ख़ालिद अली का दावा है, "ये प्रदर्शनकारी भड़काऊ बातें करते हैं और इन्हें कोई नहीं रोकता. हमने सुरक्षा के लिए दुकानें बंद रखी हैं और अपने युवकों को घरों में रहने को कहा है. हम किसी को बाहर नहीं आने दे रहे."
उनके मुताबिक़, आपसी रंजिश के मामले को सांप्रदायिक रूप दिया जा रहा है.
इसी समुदाय के कई अन्य लोगों का कहना है कि उनके दिलों में डर बैठ गया है और ऐसा लग रहा है कि इस साल ईद नहीं मनाई जाएगी.
ख़ालिद अली ने कहा, "अब हमारे पास ईद मनाने के लिए पैसे भी नहीं हैं. दुकानें बंद होने से कोई कमाई नहीं हुई है और न ही अब कोई मन है. अगर ईदगाह में इजाज़त मिली तो वहाँ नमाज़ पढ़ेंगे वरना हमें अपनी छोटी मस्जिदों में ही नमाज़ पढ़नी होगी."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.












